अन्य राज्यों से गांव आने वाले मजदूरों को रखने 1337 भवनों का किया चयन

91 हजार 8 सौ क्वारंटाइन क्षमता तैयार, अब तक 3 हजार 9 सौ से अधिक श्रमिक हुए क्वारंटाइन

By: dharmendra ghidode

Published: 16 May 2020, 05:29 PM IST

भाटापारा/बलौदाबाजार. जिला कलेक्टर कार्तिकेया गोयल के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन बाहर राज्यों से आने वाले श्रमिकों के रुकने लिए पूरी व्यवस्था कर ली गई है। इसके लिए जिला के 6 सौ 86 गांवो के 1337 चयनित भवनों में होम क्वारंटइन की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। जिला पंचायत सीईओ आशुतोष पाण्डेय ने बताया कि हमारे पास वर्तमान में जिला के 6 जनपदों में 91 हजार 8 सौ 45 लोगों को रुकवाया जा सकेगा। इसकी पूरी तैयारी की जा चुकी है। आवासीय क्षमता जनपद अनुसार निम्न है-
सिमगा 9 हजार 6 सौ 80, बलौदाबाजार 12 हजार 6 सौ 85, भाटापारा 12 हजार 7 सौ 80, पलारी 10 हजार 6 सौ 80, कसडोल 18 हजार 2 सौ एवं बिलाईगढ़ 27 हजार 8 सौ 20 इस तरह कुल 91 हजार 8 सौ 45 लोगों को वर्तमान में रुकवाया जा सकता है। लगातार अन्य राज्यों से मजदूरों का आना जारी है। उन्हें प्रोटोकॉल के अनुसार बकायदा स्वास्थ्य परीक्षण कर उनके नजदीकी गांवो में प्रशासन की ओर से पहुंचा कर उन्हें निर्धारित भवनों में 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया जा रहा है। गुरुवार को दोपहर 12 बजे तक बाहर राज्यों से आए जिला के कुल 3 हजार 9 सौ 53 श्रमिकों को निर्धारित भवनों में क्वारंटाइन किया गया है। इसमें सिमगा में 349, बलौदाबाजार में 1184, भाटापारा में 555, पलारी में 835, कसडोल में 303, बिलाईगढ़ में 727 लोग शामिल हैं। इसके लिए पंचायत विभाग अलग से कार्य कर रहा है। सभी की व्यवस्था वहां के सरपंच सचिव के माध्यम से किया जा रहा है।
हैदराबाद से लौटे सोमनाथ वर्मा (29) और उनकी पत्नी बिंदेश्वरी वर्मा ने बताया कि मेरे पति राज मिस्त्री का काम करते हैं। मैं उनके काम में सहयोग प्रदान करती हूं। हम लोग पहली बार गांव छोड़कर काम करने गए थे। यह हमारा पहला और आखिरी बार जाना था। अब हम कभी भी गांव आए बाहर दूसरे राज्य नही जाएंगे। यही रहकर काम करेंगे। हम जब यहां आए तो स्कूल में 14 दिन रुकने कहा गया है। सरपंच ने चांवल और आलू हमें प्रदान किया है। यहां भवन में लाइट एवं पंखा पानी सभी सुविधाएं उपलब्ध हो रही है।
रख रहे सभी सुविधाओं का ध्यान
बलौदाबाजार जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत जामडीह में कुल 25 लोग बाहर राज्यों से आए हैं। यह सभी जामडीह के ही निवासी हैं। यह लोग खाने कमाने के काम से जबलपुर, हैदराबाद, कानपुर, भंडारा नागपुर गए थे। लॉक डाउन में फंसे होने के बाद उनकी परेशानी बढ़ गई थी। यह सभी लोग बड़ी मुश्किल से वापस अपने गांव आए। गांव पहुंचने पर इन्हें 14 दिनों के लिए स्थानीय स्कूलों में क्वारंटाइन किया गया है। भंडरा महाराष्ट्र से लौटे चंद राम बघेल (36) ने बताया कि वह पिछले 6 महीने से भंडारा शहर में कुली कबाड़ी का काम करता हूं। लॉक डाउन की वजह से हमें बहुत परेशानी से जूझना पड़ा। मैं अपने गांव को बहुत याद कर रहा था। अब मैं वापस कभी नही जाऊंगा। यहीं रहकर मजदूरी का काम कर आगे का जीवन व्यतीत करूंगा।
स्वास्थ्य की भी सतत निगरानी
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इन सभी मजदूरों की स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रहे हैं, ताकि अगर इन मजदूरोंको भी सामान्य तकलीफ हो ते उनकी मदद की जा सके।
अन्नपूर्णा रथ से प्राप्त राशन से मिल रही है मदद
जिला वासियों के सहयोग से सभी जनपदों में अन्नपूर्णा रथ आन काल डोनेशन वेन चलाया जा रहा है। इसमें जिलावासियों द्वारा बड़ी मात्रा में सूखा राशन दान किया जा रहा है। इनसे प्राप्त राशन को ही निर्धारित मात्रा में पैकेट बनाकर जनपदों के माध्यम से इन क्वारंटाइन सेंटर तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे इन श्रमिकों को भोजन मिल पा रहा है।

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