बीएससी नर्सिंग की अंतिम चरण में खाली रह गईं 472 सीट में से 74 ही भर पाईं

प्रदेश में पहली बार रेकॉर्ड काउंसिलिंग-

- 31 दिसंबर की रात 12 बजे तक दाखिले की प्रक्रिया, सीटें भरने के लिए संचालकों ने झोंकी ताकत

By: Prashant Gupta

Published: 03 Jan 2020, 12:22 PM IST

रायपुर. प्रदेश के किसी भी मेडिकल पाठ्यक्रम में कभी भी आठ चरणों में काउंसिलिंग नहीं करवाई गई थी। मगर, बीएससी नर्सिंग की सीटों को भरने की जद्दोजहद में इस साल यह रेकॉर्ड बन गया। 4040 सीटों को भरने के लिए 31 दिसंबर की रात १२ बजे तक प्रवेश प्रक्रिया चलती रही। बावजूद इसके 398 सीट लैप्स (खाली) हो गईं।

स्पष्ट है कि अब अभ्यर्थियों का रूझान नर्सिंग पाठ्यक्रमों में नहीं रह गया है।इस साल बीएससी नर्सिंग के 30 कॉलेजों को जीरो ईयर कर दिया गया तो, इनमें से चार उच्चतम न्यायालय चले गए। न्यायालय के आदेश पर इन सबका पक्ष सुनते हुए,पुन: निरीक्षण करवाया गया और 17 कॉलेजों को 26 नवंबर को संबद्धता दे दी गई। यहीं से कॉलेजों संचालकों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया, क्योंकि बड़ी संख्या में सीटें लैप्स होने का खतरा मंडराने लगा था।

इंडियन नर्सिंग काउंसिल को पत्र लिखकर तीन-तीन बार काउंसिलिंग का तारीख आगे बढ़ाई गईं। व्यापमं द्वारा ली गई प्रवेश परीक्षा के पात्र अभ्यर्थी जब दाखिला लेने के इच्छुक नहीं दिखे तो, 12वीं के आधार पर काउंसिलिंग करवाने के लिए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और गृहमंत्री तक कॉलेज संचालकों ने दौड़ लगाकर मांग मनवा ली। संचालनालय के प्रवक्ता एवं काउंसिलिंग कमेटी के सदस्य डॉ. जीतेंद्र तिवारी का कहना है कि अगले साल पूरी कोशिश होगी कि चार चरणों से ज्यादा काउंसिलिंग प्रक्रिया न हो।

12वीं के आधार पर प्रवेश भी नहीं आया काम- 12वीं के आधार पर हुई सातवें चरण की काउंसिलिंग में भी 472 सीट खाली रह गईं। कॉलेजों को अनावंटित अभ्यर्थियों से सीटें भरने को कह दिया गया। 31 दिसंबर तक संचालकों ने खूब हाथ-पैर मारे कि जैसे-तैसे सीटें भर जाएं, मगर अंत में 398 सीट का नुकसान तो उठना ही पड़ा।

Prashant Gupta Bureau Incharge
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