बच्चों को धैर्यवान बनाएं

असफलता से ना घबराएं

By: Gulal Verma

Published: 25 Apr 2018, 06:32 PM IST

दो दिन में दो घटनाएं ऐसी सामने आई हैं जो आपको अपने बच्चों के लिए बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देंगी। परीक्षा की घड़ी है, परिणाम का इंतजार है। सभी को लगता है सफलता जरूरी है पर असफल होने से सब खत्म तो नहीं हो जाता।
एक परीक्षा से पूरी जिन्दगी का फैसला तो नहीं होता। यह सोचना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि देश में हर एक घंटे में एक विद्यार्थी आत्महत्या जैसा कदम उठा रहा है। प्रदेश में सबसे ताजा मामले में एक बच्चे ने महज 9वीं कक्षा की परीक्षा में असफल होने पर जिन्दगी खत्म कर ली। ऐसा ही दूसरा मामला भिलाई का है, जहां देर रात घर लौटने वाली बच्ची अपने पिता की डांट को नहीं सह पाई। उसने एक पल भी नहीं सोचा कि जिनकी डांट उसे अच्छी नहीं लगी उन माता-पिता ने आपको सुलाने के लिए कितनी ही रातें जागकर बिताई हैं।
बच्चों की जिंदगी का ऐसा अंत नहीं होगा, अगर बच्चे को सफलता का पाठ पढ़ाते समय उसे हार के लिए भी तैयार किया जाता। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे की हार को भी उसी तरह सहजभाव से लें जैसे कि उसकी जीत को लेते हैं। मानते हैं कि सफलता खुशी देती है पर केवल सफलता से खुश होना नहीं सीखना चाहिए, क्योंकि यह हमें कमजोर बना देती है। हार को नया अवसर माने और उसे जीत में बदलने के लिए नई शुरुआत करें।
जीत की तैयारी कराने वाले माता-पिता के लिए यह समय बच्चों का हौसला बढ़ाने का है। बच्चों को अंधी दौड़ का घोड़ा न बनाएं, बल्कि उनके प्रेरणास्रोत बनें। सफलता के किस्से सुनाएं, लेकिन उनको पूरा करने का दबाव न बनाएं। बच्चों को पर्याप्त समय दें न कि सिर्फ सुविधाएं। यहां माता-पिता को सोचना जरूरी है कि क्या आपने अपने बच्चे को धैर्यवान बनाया है? आपके और बच्चों के बीच का रिश्ता कैसा है, दोनों एक-दूसरे पर कितना भरोसा करते हैं? क्या आप आदर्श बन पाए हैं? क्या आपने बच्चे के मन को टटोला है। आज की तेज रफ्तार जीवनशौली में यह जरूरी है बच्चों को धैर्यवान बनाएं, संस्कार और जीवन मूल्यों के बारे में बताएं।

Gulal Verma Desk
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