scriptbadminton news of chhattisgarh | पिता के संघर्ष ने बेटे को बनाया अंतरराष्ट्रीय शटलर, जानिए रायपुर के शटलर ईशान भटनागर ने कैसे तय किया चैंपियन बनने का सफर | Patrika News

पिता के संघर्ष ने बेटे को बनाया अंतरराष्ट्रीय शटलर, जानिए रायपुर के शटलर ईशान भटनागर ने कैसे तय किया चैंपियन बनने का सफर

सैय्यद मोदी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप में शनिवार को मिश्रित युगल खिताब जीतने वाले रायपुर के ईशान भटनागर को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए उसके पिता अजय भटनागर को काफी संघर्ष करना पड़ा।

रायपुर

Published: January 24, 2022 01:33:22 am

सैयद मोदी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप में मिश्रित युगल में स्वर्ण पदक जीतकर रायपुर के ईशान भटनागर ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

रायपुर. सैय्यद मोदी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप में शनिवार को मिश्रित युगल खिताब जीतने वाले रायपुर के ईशान भटनागर को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए उसके पिता अजय भटनागर को काफी संघर्ष करना पड़ा। ईशान को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भेजने उसके पिता ने बैंक से 10 लाख का कर्ज लिया। दूसरे देशों में बड़े-बड़े खिलाडिय़ों के खिलाफ खेलने के कारण ही ईशान के खेल में लगातार निखार आता रहा, जिससे वह अंडर-19 खिलाड़ी होने के बावजूद सीनियर स्तर के टूर्नामेंटों में पदक जीत रहा है। ईशान के पिता ने बताया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए खिलाड़ी के बैंक खाते में 3 लाख रुपए हर समय होना अनिवार्य है।
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प्रैक्टिस के लिए सुबह 5.30 से भागमभाग

प्राइवेट बिजनेस के जुड़े उसके पिता को ईशान की शुरुआती प्रैक्टिस के लिए दिन में तीन बार मैदान की दौड़ लगाना पड़ता था। 7 साल की उम्र में ईशान की सुबह 5.30 बजे से ही प्रैक्टिस शुरू हो जाती थी। रायपुर केे सप्रे शाला बैडमिंटन हॉल में प्रशिक्षक कविता दीक्षित और पवन मलिक उसे खेल की शुरुआती बारीकियां सिखाई। पिता अजय भटनागर को अपना काम छोड़कर पहले सुबह 5.30 बजे, फिर 10 बजे और शाम को 2-2 घंटे अभ्यास के लिए प्रतिदिन मैदान लाना पड़ता था।
सरकार से नहीं मिल सपोर्ट
ईशान भटनागर के पिता कई बार सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई, जिससे उसके अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में आने-जाने का खर्च में कुछ मदद मिल सके। लेकिन कई बार आवेदन के बाद भी सरकार की ओर से ध्यान नहीं दिया गया और उन्हें कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
2014 से गोपीचंद अकादमी में ले रहे प्रशिक्षण
आर्थिक परेशानियों के बावजूद उसके पिता ने उसे उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के लिए वर्ष 2014 में ईशान को गोपीचंद अकादमी भेजा, जहां उसके खेल प्रतिभा का तराशा गया। पिछले पांच सालों से ईशान मिश्रित युगल में तनिषा के साथ जोड़ी बनाकर खेल रहे हैं और कई पदक जीत चुके।
जूनियर टॉप्स खेलों इंडिया स्कीम में

खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2019 में ईशान ने कांस्य पदक जीता था, जिसके कारण उसका चयन जूनियर टॉप्स खेलो इंडिया स्कीम (ओलंपिक पोडियम स्कीम) में किया गया। इस योजना के तहत उसके प्रशिक्षण का पूरा खर्च सरकार उठाती है। कोरोनाकाल में ईशान की एयर इंडिया की नौकरी भी छूट गई।
2021 में जीते पांच इंटरनेशनल पदक

कोरोनाकाल के बीच ईशान ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा और मिश्रित युगल व युगल में पांच पदक जीतने में सफल रहे, जिसमें मिश्रित युगल में 3 पदक एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक शामिल हैं। वहीं, पुुरुष युगल में एक स्वर्ण व एक रजत पदक जीते हैं। इसके अलावा वर्ष 2018 से 20 तक सीनियर व जूनियर स्तर के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में 24 पदक जीते हैं, जिसमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं।

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