देस-समाज बर अभिसाप ए

बरबाद होवत हे बचपन

By: Gulal Verma

Published: 24 Jul 2018, 07:26 PM IST

देस-समाज बर अभिसाप ए
ल इकामन से कामबुता करवई ह बने बात नोहय। आज हमर देस अउ समाज बर बाल मजदूरी ह अभिसाप बन गे हे। काबर के लइकामन परिवार, समाज अउ देस के भविस्य होथे। नानपन म लइकामन से काम-बुता कराय ले वोकरमन के बौद्धिक विकास रुक जथे। सारीरिक अउ मानसिक पीरा उठाय बर परथे। जउन समे म लइका के उमर देस-दुनिया, समाज ल समझे के, अपन भासा, संस्करीति, कला, सिक्छा ल परखे के रहिथे, वो समे म वोला मजदूरी करे बर मजबूर होय ल परथे।
हमर देस म कतकोन परिवार, समाज हावय जेन ह पढ़ई-लिखई ल सिरिफ अतके समझथे के, लइका ह नांव-पता लिखे भर ले जान डरय, तहां वोला बनी-भूति करे बर ढकेल देथेंं। कतकोन परिवारमन तो नोनी ल जादा पढ़ई-लिखई ल बेकार समझथें। लइकामन से काम-बुता करवई ह कैंसर कस फइलत हे। ऐकर से समाज म नसा अउ दूसर किसम के बुराई घलो बाढ़त हे। लइकामन से काम-बुता करवई ल सख्ती से रोके बर परही। उही म परिवार, समाज अउ देस के हित हे।
बरबाद होवत हे बचपन
ग रीब अउ बेसहारा लइकामन के रोजी-मजदूरी करई ह मजबूरी हे। फेर, वोकरमन चलत इस्कूलमन के घलो बारा हाल हे। बाल सरमिकमन बर खोले कईठिन इस्कूलमन के तो मतलब घलो नइये। अइसन इस्कूलमन म न पढ़ई-लिखई के माहौल हे, न जरूरी सुविधा अउ न समुचित बेवस्था।
कतकोन नान-नान लइकामन ल होटल, ढाबा, दुकानमन म काम करत असानी से देखे जा सकत हे। कतकोन लइकामन ल रेलवे टेसन, बसस्टैंडमन म नसा के हालत म खुलेआम किंजरत घलो देखे जा सकत हे। ऐहा सरकार अउ समाज दूनों बर बड़ चिंता-फिकर अउ सोचे-गुने के बात ए। कतकोन लइकामन नसाखोरी के आदी होगे हें। पुलिस ह ऐमन ल पकड़ के सुधारघर म भेज देथे। दू-चार लइकामन सुधर घलो जथें, फेर जादाझन लइकामन उहां ले आके फेर नसा अउ अपराध करे बर धर लेथें। सरकार ह एक डहर तो लइकामन के सुवास्थ्य, सिक्छा, बढिय़ा जिनगी के खातिर योजना चलाथे, फेर वोकरमन के पुनरवास अउ सुरक्छा जइसे जरूरी बेवस्था बर धियान नइ देवय।

Gulal Verma Desk
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