जर्मनी- ऑस्ट्रेलिया के लोगों को भा रहा केले के रेशे से बना कपड़ा, हाई डिमांड में पर्स,साड़ी और जैकेट

- नवाचार : केला अनुसंधान टीम ने पेटेंट के लिए किया अप्लाई।
- कपड़े की डिमांड कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया तक हो रही है।

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 21 Jul 2021, 12:30 PM IST

जांजगीर-चांपा@आनंद नामदेव . केला के तने से रेशा निकालकर कपड़ा किया जा रहा है। इस तैयार कपड़ से जैकेट, साड़ी, पर्स, शाल बनाए जा रहे हैं। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम बहेराडीह और कोसमंदा के किसानों की जाज्वल्देव कृषि आत्मा समिति बलौदा की केला अनुसंधान टीम ने यह नवाचार किया है। अनुसंधान टीम में 15 लोगों की टीम काम कर रही है जो तीन साल से मेहनत कर रहे हैं। इनके बनाए कपड़ों की मांग ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी तक हो रही है।

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केले के रेशे से तैयार कपड़े बनाकर अनुसंधान टीम कई राज्यों के कृषि मेले में काफी तारीफ भी बटोर चुकी है। यहां तक कि 22 सितंबर 2018 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां आए थे तब अनुसंधान टीम के प्रमुख दीनदयाल यादव और टीम के बाकी सदस्यों के द्वारा उन्हें केले के रेशे से तैयार जैकेट भी भेंट की थी। उनकी कारीगरी को देख प्रधानमंत्री ने तारीफ की थी। इतना ही नहीं केले से तैयार कपड़े से जिले की पहचान देश-विदेश तक पहुंच गई है।

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पेटेंट के लिए कर चुके आवेदन
केला अनुसंधान टीम के प्रमुख दीनदयाल यादव ने बताया कि केले के तने से रेशा निकालकर कपड़ा बनाने का यह अपनी तरह का पहला प्रयोग हैं। इसीलिए इसका पेटेंट कराने उनकी टीम कृषि कल्याण मंत्रालय भारत सरकार दिल्ली में आवेदन कर चुकी है। जिसके बाद वहां से केले से तने से रेश निकालने से लेकर सारी डिटेल्स मांगी गई थी जो हम भेज चुके हैं। मार्च-अप्रैल में वहां से टीम भी आने वाली थी मगर लॉकडाउन लगने से आ नहीं पाई। छग हाथकरघा संघ की प्रमुख सचिव भी यहां आने वाली हैं।

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हाथों से ही रेशे निकालकर बनाया कपड़ा
केले पेड़ के तने से रेशे निकालने की शुरुआत में टीम ने हाथों से किया। मगर नवाचार को देखते हुए कृषि विवि रायपुर द्वारा रेस्पेडर नामक मशीन दी गई जिससे आसानी से अब रेशे निकालकर कपड़े तैयार हो रहे हैं। कपड़े की डिमांड कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया तक हो रही है, क्योंकि वहां के कई नागरिक बहेराडीह गांव के किसानों से कई सालों से संपर्क में हैं और कई बार यहां गांव आ भी चुके हैं। टीम अब बड़े स्तर पर इसकी कार्ययोजना बना रही है।

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इस तरह बनता है कपड़ा
केले के पेड़ के तने से सबसे पहले पत्ते को अलग करते हैं। ऊपरी सतह को ग्लास की धार से खुरच-खुरचकर अलग कर देते हैं। गूदा अलग होने के बाद जो ऊपरी हिस्सा बचता है उसी से फिर रेशा निकालते हैं। फिर एक साथ दो से तीन रेशे को मिलाकर मटकी के सहारे खूब जोर लगाकर आपस में लपटेते (बरते) हैं जिससे मजबूत धागा तैयार होता है जिससे फिर कपड़ा बुनते हैं।

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Bhupesh Tripathi
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