लापरवाही का खमियाजा

Gulal Verma

Publish: Jul, 13 2018 07:30:05 PM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
लापरवाही का खमियाजा

न नाले-नालियों की व्यापक साफ-सफाई की गई है और न ही पानी निकासी के पुख्ता इंतजाम किए गए

थोड़ी सी ही बारिश में ही प्रदेश की राजधानी रायपुर की सड़कों का जलमग्न होना, घरों व थाने में पानी घुसना बेहद चिंताजनक व शर्मनाक है। मानसून का प्रवेश हो गया है, लेकिन रायपुर नगर निगम कुंभकर्णी नींद में है। न नाले-नालियों की व्यापक साफ-सफाई की गई है और न ही पानी निकासी के पुख्ता इंतजाम किए गए। बारिश के दौर में यह लापरवाही लोगों की जान-माल पर भारी पड़ सकती है। मानसून पूर्व पानी निकासी के लिए लाखों रुपए खर्च कर नाले बनाए जाते हैं, नालियों की सफाई के दावे किए जाते हैं। अवैध कब्जे हटाए जाते हैं, बस्तियां उजाड़ी जाती हैं, मकान-दुकान-प्रतिष्ठान तोड़े जाते हैं। लेकिन नतीजा टांय-टांय फिस्स!बारिश में घरों, सड़कों और बस्तियों में घुटनों तक पानी भरने से निजात नहीं मिलती। आखिर राजधानी की जनता कितने वर्षों तक बारिश में मुसीबत उठाती रहेगी और नगर निगम सिर्फ दावा करता रहेगा। राजधानीवासी क्या 'भगवान भरोसेÓ हैं? क्या राजधानीवासियों को बारिश में बेफिक्र रहने का हक नहीं है? क्या शहर में निवास करना गुनाह हो गया है? पानी निकासी की व्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोगों को अपनी भूमिका का एहसास कब होगा?
रायपुर सहित प्रदेश के शहरों में जल भराव की समस्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। मास्टर प्लान में मैदान व जलाशय के लिए जगह नहीं छोड़ रहे हैं। तालाबों को पाटकर कॉलोनियां बना दी गईं, तो जाहिर है जो जगह पानी के लिए थी, बारिश में वो जगह फिर पानी के कब्जे में आ जाती है। यह समस्या हर वर्ष होती है, बावजूद इसके स्थायी समाधान नहीं करते। शासन-प्रशासन की सोच शायद यही है कि यह तो मौसमी समस्या है। मौसम बदलते ही समस्या भी ठीक हो जाएगी। 365 दिन में महज 15-20 दिन की समस्या मान लेते हैं। इतना ही नहीं, वे जलस्रोतों की उपेक्षा व अनदेखी करते हैं। प्राचीन काल में रतनपुर रियासत का हिस्सा रहे रायपुर में कभी 300 तालाब थे। वर्तमान में गिनती के ही तालाब बचे हैं, उनमें भी कई तालाबों का अस्तित्व खतरे में है। निचले इलाके के लोग भी इसे गंभीरता से नहीं लेते। कुछ दिनों बाद पानी निकलने पर ऐसे भूल जाते हैं, जैसे की कुछ हुआ ही न हो!
विडंबना है कि सिवरेज सिस्टम भी नहीं के बराबर है। शहर में सिवरेज सिस्टम व्यवस्थित होता तो पानी के निकलने की गुंजाइश होती। रायपुर में कई इलाके ऐसे हैं जहां बारिश का पानी भरना निश्चित है। बहरहाल, जहां पानी की निकासी की व्यवस्था हो सकती है, वहां गंभीरता से त्वरित व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार व नगर निगम को पानी निकासी की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। तभी जनसुविधा, जनसुरक्षा व आपदा प्रबंधन के काम होंगे। वर्ना, हर बारिश में लोग ऐसे ही मुसीबत झेलते रहेंगे।

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