गेम चेंजर साबित होंगे बस्तर फाइटर्स

नक्सल उन्मूलन अभियान के लिए पुलिस के प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी

बस्तर पुलिस की तैयारी शुरू : पीएचक्यू से निर्देश मिलते ही शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया

-फाइटर्स के रूप में स्थानीय आदिवासियों की होगी भर्ती

-अब माओवादियों को मिलेगा उन्हीं की भाषा में जवाब

By: ramendra singh

Updated: 22 Feb 2021, 12:17 AM IST

रायपुर . नक्सलियों से निपटने डीआरजी की तर्ज पर बस्तर में नया बल गठित किया जाएग, जिसे बस्तर फाइटर्स का नाम दिया गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने पुलिस के इस प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है। हांलाकि अभी अधिसूचना जारी नही की गई है। सूत्रों के मुताबिक विधानसभा के बजट सत्र में सरकार इसकी घोषणा कर सकती है। बस्तर पुलिस ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा है कि बस्तर फाइटर्स में स्थानीय नक्सल प्रभावित उन युवाओं की भर्ती की जाएगी,जो सम्बंधित जिलों के हों, उन्हें लोकल भाषा बोली का ज्ञान हो, यह भी डीआरजी जवानों के तर्ज पर सीधे एसपी के आधीन कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि जिलों में इनकी संख्या, भर्ती नियम और शर्तें अभी तय नही हुई है। जैसे ही पीएचक्यू से निर्देश मिलेंगे वैसे ही जिलों में इनकी भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाएगी।

गुरिल्ला वार से निपटने मिलेगा कड़ा प्रशिक्षण
बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सली गुरिल्ला रणनीति के आधार पर सुरक्षा बलाूे से मोर्चा लेते हंै। इससे अब तक सुरक्षाबलों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। जबसे कोया कमांडो व डीआरजी के जवान प्रशिक्षित होकर नक्सलियों से सीधा मोर्चा संभालने लगे हैं तबसे नक्सली बैकफुट पर हैं। डीआरजी में स्थानीय जवानों की भर्ती हुई है। उन्हें मिजोरम स्थित वारंटगे व कांकेर जंगलवार प्रशिक्षण केंद्र में कड़ा प्रशिक्षण मिला है। बस्तर फाइटर्स को भी भर्ती के पश्चात इन्हीं केंद्रों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। साथ ही हैदराबाद स्थित ग्रे हाउंड्स प्रशिक्षण केंद्र में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे नक्सलियों को उन्हीं के तर्ज पर जवाब दे सकें।

स्थानीय भाषा और बोली का ज्ञान जरूरी
बस्तर फाइटर्स के लिए जिला स्तर पर जवानों की भर्ती होगी। इसके लिए शारीरिक मापदंड में कुछ शिथिलता के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि सरकार ने मंजूरी दी तो स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिलेगा। साथ ही जिन उम्मीदवारों की भर्ती की जाएगी उन्हें स्थानीय भाषा-बोली का ज्ञान होना अनिवार्य किया जाएगा। आमतौर पर अंदरुनी इलाकों में जवानों को स्थानीय भाषा- बोली की दिक्कत आती है। इसके कारण दुभाषिया की मदद लेनी पड़ती है।

अर्धसैनिक बलों में भी स्थानीय जवानों की हो रही भर्ती
बस्तर की विपरीत भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों के चलते यहां तैनात सीआरपीएफ, कोबरा, आईटीबीपी, एसएसबी व बीएसएफ जवानों को भी गश्त के दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिसके चलते सीआरपीएफ ने बस्तर बटालियन का गठन किया है। इसमें बस्तर के ही लोगों की भर्ती की गई है। उन्हें जंगलवार का प्रशिक्षण देकर विभिन्न कंपनियों में भी तैनात किया गया है। इसके अलावा गाइड के रूप में भी उनकी सेवाएं ली जा रही हैं।

कोबरा बटालियन में महिला कमांडो की तैनाती

बस्तर में नक्सलियों से मोर्चा ले रही सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन में महिला कमांडो की तैनाती की जा रही है। इसके लिए बस्तर के प्रभावित इलाकों से स्थानीय आदिवासी युवतियों की भर्ती भी की गई है। सूत्रों के मुताबिक बस्तर महिला प्रधान क्षेत्र होने की वजह से यहां की महिलाएं काफी मेहनतकश हैं। साथ ही स्थानीय होने की वजह से भाषा- बोली का ज्ञान भी उन्हें है। नक्सली पूर्व में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर आदिवासी महिलाओं से ज्यादती करने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अब महिला कमांडों की तैनाती के बाद इस प्रकार की शिकायतों में भी रोक लगेगी।

सुरक्षाबलों को मिलेंगे जांबाज लड़ाके
बस्तर फाइटर्स फोर्स का गठन नक्सल उन्मूलन अभियान में गेम चेंजर साबित हो सकता है। इससे स्थानीय लोगों को जहां रोजगार मिलेगा वहीं सुरक्षाबलों को जांबाज लड़ाके मिलेंगे। इससे प्रभावित इलाकों में लोगों का नक्सलियों से मोह भी भंग होगा। आने वाले समय में इसके बेहतर परिणाम दिखाई देंगे।

सुंरदराज पी, आईजी बस्तर रेंज

ramendra singh Desk
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