राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पहले, कब और किस लिए बस्तर आए थे ये राष्ट्रपति

छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर से 300 किलोमीटर दूर बस्तर आने वाले रामनाथ कोविंद चौथे और दंतेवाड़ा आने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे।

रायपुर. छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर से 300 किलोमीटर दूर बस्तर आने वाले रामनाथ कोविंद चौथे और दंतेवाड़ा आने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे। वे 25 व 26 जुलाई को दो दिवसीय प्रवास पर बस्तर आ रहे हैं। बस्तर आने वाले पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। इनके बाद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम व पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने राष्ट्रपति के रूप में बस्तर का दौरा किया था। कब और किस लिए थे ये राष्ट्रपति

बालक छात्रावास का लोकार्पण करने आए थे डॉ. राजेंद्र प्रसाद
आजादी के बाद देश के शीर्ष पद पर रहते बस्तर का दौरा करने वाले नेताओं में प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद पहले व्यक्ति थे। 23 मार्च 1953 को बस्तर आए पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जगदलपुर जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित ग्राम बस्तर में नेहरू बालक छात्रावास भवन का लोकार्पण किया था। हाईस्कूल मैदान में सभा ली थी। उनके साथ मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ला, आदिम जाति कल्याण विभाग मंत्री राजा नरेश चंद्र भी थे। सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के हिंदी में दिए गए भाषण का बस्तर में कांग्रेस के सीनियर नेता रहे पंडित सूर्यपाल तिवारी ने स्थानीय बोली हल्बी में अनुवाद किया था।

 

apj abdul kalam in bastar

मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम
मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम डीआरडीओ अध्यक्ष के रूप में बस्तर कई बार आए। बस्तर में रक्षा अनुसंधान एवं रिसर्च सेंटर की स्थापना का श्रेय भी उन्हीं को है। लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद चार जून 2004 को वे बस्तर आए थे। यहां तोकापाल ब्लाक के ग्राम रानसरगीपाल में उन्होंने जनसभा को संबोधित किया था। युवा शक्ति, देश की तरक्की पर फोकस उनके अंग्रेजी में दिए भाषण का हिंदी में अनुवाद इकबाल ने किया था। उन्होंने बस्तर और बस्तरिया संस्कृति की जमकर तारीफ की थी। उस सभास्थल को अब रानसरगीपाल के लोग राष्ट्रपति पारा कहते हैं।

pratibha patil in bastar

चित्रकोट जलप्रपात की खूबसूरती देखा था पहली बार राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने
राष्ट्रपति के रूप में बस्तर आने वाली प्रतिभा पाटिल तीसरी शख्सियत थीं। वे अपने पति के साथ यहां आई थीं। 29 सितंबर 2008 को उनके बस्तर प्रवास के समय हालांकि चित्रकोट जलप्रपात उफान पर नहीं था, फिर भी देश के सबसे चौड़े इस जलप्रपात और इसके आसपास के प्राकृतिक नजारे से प्रतिभा पाटिल इतनी प्रभावित हुईं कि काफी देर तक वह मंत्रमुग्ध होकर निहारती रही थीं।

 

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चंदू निर्मलकर Desk
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