रेत घाटों के ठेके से पहले सरकार को जितनी आय छह माह में होती थी, उतनी दो साल में भी नहीं हुई

नई रेत नीति का फायदा विभाग को नहीं मिला, जब पंचायतें चलाती थीं रेत घाट तब मिला ज्यादा राजस्व, निजी हाथों में देने से घटा

By: Nikesh Kumar Dewangan

Published: 17 Mar 2021, 07:23 PM IST

जितेंद्र दहिया @ रायपुर. रेत घाटों को ठेका में देने का सरकार को फायदा होता नहीं दिख रहा है। दो वर्ष के लिए की गई निविदा से मिले राजस्व से खनिज विभाग को करोड़ों का नुकसान हुआ है। जितनी आय रेत घाटों से पांच से छह माह में होती थी उतनी दो साल में भी नहीं हो पाई है।

प्रदेश सरकार ने 2019 नवंबर में रेत घाटों की नीलामी की थी। सरकार को उम्मीद थी कि रेत घाटों का पंचायत से लेकर ठेकों में देने से फायदा होगा, लेकिन बीते वर्षों के आंकड़ों को देखें तो सिर्फ रायपुर जिले में सरकार को आधा से अधिक राजस्व का नुकसान हुआ है। रेत घाटों में तकरीबन दो साल के समय में फरवरी माह तक 97 लाख 58 हजार 600 रुपए प्राप्त हुए। जबकि 2019-20 में ही अप्रैल से अक्टूबर तक महज सात माह में रायपुर जिले में रेत घाटों से सरकार को 2 करोड़ 39 लाख का राजस्व मिला था। वर्ष 2018-19 की बता करें तो रायपुर खनिज विभाग को 1 करोड़ 59 लाख 50 हजार रॉयल्टी से प्राप्त हुए थे। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि बीते दो वर्षों में विभाग को निजी ठेकेदार फायदा कमा कर नहीं दे पाए।

जमकर हुआ अवैध खनन

पत्रिका ने लगातार साक्ष्य के साथ बताया कि जिले की रेत घाटों में दिन रात अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है। जिसमें बिना रॉयल्टी के ही रेत बेची जा रही है। इसका असर सीधे विभाग की आय पर पड़ा है।

दोगुनी कीमत पर हो रही लोडिंग

शहरों में रेत के रेट पर मनमानी कमाई की जा रही है। रेत का जो ट्रक (हाईवा) किसी भी स्थिति में 5 हजार रुपए से अधिक में नहीं मिलना चाहिए, 11-12 हजार रुपए में लोग खरीद रहे हैं। दो साल पहले जिले में 9 रेत घाट सरकारी तौर पर नीलाम किए गए थे। टेंडर के बाद प्रशासन ने दावा किया था कि अब रेत का रेट कम हो जाएगा। रॉयल्टी शुल्क मिलाकर रेत घाट वालों को एक हाइवा लोडिंग का 1680 रुपए लेना है। लेकिन रेत घाट पर बिना पिट पास के 2500 और पिट पास के साथ 3500 रुपए में खुलेआम लोडिंग चल रही है।

24 घंटे चल रहे रेत घाट

24 घंटे रेत की लोडिंग हो रही है। जबकि रेत खदान सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही चालू रखने का नियम है। चूंकि खुला खेल है, इसलिए ट्रांसपोर्टरों की गाडिय़ां भी दिन-रात धड़ल्ले से जा रही हैं। इसके बाद भी सरकार को रेत घाटों से फायदा नहीं मिला।

पंचायत से प्राप्त आय की जानकारी

2014-15 1 करोड़ 90 लाख 89 हजार 192
2015-16 62 लाख 29820
2016-17 98 लाख 22598
2017-18 73 लाख
2018-19 1 करोड़ 59 लाख 50 हजार
2019-20 2 करोड़ 39 लाख
निविदा के बाद विभाग को आय
2019 नवंबर माह में रेत घाटों का ठेका किया गया
था तब से
2019 नवंबर से फरवरी 2021 तक रेत घाटों से प्राप्त आय 97 लाख 58 हजार 600 रुपए रॉयल्टी से प्राप्त हुए हैं।
( सभी आंकड़े खनिज विभाग से लिए गए)

बिना रॉयल्टी के लोडिंग सस्ती

सभी रेत घाट में एक हाइवा लोडिंग के लिए बिना रॉयल्टी के 2500 और रॉयल्टी पर्ची के साथ 3500 रुपए देने ही पड़ रहे हैं। रेत घाटों में ही लोडिंग चार्ज ज्यादा वसूल करने से सप्लायर को अवैध लोडिंग व ट्रांसपोर्टेशन के बाद सप्लायरों को कीमत महंगी पड़ रहा है।

दो साल में नहीं लगे कैमरे

ठेका शर्तों के मुताबिक रेत घाटों में सभी ठेकेदारों को कैमरे और जीपीएस लगाना था, लेकिन अब तक किसी भी रेत घाट में कैमरे नहीं लगाए गए। इस वजह से अवैध खनन का खेल खूब चला।

रेत घाट निविदा की दर अवैध लोडिंग रॉयल्दी के साथ

हरदीडीह 1680 2300 3500
कुरुद आरंग 1680 2500 3500
कुम्हारी 1280 2500 3500
गौरभाट 1680 2500 3500
पारागांव 1680 2500 3500
लाखना 1680 2300 3500
कोलयारी 1680 2300 3500
पारागांव 1680 2300 3500
कागदेही 1680 2300 3500

क्या बीते दो सालों में रेत घाटों में खनन कम हुआ?

  • बीते वर्षों की अपेक्षा राजधानी व आस-पास के जिलों में निर्माण कार्य कम हुआ?
  • क्या रेत घाटों की निगरानी में लापरवाही हुई?
  • सीमांकन बिना रॉयल्टी कैसे जारी हुई?
  • रेत घाट कम होने का असर।

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने बताया कि अवैध उत्खनन को प्रोत्साहित करने टेंडर की प्रक्रिया की गई है। पूरे प्रदेश में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। अधिकारी की हिम्मत नहीं है कि घाट पर जाकर कार्रवाई करे।

बीजेपी विधायक शिवरतन शर्मा ने बताया कि प्रदेश में रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। लोगों के पास महंगा रेत खरीदने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है।

रायपुर कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन ने बताया कि नवंबर 2019 में निविदा हुई थी, अभी 9 माह शेष हैं। निर्माण कार्य कोरोना के कारण प्रभावित हुए हैं। इसकी वजह से रेत की मांग भी कम होने की बात सामने आई है। इस वजह से आय प्रभावित हुई है।

Nikesh Kumar Dewangan Desk
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