भगवान जगन्नाथ के रथयातरा

भगवान जगन्नाथ के रथयातरा

Gulal Verma | Publish: Jul, 13 2018 07:22:03 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

संस्करीति

हमर भारत देस के ओडिसा राज के पुरी म जगन्नाथजी के मंदिर ह दुनियाभर म परसिद्ध हे। ये मंदिर हिंदू धरम के चारों धाम के तीरथ म एक हे। हिंदू धरम म कहे जाथे के मरे के पहिली चारों धाम के यातरा करे बर चाही। जेकर से मोछ मिलथे।
पुरी के रथयातरा ह हिंदूमन के परसिद्ध तिहार म एक हे। इहां भगवान बिसनु के अवतार सिरी किसन के मंदिर हे। जेहा बहुत बिसाल अउ कई सौ बछर जुन्ना मंदिर हे। ये मंदिर ल देखे अउ भगवान जगन्नाथ के दरसन बर बछरभर लाखों भगतमन इहां आथें। पुरी ह भगतमन के आस्था के जगा हे। रथयातरा पुरी के संगे-संग देसभर म निकाले जाथे। छत्तीसगढ़ राज म घलो भगवान जगन्नाथजी के रथयातरा निकाले के परंपरा हाबय। जांजगीर चांपा जिला के अकलतरा ब्लाक के नरियरा गांव म बिसाल भगवान जगन्नाथ के रथयातरा निकाले जाथे। लइकामन घलो बड़ उछाह से भगवान जगन्नाथजी के रथयातरा निकालथें।
रथयातरा म सबसे पहिली ताल ध्वज रथ म सिरी बलरामजी, वोकर पीछू पद्म ध्वज रथ म बहिनी सुभदराा, अउ वोकर पीछू आखिरी म गरुन ध्वज रथ या नंदीघोस नांव के रथ म भगवान जगन्नाथ सबले पाछू चलथे। कहे जाथे के रथयातरा म सहयोग करे म मोछ मिलथे। तेकरे बर भगतमन ये तीनों रथ के रस्सा ल खींचे बर उमड़ परथें।
भगवान जगन्नाथजी के रथयातरा ह बछर असाड़ सुक्ल पछ के दूतीया के निकाले जाथे। छत्तीसगढ़ म रथयातरा के दिन ल रजुतिया के नांव ले जानथंन। हिंदू संस्करीति म चारठन स्वयंसिद्ध लगन होथे। जेमा बिहाव बर कोनो लगन देखे के जरूरत नइ परय। रथयातरा ह चारों दिन म ले एक हाबय। ये तिहार ह आपसी भाईचारा के संदेस देथे।
रथयातरा के सांस्करीतिक अउ पउरानिक दूनों के महत्तम हे। ये तिहार ल सबोमन भाईचारा, एकता, सद्भाव, उछाह, परेम-बेवहार, सरद्धा-भगती के रूप म देखथें। सरधा अउ भकती से पुरी मंदिर म सब लोगन म बइठ के एक संग भगवान जगन्नाथजी के महापरसाद ल खाथें। जेकर से 'वसुधैव कुटुम्बकमÓ के महत्तम ह दिखई देथे।
रथयातरा निकाले के पीछू कतकोन किसम के जानकारी मिलथे। कहे जाथे के भगवान किरिस्न के बहिनी सुभदरा ह अपन मइके आथे त अपन भइया किरिस्न अउ बलदाऊ ल अपन गांव घुमे जाय के अपन इच्छा ल परगट करथे। तब दूनों भइया बहिनी के संग रथ म सवार हो के गांव घुमे बर चल देथे। तब ले ये रथयातरा के परंपरा ह चले आवत हे।
अइसे घलो कहे जाथे के गुंडीचा मंदिर के देबी दाई ह किसन भगवान के मौसी आय। जेन ह भगवान किसन, बलराम अउ सुभदरा ल अपन घर आय के न्यौता देथे। त भगवान जगन्नाथ याने सिरी किसनजी अपन बड़े भाई बलदाऊ अउ बहिनी सुभदरा के संग अपन मौसी के घर 10 दिन बर रहे ल जाथे। भगवान जगन्नाथजी के रथयातरा भगवान के मौसी के घर पहुंचे के बाद पूरा होथे याने के यह रथयातरा महोत्सव पूरा दस दिन तक चलथे।

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