छोटे भूखंड मालिकों को बड़ी राहत, 5 डिसमिल से कम भूखंडों की खरीदी-बिक्री से रोक हटी

पांच डिसमिल यानि 2178 वर्ग फीट से छोटे प्लाटों की रजिस्ट्री और नामांतरण पर लगी रोक को राजस्व विभाग ने हटा लिया है।

By: Ashish Gupta

Published: 30 Dec 2018, 03:30 PM IST

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर छोटे भूखण्ड धारकों को जमीन की खरीदी-बिक्री के पंजीयन में बड़ी राहत मिली है। बघेल ने छोटे भूखण्डधारकों को रजिस्ट्री में आ रही दिक्कतों को देखते हुए राजस्व विभाग को इसका तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए गए थे।

निर्देश के बाद राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में जारी आदेशों को स्थगित करते हुए नया आदेश जारी किया गया है। इसके तहत पांच डिसमिल से कम रकबे की खरीदी-बिक्री पर से रोक हटा दी गई है। अब पांच डिसमिल से कम रकबे की भूमि का अब नामांतरण और पंजीयन आसान होगा। जन घोषणा पत्र में भी मुख्यमंत्री ने इस समस्या के निराकरण का वादा किया गया था।

चार साल से थी रजिस्ट्री पर पाबंदी
पांच डिसमिल यानि 2178 वर्ग फीट से छोटे प्लाटों की रजिस्ट्री और नामांतरण पर लगी रोक को राजस्व विभाग ने हटा लिया है। शासन ने 2014 में राजधानी समेत पूरे प्रदेश में 5 डिसमिल (2178 वर्गफीट) से छोटे प्लाटों के नामांतरण पर रोक लगा दी थी। बाद में रजिस्ट्री पर भी पाबंदी लगा दी गई। अहम बात यह है कि आरडीए तथा हाउसिंग बोर्ड द्वारा अनुमोदित ले-आऊट भुंइया सॉफ्टवेयर में अपलोड नहीं किया गया है। ऐसे प्रकरणों में संबंधित संस्थान द्वारा जारी एनओसी के आधार पर भूखंडों का पंजीयन किया जाएगा।

7000 से ज्यादा प्रकरण लंबित
इस नियम की वजह से आम लोगों की मुसीबत कम नही हुई है। केवल राजधानी में रजिस्ट्री के दस्तावेज लेकर नामांतरण करने पहुंचे 7000 से ज्यादा प्रकरणों को प्रशासनिक अमला लौटा चुका है। प्रदेश में यह संख्या बहुत अधिक होने का अनुमान है। प्रदेश के राजस्व विभाग ने भू-राजस्व संहिता 1969 की धारा 70 के हवाले से नामांतरण पर रोक लगा दिया था। आदेश के मुताबिक 5 डिसमिल (लगभग 2178 वर्ग फीट) से कम कृषि भूमि और 100 वर्ग फीट से कम डायवर्टेड भूमि का नया खसरा नंबर नहीं दिया जा सकेगा।

यह है नया आदेश
- पांच डिसमिल से कम रकबे की खरीदी-बिक्री पर रोक हटी
- राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में जारी 18 आदेशों को किया स्थगित
- रजिस्ट्री के लिए खसरा नम्बर के नक्शा के दर्ज होने की अनिवार्यता को खत्म कर दी गई है। पूर्व में छोटे भूखण्डों का रजिस्ट्री होने और उसका नक्शे में दर्ज किए बिना खसरे में भूमि-स्वामी का नाम दर्ज किया गया है।
- खसरा नम्बरों का बिना विस्तृत सर्वेक्षण और गहन जांच के बिना नक्शे में अंकन संभव नहीं होने के कारण
- यदि कोई भूमि-स्वामी किसी खसरा नंबर की सम्पूर्ण भूमि को बेचना चाहता है। तो रजिस्ट्री के लिए उस खसरा नंबर के नक्शे में अंकन की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।
- खसरा और नक्शा में आबादी भूमि में निवासरत व्यक्तियों के भू-खण्डों का भूमि-स्वामीवार कोई भी भू-अभिलेख तथा नक्शा शासन द्वारा अभी तैयार नहीं कराया गया है।
- भूमि के रूप में अंकित खसरा नम्बर के अंदर यदि किसी व्यक्ति द्वारा विधिपूर्वक कब्जे की भूमि के विक्रय के लिए पंजीयन के लिए भू-अभिलेख एवं नक्शे की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।
- लेआउट के आधार पर किसी भूस्वामी द्वारा किसी भूखंड का विक्रय किया जाता है तो लेआउट को पंजीयन का आवश्यक अंग मानते हुए बिना नक्शा बटांकन के पंजीयन की कार्रवाई की जाए।

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