एक और हेराफेरी, फ्लाईओवर की ट्रैफिक रिपोर्ट पर रखी गई स्काईवॉक की नींव

लोक निर्माण विभाग ने राजधानी की सबसे ट्रैफिक वाली जीई रोड पर लगातार बढ़ते आवाजाही के दबाव को देखते हुए एक नहीं, दो-दो बार सर्वे कराया था

By: Deepak Sahu

Updated: 03 Mar 2019, 05:00 PM IST

रायपुर. लोक निर्माण विभाग ने राजधानी की सबसे ट्रैफिक वाली जीई रोड पर लगातार बढ़ते आवाजाही के दबाव को देखते हुए एक नहीं, दो-दो बार सर्वे कराया था। उस दौरान जिन दो कंसल्टेंसी एजेंसियों को सर्वे का काम सौंपा गया था उन कंपनियों की रिपोर्ट के आंकड़े अलग-अलग सामने आए थे, उसमें हेराफेरी कर विभाग के बड़े इंजीनियरों ने आंकड़े पेश किए, जो हैरान करने वाला है। इसके पीछे का सच यह है कि पीडब्ल्यूडी के बड़े इंजीनियर आखिरी तक शास्त्री चौक में करोड़ों रुपए की लागत से स्काईवॉक निर्माण को सही साबित करने में लगे हुए थे। लेकिन सफल नहीं हो पाए और निर्माण पर रोक लगा दी गई।

लोक निर्माण विभाग के सूत्रों के अनुसार विभाग के आला अफसरों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में जो बैठक हुई,उसमें फ्लाईओवर निर्माण कराने के लिए कराए गए सर्वे का जिक्र तक नहीं किया। शास्त्री चौक में 27 हजार और आंबेडकर चौक के पास 14 हजार लोगों के पैदल चलने की जो रिपोर्ट पेश की है, वह दरअसल गुमराह करने वाली है।

दरअसल पीडब्ल्यूडी के बड़े इंजीनियरों द्वारा स्काईवॉक से पहले शहर की जीई रोड पर पुराने पीएचक्यू से राजकुमार कॉलेज तक तथा शास्त्री चौक से तेलघानी नाका तक फ्लाईओवर निर्माण के लिए 550 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट तैयार कराया जाना था, जिसका सर्वे कराने के लिए क्यूब कंसल्टेंसी नियुक्त किया था, उस कंसल्टेंसी से डिटेल्स प्रोजेक्ट (डीपीआर) भी तैयार कराया गया, उस सर्वे रिपोर्ट में ही शास्त्री चौक में 27 हजार वाहनों के मूवमेंट की तस्वीर सामने आई थी। जिसे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में पैदल चलने वालों के आंकड़े के रूप में पेश कर दिया गया।

 

सर्वे में सामने आया था यह आंकड़ा
यह भी सामने आया कि पीडब्ल्यूडी ब्रिज डिवीजन के तत्कालीन कार्यपालन अभियंता जीएस पंवार और पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत के ओएसडी रहे विभाग के अनुविभागीय अभियंता सीके पांडेय की देखरेख में फ्लाईओवर और स्काईवॉक दोनों प्रोजेक्ट का सर्वे हुआ था। सच्चाई यह है कि वर्ष 2014-15 में मुंबई की क्यूब कंसलटेंसी से जीई रोड पर फ्लाईओवर निर्माण के लिए सर्वे कराया, जिसमें यह सामने आया था कि शास्त्री चौक में 27 हजार वाहनों के ट्रैफिक का मूवमेंट है। ऐसी ही स्थिति जयस्तंभ चौक, शारदा चौक में भी है।

तब यह भी तर्क दिया गया स्काईवॉक बनने से टाटीबंध चौक तरफ से तेलीबांधा तरफ जाने वाले लोग सीधे ब्रिज से निकल जाएंगे और तेलीबांधा तरफ पुराने पीएचक्यू के पास फ्लाईओवर से राजकुमार कॉलेज के पास उतरेंगे। इससे शहर के बीच में ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा। इसके बाद उस प्रोजेक्ट को निरस्त कर दिया गया।

सर्वे में 20 करोड़ रुपए से बनना था स्काईवॉक
शास्त्री चौक होकर फ्लाईओवर का प्रोजेक्ट निरस्त होने के बाद वर्ष 2015-16 में स्काईवॉक बनाने के लिए सर्वे कराया गया। इसका ठेका एसएन भावे कंसल्टेंसी को दिया गया। उस दौरान इस प्रोजेक्ट के लिए विभागीय बजट में 20 करोड़ की लागत भी तय थी। जिसे बाद में बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए की गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस कंसल्टेंसी ने स्काईवॉक का जो सर्वे रिपोर्ट सौँपी थी, उसमें वर्ष 2035 तक पैदल चलने वालों का आंकलन भी किया था।

उसके आधार पर जो रिपोर्ट सौंपी गई उसमें 35 सौ लोगों के पैदल चलने का आंकड़ा सामने आया था। लेकिन इस आंकड़े को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभागीय मंत्री ताम्रध्वज साहू, वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा मौजूद थे, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने दोनों प्रोजेक्ट का सर्वे कराने का कोई जिक्र नहीं किया।

रायपुर ग्रामीण के विधायक सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता ने शास्त्री चौक में 27 हजार पैदल चलने वालों का जो आंकड़ा पेश किया है, वह हैरान करने वाला है। इस आंकड़े पर बैठक में ही सवाल उठाया हूं। फ्लाईओवर और स्काईवॉक के लिए कराए गए अलग-अलग कंसल्टेंसी की सर्वे रिपोर्ट और डीपीआर दोनों प्रस्तुत करने के लिए अफसरों को जल्द ही पत्र लिखूं। अफसरों द्वारा गुमराह करने वाला रवैया पर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पूर्व मंत्री पीडब्ल्यूडी राजेश मूणत ने बताया कि पहले फ्लाईओवर बनाने का प्लान था, कंसल्टेंसी की सर्वे रिपोर्ट में शारदा चौक से लेकर शास्त्री चौक में 27 हजार वाहनों के मूवमेंट का आंकड़ा भी सामने आया था। साथ ही स्टेशन रोड में फ्लाईओवर के लिए जगह का पेंच था। दिक्कत की बात भी थी कि शहर के बीचोबीच फ्लाईओवर का निर्माण के कारण लोगों की परेशानी बढ़ जाती, इसलिए उस प्रोजेक्ट को निरस्त किया गया।

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