रायपुर के इस युवा ने बिगबॉस में बिताए 31 दिन, सलमान-शाहरूख के लिए लिखी स्क्रिप्ट

पत्रिका के ऑफिस पहुंच शेयर की जर्नी

By: Tabir Hussain

Updated: 07 Mar 2020, 01:52 PM IST

ताबीर हुसैन @ रायपुर. कहते हैं कॅरियर उसी फील्ड में बनाओ जिसके लिए आपमें जुनून हो। एेसा ही किया रायपुर के सिद्धार्थ डे ने। लक्ष्मी मित्तल की कंपनी में जॉब करते हुए उन्हें लगा कि वे तो किसी और चीज के लिए बने हैं। इंजीनियर सिद्धार्थ ने एेन प्रमोशन के वक्त मुंबई जाना तय किया। प्रियदर्शनी नगर निवासी आशीष कुमार डे और राका डे के बेटे सिद्धार्थ डे स्क्रीप्ट राइटिंग के सितारा बन चुके हैं। वे सलमान खान और शाहरूख खान के लिए स्क्रिप्ट तो लिखते ही हैं झलक दिखला जा और इंडियन आइडिल लिखकर भी टीआरपी की दुनिया में धमाल मचा दिया। स्क्रीन अवॉर्ड, फेमिना मिस इंडिया, स्टारडम अवॉर्ड, जी सिने अवॉर्ड, फिल्म फेयर अवॉर्ड, आईफा समेत कई शोज लिखे और अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। पेशे से इंजीनियर सिद्धार्थ लक्ष्मी मित्तल कंपनी में जॉब कर रहे थे। उनका प्रमोशन औरंगाबाद हो गया। उसी वक्त उन्हें लगा कि मुझे ये तो करना ही नहीं था क्योंकि मन में तो राइटिंग का जुनून हिलोरे मा रहा था। उन्होंने उसी वक्त तय किया कि मुंबई जाना है। वहां करीब साढ़े तीन साल स्ट्रगल के बाद वह रास्ता मिल गया जहां का सपना वे हमेशा से देखते थे। आज 15 साल हो गए सिद्धार्थ फिल्म इंडस्ट्रीज में जाना-माना नाम हो गए हैं। वे एक फिल्म लिख रहे हैं जिसे सलमान खान प्रोड्यूस्ड कर रहे हैं।

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काम मांगने 43 बार गए प्रोडक्शन हाउस

सिद्धार्थ ने बताया, आपमें लाख टैलेंट हो लेकिन डायरेक्टर आपको हर बार यही कहेगा कि अगले महीने आओ। इसलिए मेरा मानना है कि पूरी तैयारी और विश्वास के साथ मुंबई जाना चाहिए। मैं एक बार नहीं बल्कि 43 बार कोई मेरे दिल से पूछे के प्रोडक्शन हाउस गया। आखिरकर मुझे एक दिन मौका मिल गया जब मैंने खुद को प्रजेंट किया। उन्होंने पूछा कि किस तरह की मूवी देखते हो। मैंने कहा- शोले, डॉन और दीवार तो देखी है लेकिन सत्यजीतरे कई फिल्में 40 बार देखी। वे हैरत में पड़ गए। रे की एक फिल्म के तीन सीन पूछे। मैंने पूरा बता दिया। वे कहने लगे कि हम एक सीन बता रहे हैं उसे दो दिन बाद लिखकर लाना, लेकिन मैंने कहा कि अभी लिखूंगा। मैंने लिखकर दिया और वे प्रभावित हुए। उस फिल्म का एक डायलाग था- शिकार को डराया नहीं तो शिकार का मजा किया... वे कहने लगे कि डेढ़ साल क पैसे नहीं देंगे। मैेंने पहली फुर्सत में हां कहते हुए गॉड को थैंक्स कहा। शाहरूख और सैफ के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड लिखने का काम मिला। उसे मैंने एेसा लिखा कि राइटिंग की दुनिया में पहले एेसा कभी नहीं हुआ था। बस यहीं से मेरे सपनों को पंख लगने लगे। पैरिस में मित्तल फैमिली की 320 करोड़ की शादी थी। वहां शाहरुख खान के लिए स्क्रिप्ट लिखी और तबसे मैं उनके साथ हूं।

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बिगबॉस को किया एंजॉय

अपने राइटिंग कॅरियर में मैंने कभी ब्रेक नहीं लिया था। बिगबॉस में 7 दिन के लिए गया था लेकिन 31 दिन रहा। ये मेरे लिए काफी रोमांचक रहा। बिगबॉस-13 से मुझे आम लोग भी जानने लग गए। बॉलीवुड में तो सभी मेरे काम को जानते थे लेकिन इस रियलिटी शो के जरिए एक अलग पहचान मिली।

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खु़द पर विश्वास होना चािहए

मैं मुंबई ग्लैमर के लिए नहीं गया था। चूंकि मुझे पता था कि यही मुझे करना है। जब आप अपने काम को जॉब के हिसाब से करने लगते हैं तो स्टारडम हावी नहीं होता। खुद पर यकीन होगा तभी आप बेहतर कर पाएंगे। विश्वास जगाने के लिए उसी काम में रमे रहना होगा जो आप कर रहे हैं। मैं रायपुर में हूं लेकिन अभी भी पापा के साथ रात में सत्यकाम मूवी देखी। साहब, बीबी और गुलाम को 28 बार देख चुका हूं। प्यासा 40 बार देखी। शहंशाह ओर चांदनी की तो गिनती ही नहीं। कहने का मतलब खुद में विश्वास तभी आएगा जब आप परफेक्ट हों अपने काम में।

Tabir Hussain Incharge
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