Bird Flu: कोविड की ही तरह बर्ड फ्लू के भी कई रूप, जानें कौन ज्यादा घातक

एवियन इंफ्लुएंजा यानी बर्ड फ्लू एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो अमूमन पक्षियों से पक्षियों में फैलती है। हालांकि, कई बार इंसान और जानवर भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। कोविड-19 की तरह ही बर्ड फ्लू के भी कई रूप हैं। एच5एन1 और एच7एन9 इंफ्लुएंजा वायरस जहां मरीज को मौत की कगार पर ले जा सकते हैं, वहीं एच7एन7 व एच9एन2 ज्यादा गंभीर संक्रमण का सबब नहीं बनते।

By: lalit sahu

Published: 09 Jan 2021, 08:05 PM IST

कौन ज्यादा घातक
एच5एन1 : 1997 में पहली दस्तक, हांगकांग में 18 लोगों को किया संक्रमित, इनमें से छह की जान चली गई।
एच7एन9 : 2013 में चीन में पहला केस सामना आया, कुल 144 चीनियों को चपेट में लिया, 46 की मौत हुई

डराते आंकड़े
60 फीसदी से अधिक पुष्ट मामलों में मरीज को अपनी जान गंवानी पड़ी है
15 भारतीय राज्यों में 2006 से लेकर अब तक 26 बार दिख चुका है प्रकोप

चिंता का सबब
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक फ्लू वायरस खंडित जीनोम की वजह से 'म्यूटेशनÓ यानी उत्परिवर्तन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है। 'म्यूटेशनÓ के जरिये मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने की इसकी क्षमता बढ़ जाती है, जिससे यह महामारी का रूप अख्तियार कर सकता है।

हल्के में न लें
पक्षियों में एवियन इंफ्लुएंजा आमतौर पर आंत में संक्रमण का सबब बनता है, लेकिन इंसानों में यह सीधे श्वास प्रणाली पर हमला करता है
मरीज को निमोनिया और एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम की शिकायत संभव, खांसी-बुखार, गले में खराश, पेटदर्द, उल्टी-दस्त शुरुआती लक्षण

मनुष्य से मनुष्य में प्रसार बेहद कम
बर्ड फ्लू के मनुष्य से मनुष्य में प्रसार के मामले बेहद कम सामने आए हैं। माना जाता है कि आखिरी बार साल 2006 में सुमात्रा (इंडोनेशिया) के एक परिवार के सदस्य एक-दूसरे के संपर्क में रहने के कारण एवियन इंफ्लुएंजा से संक्रमित हो गए थे।

पर सावधानी बरतना जरूरी
बर्ड फ्लू से बचाव के लिए मास्क पहनें, समय-समय पर साबुन से हाथ धोते रहें
अंडे, चिकन या किसी भी अन्य पोल्ट्री उत्पाद को अच्छे से धो-पकाकर ही खाएं
जिन लोगों का घर-दफ्तर पोल्ट्री फार्म/चिडिय़ाघर के पास है, वे सफाई पर खास ध्यान दें
पोल्ट्री उद्योग में काम करने वाले लोगों के लिए पीपीई किट पहनना फायदेमंद रहेगा

ऐसे फैलता है वारयस
मल-मूत्र, लार और छींक में निकलने वाली संक्रमित बूंदों के जरिये पक्षियों से पक्षियों में फैलता है वायरस। इंसानों में मुख्य रूप से संक्रमित मांस या पानी के सेवन से होता है प्रसार। संक्रमित पक्षी, फिर चाहे वो जीवित हो या मृत, के पास जाना भी घातक।

पोल्ट्री उत्पादों से दूरी जरूरी नहीं
एवियन इंफ्लुएंजा वायरस ऊष्मा के प्रति बेहद संवेदनशील है। डब्ल्यूएचओ की मानें तो पोल्ट्री उत्पादों को अच्छे से धोकर 70 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर पूरी तरह से पकाकर खाया जाए तो बर्ड फ्लू का शिकार होने का खतरा न के बराबर रहता है।

lalit sahu Desk
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