राष्ट्रीय शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को नया आयाम देकर क्रांतिकारी व युगानुकूल परिवर्तन लाएगी : भाजपा

- यह महज एक फ़ैसला नहीं, अपितु सदियों से मानसिक गुलामी से आज़ादी दिलाने वाला एक ऐतिहासिक कदम : साय
- यह शिक्षा प्रणाली ज्ञान एवं अनुभव पर आधारित व तकनीकी रूप से समृद्ध शिक्षा मुहैया कराने सहायक सिद्ध होगी : डॉ. रमन
- यह शिक्षा नीति केंद्र सरकार की उपलब्धियों के सूत्र में पिरोया गया हीरा है, जिसकी चमक विश्व अनुभव करेगा : नेताम

By: Bhupesh Tripathi

Published: 31 Jul 2020, 09:03 PM IST

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को घोषित की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 का स्वागत किया है। भाजपा की प्रदेश इकाई ने कहा है कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतवर्ष को समय के साथ क़दमताल करने की ऊर्जा प्रदान करेगी वहीं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की अवधारणा को एक नया आयाम प्रदान कर देश के शैक्षिक जगत में क्रांतिकारी व युगानुकूल परिवर्तन लाने वाली सिद्ध होगी।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकृति प्रदान करना महज एक फ़ैसला नहीं है अपितु यह सदियों से विदेशी मानसिकता की गुलामी से आज़ादी दिलाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। स्वतंत्र भारत की यह तीसरी शिक्षा नीति है किन्तु जहाँ पहले की दोनों शिक्षा नीतियाँ केवल शिक्षा के प्रसार हेतु केवल इसके संख्यात्मक पक्ष पर ही जोर दे रहीं थीं वहीं यह नीति शिक्षा के गुणात्मक पक्ष पर भी जोर दे रही है। इसीलिये एक ओर जहाँ यह नीति स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन के लक्ष्य के साथ आगे बढऩे की बात करती हैं तो दूसरी ओर पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम को विषय केन्द्रित न रखते हुए केवल मूल सिद्धान्तों को सिखाने की दृष्टि से पुन: गढऩे की बात करती है।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि लम्बे समय से एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की प्रतीक्षा की जा रही थी जो ज्ञान एवं अनुभव पर आधारित और तकनीकी रूप से समृद्ध शिक्षा मुहैया कराने के साथ-साथ ऐसी शिक्षा भी उपलब्ध कराए जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में भी सहायक सिद्ध हो। इसी आवश्यकता को देखते हुए नई शिक्षा नीति ने अबतक पाठ्येतर गतिविधयाँ माने जाने वाली विधाओं को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाते हुए शिक्षा के मूल स्वरूप को पाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इसके साथ ही 5+3+3+4 का नया शिक्षाक्रमणीय ढाँचा विद्यार्थियों की मानसिक और शारीरिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायक होगा।

भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संसद सदस्य (राज्यसभा) रामविचार नेताम ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वागत करते हुए कहा कि कहा कि घोषित शिक्षा नीति में उच्चशिक्षा के क्षेत्र में भी कई आमूलचूल परिवर्तन किये गए हैं। बहुल प्रवेश एवं बहुल निकास (मल्टीपल एण्ट्री - मल्टीपल एक्जि़ट) एवं अकादमिक क्रेडिट बैंक की योजना जहाँ उच्चशिक्षा की उपादेयता में वृद्धि करेंगे वहीं बहुविषयक एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यचर्या बेरोजगारी समाप्त करने में महती भूमिका निभाएगी। उच्च शिक्षा आयोग के गठन जैसे प्रावधानों के माध्यम से यह नीति समग्र भारत में उच्चशिक्षा को एकरूप एवं समान गुणवत्ता प्रदान करने का भी प्रयास करती है। यह शिक्षा नीति केंद्र सरकार की उपलब्धियों के सूत्र में पिरोया गया एक और हीरा है, जिसकी चमक में विश्व आने वाले समय में अनुभव करेगा।

Bhupesh Tripathi
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