भाजपा में गुटबाजी हावी: चहेतों को युवा और महिला मोर्चा में लाने BJP में भारी खींचतान

- चहेतों को युवा और महिला मोर्चा में लाने भाजपा में भारी खींचतान, आम सहमति नहीं
- प्रदेश प्रभारी की 3 डेड लाइन समाप्त हो गईं, साय बोले- जल्द करेंगे घोषणा

By: Ashish Gupta

Published: 27 Jan 2021, 12:44 PM IST

रायपुर. प्रदेश भाजपा (BJP Chhattisgarh) के अंदर जमकर चल रही गुटबाजी का ही नतीजा है कि अब तक युवा और महिला मोर्चा की कार्यकारिणी घोषित नहीं हो पाई है, क्योंकि हर एक बड़ा नेता अपनों को इन दो महत्वपूर्ण मोर्चा में पद दिलवाना चाहता है। यही वजह है कि संगठन और पार्टी मिलकर नामों पर सर्वसम्मति नहीं बना पा रहे हैं, और देरी पर देरी होती चली जा रही है।

उधर, प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी द्वारा अध्यक्ष विष्णुदेव साय को मोर्चा की घोषणा करने के लिए दी गई 3 डेड लाइन खत्म हो चुकी हैं। साय कह रहे हैं कि जल्द घोषणा होगी। कब इस सवाल का जवाब नहीं दे पा रहे हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो इससे पहले कभी इतनी देरी नहीं हुई। यह देरी कार्यकर्ताओं में निराशा पैदा कर रही है।

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इतना ही नहीं पिछले दौरे पर आईं प्रदेश प्रभारी से जिला प्रभारियों ने कह दिया था कि जिला स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए युवा और महिला मोर्चा में नियुक्तियां जरूरी हैं। ऐसे में कैसे 1000 दिन में सत्ता वापसी के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। गौरतलब है कि प्रदेश प्रभारी 3, 4 और 5 जनवरी को प्रदेश में थी। यानी 20 दिन से अधिक का समय निकल चुका है।

अपना जिला अध्यक्ष चाहते हैं नेता
सूत्रों की मानें तो पार्टी के बड़े नेता मोर्चा के जिला अध्यक्ष के रूप में अपने समर्थक चाहते हैं। अब एक जिले या विधानसभा क्षेत्र में कई बड़े नेता हैं। ये दबाव बना रहे हैं। जैसा कि जिला अध्यक्षों की घोषणा के वक्त हुआ था। जिला अध्यक्ष, प्रदेश कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री का पद महत्वपूर्ण माना जाता है।

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युवा मोर्चा के लिए 35 साल की आयुसीमा खत्म
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने युवा मोर्चा के लिए 35 वर्ष की आयुसीमा निर्धारित की थी। यही वजह थी कि कई दावेदार दौड़ से बाहर हुए और अमित साहू अध्यक्ष बनाए गए। मगर, अब आयु सीमा की यह शर्त हटा दी गई है। अब प्रदेश और जिला कार्यकारिणी में 35 साल से अधिक आयुवर्ग के युवाओं को शामिल किया जाएगा।

पार्टी के अंदर इस शर्त को हटाने को लेकर विरोध हो रहा है, हालांकि खुलकर कोई नहीं बोल रहा। आयु सीमा इसलिए हटाई गई ताकि संगठन से बाहर होने वाले पदाधिकारियों को एडजस्ट किया जा सके। अब 38 साल या उससे कम के कार्यकर्ताओं के नामों पर मंथन किया जा रहा है।

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Ashish Gupta Desk
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