सूरज की रोशनी से मिलता है जो विटामिन उसकी जांच के नाम पर करोड़ों का काला कारोबार

सूरज की रोशनी  से मिलता है जो विटामिन उसकी जांच के नाम पर करोड़ों का काला कारोबार
सूरज की रोशनी से मिलता है जो विटामिन उसकी जांच के नाम पर करोड़ों का काला कारोबार

Sandeep Kumar Upadhyay | Updated: 14 Sep 2019, 03:09:22 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

* जरूरी जांच को डॉक्टर बना रहे कॉमन, लैब संचालक वसूल रहे मनमाना फीस

* मात्र दो से तीन रुपए के इंजेक्शन व सही दिनचर्या से हो सकती है बिटामिन की पूर्ति

 

डॉ. संदीप उपाध्याय @ रायपुर. प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रही छत्तीसगढ़ की आम जनता को विटामिन की कमी के नाम पर महंगे परीक्षणों से दो चार होना पड़ रहा है । आलम यह है कि मानव शरीर को जो विटामिन सूरज की रोशनी से मिलता है उसके लिए डाक्टरों और पैथालाजी लैब्स के बीच करोड़ों का कारोबार फल फूल रहा है राजधानी रायपुर में पिछले तीन चार वर्षों से विटामिन डी के टेस्ट और उसके इंजेक्शन और टेबलेट्स की बाढ़ आ गई है। आलम यह है कि विटामिन डी की अनावश्यक जांच के नाम पर भी डॉक्टर और लैब संचालक मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन डी की कमी होना आम बात है। रोजाना सूर्य की रोशनी और घी व मक्खन के सेवन से यह दूर हो सकता है। लोगों को विटामिन डी का टेस्ट कराकर दवा लेने से बचना चाहिए।

क्लिनिकल जांच में ही हो सकती है कमी की पहचान
इस परीक्षण की आवश्यकता को लेकर एक्सपोज टीम ने गहन पड़ताल की। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार थायराइड और हड्डी से जुड़ी परेशानी के चलते विटामिन डी की जांच करानी पड़ती है, लेकिन कई अनुभवी डॉक्टर क्लीनिकल जांच में इसे पकड़ लेते हैं। कुछ डॉक्टरों का यहां तक दावा है कि यदि व्यक्ति रोजाना एक चम्मच घी या मक्खन खाये और 15 मिनट धूप ले तो उसे विटामिन डी की कमी कभी नहीं होने वाली। लेकिन लैब की दुकान चलाने के लिए हड्डी के रोगियों व गर्भावस्था से जुड़े 90 प्रतिशत मरीजों की विटामिन डी की जांच कराई जाती है। यह भले ही जरूरी न हो, लेकिन डॉक्टर और लैब संचालकों की मिलीभगत से यह जरूरी होता जा रहा है।

खतरनाक हो सकती है विटामिन डी के सप्लीमेंट्स और इंजेक्शन
1- विटामिन डी का अधिक सेवन करने से वह अचानक मौत (साइलेंट डेथ) की वजह बन सकता है।
2- शरीर में विटामिन डी की मात्रा 20 से 50 नैनो ग्राम प्रति मिली लीटर से अधिक होना गंभीर है।
3- विटामिन डी की मात्रा बढऩे पर किडनी में पथरी के अलावा हड्डियों और किडनी की कई तरह की परेशानियां होती हैं।
4- खून में विटामिन डी की मात्रा प्रति लीटर 50 नैनोमोल से अधिक होने पर दिल के दौरे पड़ सकते हैं।
5- विटीमिन डी की अधिकता से शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है। इससे भूख कम लगती है। इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं में गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है।

1100 से 1500 में होता है परीक्षण
पत्रिका की एक्सपोज टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो अलग-अलग पैथोलैब में विटामिन डी जांच का शुल्क भी अलग-अलग मांगा गया। इस जांच के लिए कालीबाड़ी रोड स्थित डॉ. लाल पैथोलैब में 1100 रुपए, विधानसभा रोड स्थित श्रीराम पैथोलॉजी लैब में 1500, तात्यापारा स्थित तिवारी क्लीनिकल लैब में 1200 और देवपुरी स्थित गंगा डायग्नोस्टिक मेडिकल सेंटर में 900 रुपए शुल्क मांगा गया।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स डाक्टर

* विटामिन डी का टेस्ट नहीं है जरूरी
विटामिन डी का टेस्ट करना कोई जरूरी नहीं है। विटामिन डी की कमी लोगों में सामान्य बात है। भारत में रहने वाले लोगों में विटामिन डी की कितनी मात्रा होनी चाहिए इस पर कोई शोध नहीं आया है। इसलिए सही डॉक्टर लोगों को सही दिनचर्या व खानपान से की सलाह देते हैं।
- डॉ. अंकुर गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सक, नारायणा एमएमआई

बार-बार जांच से बचना चाहिए
जब क्लीनिकल टेस्ट में विटामिन डी की कमी पकड़ में नहीं आती और हड्डी से संबंधित तकलीफ बड़ी होती है तो डॉक्टर विटानि डी की जांच के लिए लिखता है। लेकिन यदि डॉक्टर बार-बार इस जांच की सलाह देता तो यह गलत है। पीडि़त को इससे बचना चाहिए।
- डॉ. बीपी सिंह, एचओडी पैथोलॉजी, जगदलपुर मेडिकल कॉलेज

जांच से अच्छा दवा खाना बेहतर
आज की जो दिनचर्या है उसमें सभी का विटामिन डी कम ही आता है। इसलिए डॉक्टरों को चाहिए कि वह जांच कराने से अच्छा सप्लीमेंट के तौर पर दवा दे दें। इससे लोगों को कम खर्च में राहत मिल जाएगी। टेस्ट कराने से कोई लाभ नहीं होने वाला है।
-डॉ. सुशील कुमार, वरिष्ठ शिशुरोग विशेषज्ञ, अपोलो बिलासपुर.

टेस्ट से मिलती है कमी की जानकारी
विटामिन डी बढ़ती हुई हड्डियों और उनकी मजबूती के लिए बहुत जरूरी है। टेस्ट कराने से यह पता चल जाता है कि विटामिन डी की मात्रा नॉर्मल है या फिर कम। ऐसे में हम दवा के जरिए उस कमी को पूरा कर सकते हैं।
-डॉ. करण पिपरे, एमएस, एम्स रायपुर

शरीर में इतनी होनी चाहिए विटामिन डी की मात्रा
भारतीय वातावरण के अनुसार शरीर में विटामिन डी की कितनी मात्रा इस पर कोई अध्ययन तो नहीं हुआ, लेकिन स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में विटामिन डी की मात्रा 50 एनजी/एमएल या इससे अधिक होनी चाहिए। डॉक्टर 20 से 50 एनजी/एमएल के बीच को नॉर्मल मानते हैं। लेवल 25 से कम होने पर डॉक्टर विटामिन डी सप्लीमेंट या इंजेक्शन लेने की सलाह देते हैं। लेकिन कई डाक्टरों का कहना है कि यह जो माप है उससे सहमत नहीं हुआ जा सकता फिर भी अगर कमी है तो मरीज को प्राकृतिक तौर पर ठीक किया जा सकता है उसके लिए मरीज की गाढ़ी कमाई को जांच में डुबाने का औचित्य तर्क से परे हैं।

क्या तर्क दिए जाते हैं जांच के पीछे
- हड्डियों, मसल्स और लिगामेंट्स की मजबूती के लिए
- शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए
- नव्र्स और मसल्स के कॉर्डिनेशन को कंट्रोल करने के लिए
- सूजन और इन्फेक्शन से बचाने के लिए
- किडनी, लंग्स, लीवर और हार्ट की बीमारियों की आशंका कम करने के लिए
- कैंसर रोकने में मददगार

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