नई बुलंदियों की ओर बीएसपी

Gulal Verma

Publish: Jun, 14 2018 07:36:55 PM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
नई बुलंदियों की ओर बीएसपी

भिलाई इस्पात संयंत्र के विस्तारीकरण परियोजना को राष्ट्र को समर्पित

भिलाई इस्पात संयंत्र क नया उदय स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की सबसे बड़ी इकाई होने का तमगा हासिल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भिलाई इस्पात संयंत्र के विस्तारीकरण परियोजना को राष्ट्र को समर्पित । भारत-रूस मैत्री की नींव पर खड़े इस इस्पात संयंत्र की यह बड़ी उपलब्धि है कि करीब 27 हजार करोड़ की विस्तार परियोजना को बिना किसी विदेशी मदद के हमारे इंजीनियरों ने आकार दिया है। इस संयंत्र की स्थापना के लिए 2 फरवरी 1955 को रूस के साथ करार हुआ। फिर निर्माण शुरू हुआ और 1961 को 1 मिलियन टन उत्पादन क्षमता का यह इस्पात संयंत्र तैयार हो गया। अब यह संयंत्र 7 मिलियन टन की क्षमता को हासिल करने जा रहा है।
इस संयंत्र की स्थापना हुई तब वह आजादी के बाद का दौर था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू भिलाई में आधुनिक तीर्थ तैयार करवा रहे थे। पंडित नेहरू के बाद नरेंद्र मोदी इस औद्योगिक तीर्थ में आने वाले दूसरे प्रधानमंत्री होंगे। भिलाई इस्पात संयंत्र केवल फौलाद ही उगलने वाला नहीं है, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों का एक खूबसूरत गुलदस्ता भी है। इस्पात संयंत्र की वजह से भिलाई मिनी इंडिया (लघुभारत) कहलाता है। यहां देश के हर कोने के लोग रहते हैं और मिलजुल कर।
विस्तारीकरण के साथ ही यह पब्लिक सेक्टर और ज्यादा समृद्ध हो जाएगा। इस बीच इस संयंत्र ने उतार-चढ़ाव के कई दौर भी देखे। भिलाई बिरादरी की यह जीवटता ही है कि जब-जब संकट का दौैर आया उन्होंने हर संयंत्र को उबार लिया। यह हर बार खुद एक हिमालय गढ़ता है, उसे पार करता है और उसकी ऊंचाई नाप लेता है। लोहा गलाने वालों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद और कला समेत हर क्षेत्र में नई बुलंदियों को छुआ है। भिलाई की पहचान औद्योगिक तीर्थ के साथ शिक्षाधानी के रूप में भी है। दुनिया के तमाम देशों में भिलाई के होनहार मिल जाएंगे। यह भी बीएसपी की ही देन है। विस्तारीकरण के बाद यह इस्पात संयंत्र नई बुलंदियों को छुएगा।

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