लंदन की सरकार ने जब गंभीरता दिखाईतब तक काफी देर हो चुकी थी

डीडी नगर निवासी मनीष सिंह बता रहे हैं वहां के हालात

By: Devendra sahu

Published: 18 Apr 2020, 01:14 AM IST

रायपुर. मैं डिजिटल एपीआई क्राफ्ट कंपनी में सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट हूं और पिछले एक साल से लंदन में हूं। पिछले एक महीने से वर्क फ्रॉम होम कर रहा हूं। यूनाइटेड किंग्डम और विशेषकर लंदन शहर कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित स्थानों में से एक है। यहां प्रिंस चाल्र्स, प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक तक कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए जा चुके हैं।
आज की तारीख में यहां कोरोना वायरस से 12000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 90000 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। पिछले दो हफ़्तों से यहां रोज़ औसतन 700 से ज्यादा लोगों की कोरोना वायरस से मृत्यु हो रही है। सरकार का कहना है की अगले कुछ हफ़्तों में ये हालत अभी और बिगड़ेंगे। यहां के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है की कुछ समय में यूनाइटेड किंगडम संक्रमण और मृत्यु के मामलों में पूरे यूरोप में सबसे आगे होगा।

इम्युनिटी पावर पर यह थी सोच
यहां की सरकार ने शुरू में इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया। शुरुआत में सरकार की योजना हर्ड इम्युनिटी डेवलप करने की थी। वे चाहते थे कि यहां के अधिकतर लोगों को ये बीमारी एक बार हो जाए तो शायद शरीर खुद से प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेगा। उन्होंने इसे एक सामान्य फ्लू के जैसा समझा। परन्तु कुछ ही दिनों में साफ़ हो गया कि ये तरीका बहुत ही घातक है। जब 65 साल से कम उम्र के बिना किसी मेडिकल हिस्ट्री वाले लोगों की भी इस बीमारी से मौत होने लगी तो सरकार को लॉकडाउन करना पड़ा। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

बस, रेल और फ्लाइट सर्विस जारी
पिछले तीन हफ्तों से अनिश्चितकाल के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है। लोगों को सिर्फ जरूरी सामान खरीदने और दिन में एक बार पार्क में जाने की अनुमति है। सोशल डिस्टैन्सिंग के बारे में समझाया जा रहा है लेकिन लोगों में अभी भी जागरुकता का आभाव है। यहां भारत जैसे सख्त लॉकडाउन वाले नियम नहीं हैं। बस, रेल और विमान सेवाएं अभी भी चालु है।

पीपीई और जरूरी संसाधनों का अभाव
यहां अभी भी कोरोना वायरस की टेस्टिंग बहुत कम हो रही है। सरकार का कहना है कि किसी को भी कोरोना के लक्षण हों तो दो हफ्ते खुद का घरेलू उपचार करें। अगर दो हफ़्ते बाद भी तबीयत में सुधार न हो तभी कोरोना वायरस के टेस्ट होते हैं और हॉस्पिटल में भर्ती किया जाता है। यहां स्वस्थ्य कर्मियों के लिए पीपीई और जरूरी संसाधनो का अभाव है।

Devendra sahu Desk
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