निजी अस्पतालों को ऑफर, होटल के साथ अनुबंध कर बगैर लक्षण वाले मरीजों को रखकर कर सकते हैं इलाज

होटलों से टॉयअप (अनुबंध) कर उन्हें अस्थाई अस्पताल के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। मगर, वहां सिर्फ ए-सिम्पेटैमेटिक (बिना लक्षण वाले) मरीज ही भर्ती किए जाएंगे। अस्पताल के डॉक्टर होटल जाकर इलाज करेंगे, मरीज पूरी तरह से उनकी निगरानी में होंगे। जैसी व्यवस्था दिल्ली-मुंबई में लागू है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 24 Jul 2020, 08:59 PM IST

रायपुर. प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या जिस गति से बढ़ रही है, तो यह निश्चित है कि आने वाले दिनों में सरकारी अस्पतालों में बेड कम पड़ सकते हैं। यही वजह है कि सरकार ने निजी अस्पतालों को इलाज का नया विकल्प मुहैया करवा दिया है। वे होटलों से टॉयअप (अनुबंध) कर उन्हें अस्थाई अस्पताल के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। मगर, वहां सिर्फ ए-सिम्पेटैमेटिक (बिना लक्षण वाले) मरीज ही भर्ती किए जाएंगे। अस्पताल के डॉक्टर होटल जाकर इलाज करेंगे, मरीज पूरी तरह से उनकी निगरानी में होंगे। जैसी व्यवस्था दिल्ली-मुंबई में लागू है।

रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, सरगुजा के सीएमएचओ को होटल के विकल्प से संबंधित निर्देश भी जारी कर दिए गए। क्योंकि सबसे ज्यादा मरीज इन्हीं जिलों में मिल रहे हैं। इसकी गाइड-लाइन भी जारी कर दी गई है। उधर, गुरुवार स्वास्थ्य संचालक नीरज बंसोड़ ने चार बड़े निजी अस्पतालों के मैनेजिंग डॉयरेक्टर्स के साथ चर्चा की। इस दौरान चारों अस्पताल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए तैयार हैं।

'पत्रिका' को मिली जानकारी के मुताबिक चारों अस्पतालों के मैनेजिंग डॉयरेक्टर्स ने कोरोना मरीजों का इलाज करने पर सहमति दी है। संभव है कि अगस्त के पहले हफ्ते से ये मरीजों का इलाज करना शुरू भी कर दें। इनके अस्पताल में अगर नियमानुसार कोरोना मरीजों के लिए अलग से वार्ड, आने-जाने का मार्ग हो तो वे वहां भी भर्ती कर सकते हैं।

सामान्य और गंभीर मरीजों के लिए बेड, आईसीयू, वेंटीलेटर की आवश्यकता पड़ सकती है। सरकार के पास अपने कोविड 19 हॉस्पिटल, कोविड केयर सेंटर, क्वारंटाइन सेंटर मिलाकर कुल 15835 बेड हैं। 517 आईसीयू बेड हैं और 280वेंटीलेटर। इन्हें भी बढ़ाया जा रहा है।

इलाज का खर्च मरीज और अस्पताल के बीच की बात-

स्वास्थ्य विभाग की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि निजी अस्पताल में कोई मरीज इलाज करवाना चाहता है, या जाता है तो वह उसका स्वयं का खर्च होगा। विभाग इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। हालांकि निजी अस्पतालों को यह भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे वाजिब शुल्क ही लें।

रायपुर में निजी अस्पतालों के साथ बातचीत जारी है, वे इलाज करने के लिए तैयार हैं। बिलासपुर समेत अन्य जिलों को भी निजी अस्पतालों से चर्चा करने कहा है। मरीजों का इलाज पहली प्राथमिकता है।

-डॉ. धमेंद्र गहवईं, प्रवक्ता एवं राज्य सर्विलेंस अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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