स्वागत विहार : रद्द आठों लेआउट बहाल, प्लाट का चिह्नांकन भी हुआ, नहीं हटी नामांतरण से रोक

तहसील ऑफिस में आदेश का इंतजार

रायपुर. राजधानी के चर्चित न्यू स्वागत विहार के पीडि़तों की समस्याओं के निराकरण का पेंच सुलझ नहीं रहा है। मामले का भंडाफोड़ होने के बाद पिछली सरकार ने आनन-फानन में जिन आठों लेआउट को रद्द किया था, उसे हाईकोर्ट के आदेश पर बहाल किया जा चुका है। स्वागत विहार में बिल्डर संचालक मंडल ने जिन रकबा नंबरों की स्थिति पूरी तरह से साफ है, उन लोगों के प्लाट का चिह्नांकन भी शुरू कर दिया है। इसके बावूजद अभी तहसील कार्यालय में नामांतरण की प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है। तहसील का स्टॉफ द्वारा स्वागत विहार के विवादित होने का हवाला देकर नामांतरण की अर्जी नहीें ली जा रही है।
स्वागत विहार में २००९-१० में प्लाट वाले श्याम किशोर अग्रवाल रजिस्ट्र लेकर नायब तहसीलदार के कार्यालय पहुंचे और रजिस्ट्री दिखाते हुए नामांतरण कराने के संबंध में जानकारी ली। इस पर स्टॉफ के रीडर द्वारा स्वागत विहार का नाम सुनते ही बिना आदेश आवेदन नहीं लेने की बात कही। गौरतलब है कि राजधानी के डूंडा, बोरियाकला और सेजबहार की करीब २८८ एकड़ में स्वागत विहार आवासीय कॉलोनी विकासित करने की प्रक्रिया वर्ष २००६-०७ में शुरू हुई थी। इसके बाद २०१२-१३ के बीच टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने स्वागत विहार का लगातार आठ लेआउट मंजूर किया। जिस पर विश्वास करते हुए शहर के लोगों ने प्लाट खरीद लिया। लेकिन बिल्डर और सरकारी अमले की मिलीभगत के चलते हुए स्वागत विहार में २५ एकड़ सरकारी नजूल की जमीन को शामिल किए जाने का खेल उस समय सामने आया, जब रायपुर विकास प्राधिकरण ने कमल विहार योजना के तहत पूरे रकबे का सीमांकन कराया। उसमें सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। उच्च स्तरीय जांच कराकर स्वागत विहार को विवादित घोषित कर दिया गया।
१८ जनवरी को प्रस्ताव प्रस्तुत करने के आदेश
बिल्डर संचालक मंडल ने २५ एकड़ नजूल की जमीन लेआउट से बाहर हो जाने पर केवल १५ सौ लोगों को प्लाट उपलब्ध कराने का दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत किया था। बाकी १४ सौ लोगों के लिए जमीन नहीं होने की अर्जी लगाकर राज्य शासन से ईडब्ल्यूएस,गार्डन, हास्पिटल और स्कूल की जगह को मुक्त करने का आग्रह किया। इस मामले में बिल्डर संचालक मंडल १८ जनवरी को पूरा प्रपोजल हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगा। क्योंकि यह तारीख हाईकोर्ट द्वारा नियत की गई है।
हाईकोर्ट में लगाई गई १२५ रिट याचिका
पिछली सरकार में न्याय नहीं मिलने से परेशान १२५ पीडि़तों ने ४ अप्रैल २०१६ में राज्य शासन और बिल्डर के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई। इस पर माननीय न्यायालय ने १४ सितंबर २०१७ को आदेश दिया कि पीडि़तों को उनके प्लाट में कब्जा दिया जाए। और सरकारी जमीन वाली रजिस्ट्री के पीडि़तों को मुआवजा। जिसका पालन बिल्डर संचालक मंडल और राज्य शासन द्वारा नहीं किए जाने की स्थिति में न्यू स्वागत विहार भू स्वामी कल्याण समिति और भू स्वामी संघ की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई्र। जिसपर ७ मई को फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने सभी आठों लेआउट को बहाल करने का आदेश जारी कर दिया। लेकिन मामला अभी कोर्ट में चल रहा है।
रायपुर एसडीएम प्रणव सिंह ने बताया कि भू राजस्व संहिता के तहत नामांतरण की अर्जी लेने से इनकार नहीं किया जा सकता है। चाहे मामला स्वागत विहार का ही क्यों न हो। आवेदक द्वारा संहिता के तहत आवेदन करने पर संबंधित तहसीलदार कार्यालय में नियमानुसार निराकरण किया जाएगा।

VIKAS MISHRA
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