कोरोना का असर: छत्तीसगढ़ में मोतियाबिंद और नसबंदी ऑपरेशन बंद क्योंकि संक्रमण का खतरा

सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की जा रही है। ऐसी गाइडलाइन बनाने पर काम शुरू हो चुका है ताकि कोरोना पर नियंत्रण का काम भी जारी रहे और कम ही सही मगर, मोतियाबिंद ऑपरेशन और नसबंदी होते रहें। मरीजों को लाभ मिलता रहा।

By: Karunakant Chaubey

Published: 21 May 2020, 04:47 PM IST

रायपुर. कोरोना वायरस ने हेल्थ सिस्टम को भी खासा प्रभावित किया है, क्योंकि वर्तमान में पूरा फोकस जानलेवा और लाइलाज बीमारी कोरोना की रोकथाम तक सिमट कर रह गया है। विकासखंड स्तर से लेकर राज्य स्तर तक समूची स्वास्थ्य अमला सिर्फ कोरोना नियंत्रण, मरीज ढूंढऩे, आइसोलेट करवाने, कांटेक्ट ट्रेसिंग और क्वारंटाइन में रहने वालों की जांच करने में जुटा है, क्योंकि आज यही सबसे बड़ी चुनौती है।

संक्रमण के खतरे को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लॉकडाउन-1 के लागू होते ही गैर-आपातकालीन ऑपरेशन पर रोक लगा दी थी। ताकि मरीज, डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ सुरक्षित रहें। दो महीने से राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल मोतियाबिंद ऑपरेशन और नसबंदी पर भी रोक लगी हुई है। मगर, अब स्वास्थ्य विभाग अब इस बात को समझ रहा है कि इतनी जल्दी कोरोना वायरस पर नियंत्रण संभव नहीं है। कोरोना के साथ ही जीना होगा, ऐसे में ज्यादा दिनों तक ऑपरेशन टाले नहीं जा सकते।

यही वजह है कि अब सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की जा रही है। ऐसी गाइडलाइन बनाने पर काम शुरू हो चुका है ताकि कोरोना पर नियंत्रण का काम भी जारी रहे और कम ही सही मगर, मोतियाबिंद ऑपरेशन और नसबंदी होते रहें। मरीजों को लाभ मिलता रहा।

प्री-प्लान ऑपरेशन पर रोक के ये हैं मायने

मरीजों की आवाजाही को कम करना, अस्पतालों में कम से कम भीड़ हो, मरीज यात्रा न करें क्योंकि उन्हें ही होता है ज्यादा संक्रमण का खतरा।

अभी आंख, नसबंदी और हार्ट के प्रोसिजर पर लगा है ब्रेक-

मोतियाबिंद ऑपरेशन-

सालाना- औसतन 1.20 लाख-

- प्रदेश में हर साल 1.20 लाख मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन किए जाते हैं। अधिकांश ऑपरेशन डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत होते हैं। मगर, लॉकडाउन-1 लागू होने के बाद से ही ऑपरेशन पर रोक लगा दी गई। इमरजेंसी मरीजों को ही ऑपरेट किए जा रहे हैं, जिनकी संख्या बहुत कम है। मोतियाबिंद ऑपरेशन में सबसे बड़ा खतरा यह है कि अगर मोतियाबिंद का सही समय पर ऑपरेशन नहीं हुआ तो वह पक जाता है और आंख को खराब होना का डर होता है। अगर एक बार दिखाई देना बंद हुआ तो फिर रोशनी लौटाना संभव ही नहीं।

नसबंदी ऑपरेशन-

सालाना- औसतन 50-55 हजार

- 2014 बिलासपुर स्थित पेंडारी नसंबदी कांड के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नसबंदी का लक्षय 50-55 हजार तक सीमित कर दिया है। यानी जितनी सुविधा, उतने ही ऑपरेशन। वर्तमान में प्री-प्लान नसंबदी में रोक लगी हुई है। आपातकाल में नसबंदी की जा रही है। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए मितानिनों और एएनएम द्वारा की किए जा रहे प्रचार-प्रसार के दौरान नसबंदी के भी पम्पलेट बांटे जा रहे हैं। परिवार नियोजन से संबंधित सभी तरह की दवाईंयां भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

कोरोना के वायरस के चलते ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं। मगर, हमें आज नहीं तो कल मोतियाबिंद ऑपरेशन शुरू करने पड़ेंगे। कम ही करेंगे, गंभीर केस ही लेंगे मगर करेंगे। गाइड-लाइन पर काम चल रहा है।

डॉ. सुभाष मिश्रा, राज्य नोडल अधिकारी, अंधत्व निवारण समिति

बीते वर्ष अप्रैल माह में प्रदेश में 2400 नसबंदी हुई थीं, इस वर्ष आंकड़े कम हैं, जो इमरजेंसी के हैं। नसबंदी ऑपरेशन पर रोक हटेगी तो ही ज्यादा केस होंगे।

-डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, उप संचालक, परिवार नियोजन कार्यक्रम, स्वास्थ्य विभाग

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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