2013 में रोचक था CG के इन दो सीटों पर चुनाव, महज कुछ वोटों से हुआ था हार-जीत का फैसला

2013 में रोचक था CG के इन दो सीटों पर चुनाव, महज कुछ वोटों से हुआ था हार-जीत का फैसला

Ashish Gupta | Publish: Aug, 12 2018 12:39:20 PM (IST) | Updated: Aug, 12 2018 12:46:36 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए 2013 में हुए चुनाव में प्रदेश की दो ही सीटें ऐसी रहीं जिसमें हार-जीत का अंतर 1500 वोटों से कम का था।

मिथिलेश मिश्र/रायपुर. विधानसभा के लिए 2013 में हुए चुनाव में प्रदेश की दो ही सीटें ऐसी रहीं जिसमें हार-जीत का अंतर 1500 वोटों से कम का था। पहली सीट थी तखतपुर जहां भाजपा के राजू सिंह क्षत्रीय ने कांग्रेस के आशीष सिंह ठाकुर को 608 मतों से हराया था। दूसरी सीट थी राजनांदगांव जिले की मोहला-मानपुर। यहां कांग्रेस की तेजकुंवर गोवर्धन नेताम ने भाजपा के भोजेश शाह मंडावी को 956 मतों से मात दी।

लोगों को उम्मीद थी कि ऐसी स्थिति में उनके समस्याओं के लिए दोनों नेता सक्रियता दिखाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। तखतपुर से विधायक राजू सिंह क्षत्रीय केवल पार्टी और सरकारी कार्यक्रम में उपस्थिति तक सक्रिय रहे। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी आशीष सिंह भी पार्टी के कार्यक्रमों में ही नजर आते रहे। क्षेत्र में बिजली, पानी जैसी समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ और कांग्रेस प्रत्याशी आशीष इसको लेकर आंदोलन करते भी नहीं दिखे। लोगों को मुलाकात के लिए चक्कर लगाने पड़े। मोहला-मानपुर में भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। किसी भी क्षेत्र में गुत्थमगुत्था की स्थिति तो बनी ही नहीं। लोगों को भी कोई फायदा नहीं मिला। कुल मिलाकर इस बार का चुनाव भी यह उम्मीदवार भाग्य के भरोसे ही लडऩा चाहते हैं। जिनकी भाग्यरेखा ताकतवर होगी वह जीत जाएगा।

रायपुर ग्रामीण में विधायक ही ज्यादा सक्रिय
रायपुर ग्रामीण सीट पर हार-जीत का अंतर मामूली रहा। कांग्रेस के सत्यनरायण शर्मा ने भाजपा के सीटिंग विधायक नंद कुमार साहू को 1861 वोटों से हराया था। शर्मा 2008 का विधानसभा चुनाव ऐसे ही कम अंतर से साहू से हारे थे। स्थानीय निवासी और छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला बताते हैं, यहां उल्टा हुआ है। सत्यनारायण शर्मा हारने के बाद भी क्षेत्र में मेहनत कर रहे थे। बरसात के समय सड्डू इलाके में बाढ़ आ जाती थी। तत्कालीन विधायक कभी नहीं पहुंचे, लेकिन सत्यनारायण शर्मा चार फीट पानी भी घुसकर लोगों तक पहुंचते रहे।

विधायक बनने के बाद भी सक्रियता बढ़ाए हुए हैं। नंद कुमार साहू विधायक रहते हुए भी समस्या होने पर नहीं पहुंचते थे, हारने के बाद भी रवैया बदला नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि साहू समाज की क्षेत्र में बड़ी आबादी होने का फायदा भाजपा प्रत्याशी को मिलता रहा है। इस बार सत्यनारायण शर्मा ने उसमें पैठ बनाने की कोशिश की थी, लेकिन फायदा नहीं हो पाया। उन्होंने साहू समाज की एक महिला को महापौर का उम्मीदवार बनाना चाहा। ऐन वक्त पर महिला ने चुनाव लडऩे से मना कर दिया और टिकट दूसरे समाज को चला गया। लेकिन साहू समाज में संदेश गया कि शर्मा ने साहू समाज का टिकट कटवा दिया।

कवर्धा में दोनों में तगड़ी प्रतिद्वंद्विता
कवर्धा में हार-जीत का अंतर 2558 वोटों का था। भाजपा के अशोक साहू ने पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर को हराया था। फैसले के बाद भी यहां दोनों की प्रतिद्वंद्विता दिखती है। भोरमदेव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाए जाने के खिलाफ कांग्रेस ने बड़ा आंदोलन खड़ा किया। भाजपा विधायक तेजी से सक्रिय हुए। स्टैंड लिया और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हस्तक्षेप के बाद टाइगर रिजर्व का प्रस्ताव रदद हुआ। 2013 चुनाव से पहले कवर्धा में हुए साम्प्रदायिक तनाव को मोहम्मद अकबर की हार का बड़ा कारण माना जाता है। इस बार वासंतिक नवरात्रि में अकबर ने सभी देवी मंदिरों में जाकर दर्शन किए। पहली बार सार्वजनिक कहा, नवरात्रों में उनके नाम से माता के मंदिर में वर्षों से जोत जलाई जाती रही है। वहीं विधायक अशोक साहू सभी गांवों का दौरा कर चुके हैं।

रायपुर ग्रामीण विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि सरकार विपक्ष के विधायक को विकास का श्रेय नहीं देना चाहती, लेकिन उन्होंने लोगों की सेवा की है। विधायक निधि से लोगों के काम कराए हैं। उनकी समस्याओं का समाधान कराने की लड़ाई लड़ी। उनकी सक्रियता नहीं होती तो विधानसभा में जागरुक विधायक क्यों चुना जाता।

रायपुर ग्रामीण पूर्व विधायक नंद कुमार साहू ने कहा कि लोगों की समस्या सुनकर उनका काम करवा रहे हैं। उनके सुख-दुख में शामिल होते हैं। क्षेत्र में बराबर सक्रियता बनी हुई है। समाज में भी लोगों से अच्छा संपर्क बना हुआ है। इस बार सरकार की योजनाएं लेकर लोगों के बीच जाएंगें। इस बार नतीजा बदलेगा और अंतर भी बढ़ेगा।

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