72 तहसीलों को सरकार की सूखाग्रस्त घोषित करने की थी तैयारी, लेकिन कुछ दिन से जारी बारिश से मुश्किलें बढ़ी

छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त तक की स्थिति में 72 तहसीलें ऐसी थीं, जहां 80 फीसदी से कम बारिश हुई थीं। सूखा प्रबंधन मैनुअल 2016 के मापदण्डों के अनुसार इन तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित किया जा सकता था।

By: Ashish Gupta

Published: 13 Sep 2021, 11:45 AM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त तक की स्थिति में 72 तहसीलें ऐसी थीं, जहां 80 फीसदी से कम बारिश हुई थीं। सूखा प्रबंधन मैनुअल 2016 के मापदण्डों के अनुसार इन तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित किया जा सकता था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश की वजह से 72 में से 13 तहसीलों में 80 फीसदी से अधिक पानी गिर गया है। ऐसे में इन तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने में तकनीकी दिक्कत आ सकती है। इधर, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग कलेक्टरों से मिलने वाली रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही सूखाग्रस्त घोषित करने की कार्रवाई होगी। बता दें 8 सितम्बर को मंत्रिपरिषद की बैठक में भी सूखे को लेकर चर्चा हुई, लेकिन कलेक्टरों की रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण कोई फैसला नहीं हो सका।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक 31 अगस्त तक की स्थिति में रायपुर जिले में आरंग, तिल्दा और अभनपुर तहसील में 80 फीसदी से कम बारिश हुई थी, लेकिन अभनपुर तहसील अब इससे बाहर हो गया। अभनपुर में 12 सितम्बर तक की स्थिति में 85.5 फीसदी पानी गिरा है। इस मामले में बलौदाबाजार जिले की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। यहां सिमगा और बिलाईगढ़ में 80 फीसदी से ज्यादा पानी गिर गया है। वहीं भाटापारा तहसील में 79.6 फीसदी बारिश हुई है। एक दिन पानी गिरने पर यह भी 80 फीसदी से पार हो जाएगी।

कई जिलों की स्थिति खराब
पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के बाद कुछ जिले ऐसे हैं, जहां सिर्फ मामूली प्रभाव पड़ा है। यानी इन जिलों की तहसीलों में 80 फीसदी बारिश भी नहीं हुई। इसमें कांकेर जिला की सभी छह तहसील शामिल हैं। यही स्थिति महासमुंद और बीजापुर जिले की भी है। इन जिलों की किसी भी तहसील में अच्छी बारिश नहीं हो सकी है। इससे किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

जल्द होगी कलेक्टरों की बैठक
बताया जाता है जल्द ही कलेक्टरों की बैठक होगी। इसमें सभी एसपी भी मौजूद रहेंगे। इसमें सूखा के साथ-साथ कानून व्यवस्था, गोधन न्याय योजना सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी। हालांकि इसकी तिथि तय नहीं है, लेकिन एजेंडा पर काम शुरू हो गया है।

इन तहसीलों में 80 फीसदी से अधिक बारिश
मैनपुर, अम्बागढ़ चौकी, डोंगरगढ़, डौंडीलोहारा, लोहन्डीगुड़ा, तोकापाल, दंतेवाड़ा, बड़े बचेली, फरसा बहार व बम्हनीडीह शामिल हैं।

इन तहसीलों में 80 फीसदी से कम बारिश
रायपुर जिले में आरंग व तिल्दा व अभनपुर, कांकेर जिले में दुर्गकोंदल, कांकेर, भानुप्रतापपुर, चारामा, अंतागढ़, नरहरपुर व पंखाजूर, बस्तर जिले में जगदलपुर व बकावंड, दंतेवाड़ा जिले में कुआकोन्डा व गीदम, धमतरी जिले में नगरी, कुकरेल, धमतरी व कुरुद, बीजापुर जिले में भोपालपट्टनम, उसूर, भैरमगढ़ व बीजापुर, बालोद जिले में बालोद, गुण्डरदेही, डौंडी, गुरुर व अर्जुन्दा, बलरामपुर जिले में राजपुर व बलरामपुर, बलौदबाजार जिले में भाटापारा, कबीरधाम जिले में रेंगाखारकला, कोण्डागांव जिले में माकड़ी, केशकाल व कोण्डागांव, कोरिया जिले में केल्हारी व मनेन्द्रगढ़, महासमुंद जिले में पिथौरा, सराईपाली, बसना व महासमुंद, बिलासपुर जिले में मस्तूरी, रायगढ़ जिले में रायगढ़, पुसौर, खरसिया, तमनार व धरमजयगढ़, राजनांदगांव जिले में छुरिया, राजनांदगांव व मोहला, सरगुजा जिले में उदयपुर, दरिमा, लुण्ड्रा व सीतापुर, सुकमा जिले में गादीरास व सुकमा, सूरजपुर जिले में प्रतापपुर, जांजगीर-चांपा जिले सारागांव व बम्हनीडीह, जशपुर जिले में पत्थलगांव, गरियाबंद जिले में छुरा और नारायणपुर जिले की नारायणपुर तहसील शामिल हैं।

दुर्ग : कोटा पूरा, लेकिन नहीं हो पाएगी नुकसान की भरपाई
जिले में पिछले दो दिन से मौसम में अचानक आए बदलाव से बारिश का कोटा लगभग पूरा हो गया है। राजस्व विभाग के मुताबिक इस समय तक जिले में औसत 864.6 मिमी बारिश होनी चाहिए। रविवार की सुबह तक 861.4 मिमी यानी 99.6 फीसदी बारिश हो चुकी थी। इससे धान के लेट वेरायटी की फसल को फायदा होगा, लेकिन अरली वेरायटी में नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी। संभागीय संयुक्त किसान मोर्चा के रविप्रकाश ताम्रकार के मुताबिक अरली वेरायटी की फसल में ग्रोथ का समय निकल गया है। इससे पहले पानी की कमी के कारण पौधे भले ही नहीं सूखे, लेकिन पर्याप्त संख्या में कंसे नहीं फूटे। इससे पैदावार में करीब 30 फीसदी नुकसान तय है। वहीं अब अरली वेरायटी की फसल में बालियां निकलनी शुरू हो गई है। ऐसे में पहले हो चुके नुकसान की भरपाई संभव नहीं है।

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