पार्षद अपने ही लोगों को बांट रहा है चावल, हम मर रहे हैं भूखे

कुछ इस तरह की शिकायतें आ रही हैं सेंट्रल हेल्पलाइन नंबर पर

By: Gulal Verma

Published: 23 Apr 2020, 04:56 PM IST

रायपुर। सर खाने को चावल तो मिल रहा है, लेकिन १० माह के बच्चे का दूध के लिए पैसे नहीं हैं। पति उत्तरप्रदेश गए थे, वो भी लॉकडाउन के कारण वापस नहीं लौट पा रहे हैं। राज्य के हेल्पलाइन नंबर पर कुछ शिकायतें मिल रही हैं। जिसमें लोगों का दुख साफ दिखाई दे रहा है। लॉकडाउन के दौरान रोज कमाने-खाने वाले लोगों का जीवन संकट में आ गया है। हालांकि यहां तक आने वाली शिकायतों का निराकरण करने में अधिकारी विलंब नहीं कर रहे हैं। लेकिन यह भी सही है कि हजारों लोगों को सुबह का खाना शाम तक मिल रहा है। रात का खाना भी मिलने का कोई समय तय नहीं है।

वोटर नहीं, इसलिए जनप्रतिनिधि भी नहीं करते मदद
राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी जरूरतमंदों को झेलनी पड़ रही है। चुनाव के समय दूसरी पार्टी का प्रचार करने वाले परिवारों और दूसरी पार्टी के कार्यकर्ताओं की मदद करने से कतरा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से तैयार कराई गई सूंची में एेसे लोगों का नाम नहीं लिखा गया है।

चावल खत्म हो गया, बेच कर खरीदना पड़ा सब्जी और दाल
पंद्रह दिन पहले बीरगांव के एक राशन कार्डधारी महिला को १५ किलो चावल मिला था। कारण की वह एक ही सदस्य हैं परिवार में। महिला ने पांच किलो चावल अपने पास रखा और १० किलो को बेच कर दाल, तेल और साबुन लेकर आई। उसने हेल्पलाइन में चावल की मांग की। इससे साफ है कि लोगों की जरूरतें सिर्फ चावल से पूरी नहीं हो सकती।

कोरोना संकट के लिए हेल्पलाइन नंबर
- संकट में फंसे श्रमिकों के सहायतार्थ, स्टेट हेल्पलाइन
- 0771-2443809,91098-49992(श्रम विभाग)
-आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध उपलब्धता के लिए कंट्रोल रूम
0771-2882113 (खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण एवं परिवहन विभाग)

पत्नी की इलाज के लिए लिया था कर्ज, व्याज कैसे भरूं
सैकड़ों मजदूरों ने अलग-अलग काम के लिए साहूकारों से कर्ज ले रखा है। बेमेतरा निवासी दूकन राम ने हेल्पलाइन पर शिकायत की है कि उसने पत्नी की बीमारी पर कर्ज लिया था। उसका ब्याज उसे हर माह देना पड़ता है। अब लॉकडाउन में काम बंद है तो वह कैसे करेगा। इसके लिए श्रम विभाग की अलग-अलग योजनाओं से लाभ दिलाने का आश्वासन दिया गया है। बता दें कि कर्ज लेने वाले इन मजदूरों में ज्यादातर लोगों ने स्थानीय सूदखोरों से कर्ज लिया हुआ है, जबकि एक चौथाई लोगों ने बैंक से पैसा लिया हुआ है। ऐसे में लॉकडाउन के चलते आय का स्रोत खत्म होने से उनके ऊपर कर्ज का बड़ा दबाव सामने है।

Gulal Verma Desk
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