बसों के बंद होने से २० लाख यात्रियों की जिंदगी थमी

ऑपरेटरों ने कहा- राज्य सरकार से राहत का कर रहे इंतजार

By: Gulal Verma

Published: 30 Jun 2020, 05:47 PM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बसों के पहिए थमने से करीब २० लाख यात्रियों पर इसका सीधा असर पड़ा है। इसके चलते बस्तर और सरगुजा संभाग में रहने वाले ग्रामीण सर्वाधिक प्रभावित हुए हंै। काम के सिलसिले में बाहर जाने वाले गांव से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। राज्य सरकार के आदेश जारी करने के बाद रोजाना बसों के चलने का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, रोजाना हो रहे नुकसान को देखते हुए ऑपरेटर भी चौतरफा दवाब में आ गए हैं। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ व बस फेडरेशन के पदाधिकारी परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर और विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हुए हैं। बस मालिकों का कहना है कि बिना राज्य सरकार के सहयोग से वह संचालन करने की स्थिति में नहीं हंै। पिछले तीन महीनों से यात्री बसों को बंद करने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए आधी क्षमता से बसों को चलाने पर डीजल का खर्च भी नहीं निकल पाएगा। ऐसी स्थिति में जून का रोड टैक्स वे कहां से लाएंगे। वहीं, बिना बसों का संचालन किए टैक्स जमा करने की अनिवार्यता का आदेश भी हैरान करने वाला है।

जीवनरेखा थमी
राज्य के बस्तर और सरगुजा संभाग के लिए यात्री बसें जीवनरेखा मानी जाती हैं। परिवहन का कोई दूसरा साधन नहीं होने से स्थानीय ग्रामीण लाइन लगाकार बसों का इंतजार करते हैं। बचेली निवासी सोहन तोड़ेम ने बताया कि उसे पारिवारिक काम के सिलसिले में रायपुर जाना था, लेकिन पिछले तीन महीनों से बंद रहने के कारण वह बाहर नहीं पा रहा है। इसी तरह कोंटा निवासी किसुन धु्रव ने बताया कि वह बार्डर के सबसे आखिरी जिले में रहता है। उसे शासकीय कामकाज के सिलसिले में जगदलपुर और रायपुर तक आना पड़ता है। लेकिन, सारे काम रुके हुए हैं। इसी तरह सरगुजा के बलरामपुर और अंबिकापुर निवासी मनोज देवांगन और दीपेश केरकेट्टा का कहना है कि राजधानी रायपुर में खरीदारी करने और कामकाज के सिलसिले में आते थे। यहां के बाजार में सभी सामान एक साथ भी मिल जाता है।

किराया, टैक्स और वैट पर अटकी बात
यातायात महासंघ क े अध्यक्ष प्रकाश देशलहरा ने बताया कि ६ माह के रोड टैक्स माफ करने, डीजल में वैट कम करने या किराया बढ़ाने पर ही बसों का संचालन किया जाएगा। वहीं, बसों का संचालन करने पर ही टैक्स लेने (आई एवं एम फार्म) के निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है। बता दें कि प्रदेश में करीब १०००० छोटी-बड़ी यात्री बसों का संचालन किया जाता है। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए १९ मार्च को इनका संचालन बंद कर दिया गया था। वहीं, दोबारा संचालन शुरू करने के लिए अप्रैल और मई का रोड टैक्स माफ किया गया है। बस फेडरेशन के अघ्यक्ष अनवर अली ने बताया कि पिछले तीन महीनों से बसों के खड़े रहने से उनके चक्कों की हवा तक निकल गई है। चालक-परिचालकों को बैठाकर वेतन दे रहे हैं। दोबारा इसे शुरू करते ही वह लाखों रुपए का टैक्स कहां से लाएंगे। बिना शासन की मदद से बसों को शुरू करना संभव नहीं है।

Gulal Verma Desk
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