पढ़ई तुहंर दुआर पोर्टल में कंटेंट क्वालिटी सुधारने किराए के शिक्षकों पर भरोसा जता रहा शिक्षा विभाग

पोर्टल में अच्छा कंटेंट विद्यार्थियों को मिले इसलिए प्राइवेट टीचर्स से बनवा रहे वीडियो

By: Gulal Verma

Published: 20 Jul 2020, 05:50 PM IST

रायपुर। कोरोना संक्रमण काल में पढ़ई तुहंर दुआर का पोर्टल प्रारंभ कर स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नेशनल स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने नि:शुल्क पोर्टल बनाने का दावा किया और वाहवाही भी लूटी। पोर्टल में कंटेंट क्वालिटी अच्छी रहे, इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी अब प्राइवेट शिक्षकों पर भरोसा जता रहा है। विभाग में लाखों शिक्षक होने के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदार प्राइवेट शिक्षकों की मदद से पोर्टल के वीडियो-ऑडियो कंटेंट तैयार कर रहे हैं और इस एवज में भुगतान कर रहे हैं। मामले का खुलासा ना हो, इसलिए विभाग के जिम्मेदारों द्वारा पूरे मामले को गोपनीय रखा जा रहा है।

प्रति वीडियो ६०० रुपए भुगतान

नाम ना छापने की शर्त पर विभागीय अधिकारियों ने बताया, क्लासवार वीडियो-ऑडियो बनाया जा रहा है। पहली से लेकर १२वीं कक्षा तक का एक वीडियो बनाने पर शिक्षक को ६०० रुपए का भुगतान दिया जाता है। यह भुगतान पकड़ में ना आए, इसलिए विभागीय अधिकारियों ने इसे यात्रा भत्ता नाम दिया है। इस पूरी प्रक्रिया को सहायक संचालक स्तर के अधिकारी मेंटेंन कर रहे हैं। पूरे मामले में खर्च की सीधी रिपोर्ट संचालक और सचिव स्तर पर भेजी जा रही है।

इस तरह पहुंचे रहे प्राइवेट शिक्षक

प्राइवेट स्कूल के शिक्षक को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से बीआईटी ग्राउंड स्थित एससीईआरटी के कार्यालय भेजा जाता है। प्राइवेट शिक्षक यहां पर पढ़ई तुंहर दुआर पोर्टल के जिम्मेदारों से संपर्क करता है। जिम्मेदारों के आदेशानुसार शिक्षक वीडियो/ऑडियो बनाने के लिए तैयार होता है, तब नोडल स्तर पर उसे भेजा जाता है। नोडल क्लास वाइस शिक्षक को कंटेंट मुहैय्या कराता है और पूरी स्क्रिप्ट घर से लिखकर लाने के लिए कहता है। शिक्षक स्क्रिप्ट लेकर पहुंचता है, तब जुगाड़ स्टूडियों में उसका पढ़ाई हुए वीडियो/ऑडियो बनाया जाता है। वीडियो/ऑडियो को कमेटी के पास भेजा जाता है। कमेटी स्वीकृत करती है, तब वीडियो/ऑडियो पोर्टल में अपलोड किया जाता है।

अब तक बने २० हजार ४५१ वीडियो

पोर्टल के नोडल अधिकारियों ने शिक्षकों के साथ मिलकर अब तक २० हजार ४५१ वीडियो पोर्टल में अपलोड किए हैं। इनमें से १६ हजार ४०८ स्वीकृत हुए हैं। इनमें से शासकीय शिक्षक और प्राइवेट शिक्षकों द्वारा कितने-कितने वीडियो बनाय्ए गए हैं, इसका रिकार्ड विभागीय जिम्मेदारों के पास नहीं है। वीडियो बनाने का पैसा नहीं, बल्कि यात्रा भत्ता दिया जा रहा है। यह कहकर विभागीय अधिकारी अपनी गर्दन बचा रहे हैं।


पढ़ई तुहंर पोर्टल के लिए वीडियो/ऑडियो बनाने के लिए शिक्षकों को प्रति वीडियो ६०० रुपए दिया जा रहा है। शिक्षक प्राइवेट हो या शासकीय वो शिक्षक ही रहता है। हम शिक्षकों में भेदभाव नहीं करते है। विद्यार्थियों को अच्छा कंटेंट मिले, इसलिए यह व्यवस्था की गई है। विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा मिल सके, इसलिए इस व्यवस्था को सकरात्मक रूप में लेना चाहिए।

जितेंद्र शुक्ला, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

Gulal Verma Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned