मैनपुर क्षेत्र के नदी-नालों में पुल का निर्माण नहीं

गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में होती है परेशानी

By: Gulal Verma

Published: 16 Oct 2020, 04:28 PM IST

मैनपुर। गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र में आज भी आजादी के सात दशक बाद नदी- नालों में पुल निर्माण नहीं होने के कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर बारिश के चार माह आना-जाना करना पड़ता है। खासकर राशन ले जाने के लिए ग्रामीण उफनते नदी को कई बार पार करते हंै। वहीं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा के अभाव के चलते गर्भवती महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पडता है। गर्भवती महिलाओं को नदी पार कर अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है। डिलीवरी के बाद भी जच्चा-बच्चा को नदी पार कर घर तक ले जाना पड़ता है।
ग्राम साहेबिनकछार निवासी हेमेन्दी बाई पति खुलेश्वर यादव (20) को गोडेना नदी पैदल पार कराकर परिजन देवभोग अस्पताल ले गए और सुरक्षित प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा को फिर नदी पार कराकर घर लाया गय। यहा कोई पहला मामला नहंी है। इस तरह की मामला इस क्षेत्र के दर्जनों ग्रामो में हर वर्ष बारिश के दिनो में देखने को मिलता है। क्योंकि, टाइगर रिजर्व के अंदर बसे कई ग्राम, पारा, टोला तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क का निर्माण नहीं किया गया है। नदी-नालो में पुल नहीं है। जिसके कारण बारिश के दिनो में भारी दिक्कतों का सामना करना पडता है।
क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि
जिला पंचायत सभापति लोकेश्वरी नेताम ने बताया कि मैनपुर विकासखण्ड क्षेत्र के अधिकांश जंगलों के अंदर बसे ग्रामों में नदी-नालों में पुल निर्माण नहीं होने के कारण बारिश के दिनो में गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विषम परिस्थिति में परिजन व ग्रामीण गर्भवती महिलाओं को कांवर में बिठाकर नदी पार कर अस्पताल तक लाते हैं। कई बार पुल- पुलिया निर्माण की मांग की जा चुकी है।

Gulal Verma Desk
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