औषधीयगुणों से भरपूर है लेमन ग्रास

कई बीमारियों की रोकथाम के लिए है कारगर

By: Gulal Verma

Updated: 12 Nov 2020, 05:12 PM IST

सेल। लेमन ग्रास की महक से न सिर्फ मच्छरों को पनपने से रोका जा सकता है, बल्कि कई बीमारियों की रोकथाम के लिए यह औषधि के रूप में काफी उपयोगी होने के साथ ही यह प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी बेहद कारगर माना गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. रंजीपकुमार दास ने बताया, लेमन ग्रास प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी कारगर है। शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स और टाक्सिस को यह बाहर निकाल देता है, जिससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लेमन ग्रास में एल्फा पिनाइन और बीटा पिनाइन नाम के रासायनिक तत्व मिलते हैंं, जो विटामिन ए बनाने के लिए काम आते हैं।
डॉ. दास का कहना है कि लेमन ग्रास पेट में दर्द, उच्च रक्तचाप, उल्टी, गठिया वाय, बुखार, खांसी आदि में भी बहुत लाभकारी होता है। इसकी चाय से चिंता और घबराहट दूर करता है। कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। वहीं, शरीर में रेड ब्लड सेल को बढ़ाता है। लेमन ग्रास में मौजूद औषधीय गुण कई बीमारियों जैसे सिरदर्द, सर्दी, बुखार आदि के संक्रमण से बचाने में मदद कर सकते है। लेमनग्रास एनिमिया को दूर करने मे भी उपयोगी होता है। इसके नियमित सेवन से शरीर में आयरन की कमी को पूरा किया जा सकता है। चाय में इस्तेमाल करने पर बुखार, कफ और सर्दी में फायदा करता है।

लेमन आइल से मच्छरों से मिलेगा छुटकारा
बरसात के मौसम के बाद कई प्रकार की बीमारियां पनपने लगती हैं। जिनमें डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया और मलेरिया प्रमुख हैं। ये बीमारियां मच्छरों के काटने से फैलती हैं। इन मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए औषधीयगुणों से युक्त लेमन ग्रास का तेल काफी फायदेमंद होता है। घरों में बने शौचालय व नालियों के गंदे पानी में मच्छर सबसे ज्यादा पनपते हैं। इसके लिए लेमन ग्रास में पाई जाने वाली अधिक खुशबू रासायनिक तत्व सिट्रेल-ए और सिट्रेल-बी से आती है।

किसान भी हो रहे लाभान्वित
बलौदाबाजार वनमंडल डीएफओ आलोक तिवारी ने बताया, अर्जुनी परिक्षेत्र के अतंर्गत ग्राम बिलारी में 25 एकड़ में किसान लेमन ग्राम की खेती सामूहिक रुप से कर रहे हैं। इससे किसान अब ज्यादा आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। वन विभाग की ओर से स्थापित आसवन प्लांट से गांव के किसान लेमन ग्रास से तेल निकाल रहे हैंं। लेमन ग्रास की खेती करने वाले किसान वर्ष में चार बार पत्तियों की कटाई कर तेल निकाल कर बाजार में बेच सकते हैं। आसवन विधि से निकाले गए तेल का उपयोग कीटनाशक, औषधि, हर्बल, साबुन, तेल, क्रीम, सेनिटाइजर, फिनाइल, दीपक जलाने, मच्छर भगाने की दवाइयां बनाने में किया जाता है।

Gulal Verma Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned