दीपावली पर पितरों की पूजा से आएगी घर में सुख-शांति

यमराज की पूजा करने की भी है परंपरा: पं. धनंजय

By: Gulal Verma

Published: 13 Nov 2020, 05:03 PM IST

खरोरा। शुक्रवार से पांच दिवसीय दीपावली पर्व शुरू हो रहा है। आमतौर पर इस पर्व में देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। लेकिन, इन्हीं दिनों में यमराज का पूजन करने की परंपरा है। खरोरा के ज्योतिषाचार्य पंडित धनंजय शर्मा के अनुसार दीपावली यानी कार्तिक मास की अमावस्या पर लक्ष्मीजी के अलावा यमराज और पितर देवताओं के लिए शुभ कर्म करना चाहिए। अमावस्या तिथि के स्वामी यमराज माने गए हैं और इस दिन घर के पितर देवताओं के लिए धूप ध्यान करने से करने का विशेष महत्व है।
पं. धनंजय शर्मा के अनुसार धनतेरस शुक्रवार की शाम दक्षिण दिशा की ओर यमराज का ध्यान करते हुए दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से अकाल मृत्यु टलती है। रूप चौदस को यमराज का पूजन करने से जाने अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल से मुक्ति मिल जाती है। शनिवार को लक्ष्मीजी की पूजा करने के बाद पितरों की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर सूर्य चंद्र तुला राशि में रहते हैं। सूर्य तुला राशि में नीच का होने के से दक्षिण गोलार्ध में झुका हुआ रहता है। दक्षिण दिशा का स्वामी यमराज है, इसलिए अमावस्या पर यह पूजा का विशेष महत्व है। पंडित शर्मा ने बताया कि प्राचीनकाल में समुद्र मंथन के समय इसी दिन लक्ष्मीजी प्रकट हुई थी, इसलिए इस दिन लक्ष्मीजी का पूजन किया जाता है। श्रीराम इसी दिन रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौट कर आए थे, इसलिए दीपावली मनाई जाती है। ऐसी कई कथा इस पर्व के संबंध में प्रसिद्ध है। दीपावली के दिनों में गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है। भगवान श्री कृष्ण द्वारा द्वापर युग में दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पर्वत का पूजन प्रारंभ करवाया था।

Gulal Verma Desk
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