आंखी म नवा सपना बसावव

बिचार

By: Gulal Verma

Published: 25 Jan 2021, 04:48 PM IST

छब्बीस जनवरी अउ पंदरा अगस्त ह हमर देस के बड़े तिहार ए। सबला देस के हालत, तरक्की के बारे म सोचे के मौका मिलथे ये दूनों तिहार म। तभे तो एकझन कवि ह लिखे हे-
‘काकर हे जनवरी, काकर अगस्त हे, ईमानदार हलाकान, बेईमान मस्त हे।’
देस म गजब तरक्की होवत हे ये कहे जाथे। इंजीनियर लइकामन चपरासी बने बर लाइन म खड़े हें, किसानमन हलाकान हें, आदिवासी गुसियाय हें, तब सोचे बर परथे के, ये तरक्की म अउ का कमी हे। कहां डबरा हे, कहा डिपरा हे। सबला तरक्की के सडक़ म छाती तान के चले के मौका मिलही तभे वोला सोला आना तरक्की माने जाही।
छत्तीसगढ़ म साक्षरता अभियान ल सफलता छत्तीसगढ़ी भासा म अभियान चलाय से मिलिस। हमर छत्तीसगढ़ परदेस म छत्तीसगढ़ी भासा के महत्तम ल सिद्ध करके अउ लागू करके सरकार ह वाजिब बिकास के योजना बनाही तभे जन-जन तक वोकर जानकारी सही ढंग ले पहुंच पाही। बिन भासा सब सून। अभी परसासन के छेत्र म छत्तीसगढ़ मुक्का हे। सुनथे-समझथे फेर अपन भासा म बोले के चलन सुरू नइ करे ए। खाली चुनई के बखत छत्तीसगढ़ी ल सुरता करब म बात नइ बन सकय। पराथमिक पढ़ई छत्तीसगढ़ी म जरूरी हे।
सरकार के बड़े-बड़े पद म बइठे अधिकारीमन सरकार के पुरजा बनके काम करथें। मसीन बदल जथे पुरजा जुन्ना रहिथे। तेकर सेती भासात संस्करीति अउ जेन बूता म नफा नइ होय तउन बूता ला करे म पुरजामन ल कोनो लगाव नइ राहय। सरकार के चाल, चरित्र, सोच- बिचार, भासा अउसंस्करीति के बारे म करे जाने वाला काम अउ संकल्प से पता चलथे।
देस म हिंदी के कुछ अइसे पत्रिका निकलत रहिस जेमा छपके लेखकमन के पहिचान बनिस। धर्मयुग, अउ हिन्दुस्तान जइसन पत्रिका जरूरी हे। छत्तीसगढ़ी म अइसन एकठन पत्रिका निकल पाही त छत्तीसगढ़ के लिखइया-पढ़इयामन ल ठोस मंच मिलही अउ सरकार के मंसा ल जन-जन जानहीं। अभी बिलासपुर ले लोकाक्षर ह अकेल्ला बड़े काम करत हे। छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर ह बीस बछर म बीसो नामी लेखक बनाके देखा दे हे। वोकर परंपरा ल मजबूत करई जरूरी हे ।
मध्यपरदेस ह हिंदी भासी राज्य रहिस। उहां हिंदी साहित्य सम्मेलन ह बहुत बड़े-बड़े काम करिस। हिंदी साहित्य ल मजबूत करिस। तप करइया लेखकमन ल सम्मान दिस। छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी साहित्य सम्मेलन जइसे लेखकमन के मंच के जरूरत हे ।
छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी के बात नइ बनही त देस म छत्तीसगढ़ी के पुछारी अउ कहां होही?छत्तीसगढ़ के नवा-नेवरिया लेखकमन बर चार-पांच दिन के सिविर अलग-अलग विधा ऊपर बछरभर चले बर चाही। सियनहा लिखइयामन के अनभो ल नवा लइकामन पाहीं अउ आगू चलके बड़े काम करहीं। छत्तीसगढ़ राज ल बने 20 बछर होगे। सडक़, बांध, कारखाना लगातार बनत गिस, फेर हड़बड़ी म जउन पइन तउन मरत ले खइन। गायमन भूख म धंधाय मरगें। गाय के सेवा करे के नौटंकी करइयामन घर भर लीन। जनता ह हाथ बांधे तमासा ला देखथे अउ सरकार के कामकाज ल भीतरे-भीतर जांचत रहिथे।
छत्तीसगढ़ ह आदिवासी, पिछड़ा, दलितमन के परदेस ए। कुछ बदनामी हमर छत्तीसगढ़ के नक्सलीमन के सेती होथे अउ बांचे-खोंचे म सराकरमन के करम-कमई के सेती घलो बात बिगड़ जथे। भंजदेव ल गोली मारे के कलंक आजो ले पीछा करथे। ‘कुछ करनी, कुछ करमगती, कुछ पुरबल के भाग’ ये कहावत ह छत्तीसगढ़ म गजब चलथे।
पहलीच ले आदिवासीमन रिसाय बइठे रहिस अब कोचक के अउ घाव नइ करे बर चाही सरकार ल। लोहिया जी ह कहे हे - जियत कौम ह पांच बछर इन्तजार नइ करे सकय। सबला जल्दी अपन भाग मिले बर चाही तभे बिकास के बात करई ह सबला सुहाही।
आगी लगे के पहली सावचेत हो जतिन त जंगल म नक्सली रूपी आगी काबर धधकतिस। अतेक दुख हे तभो ले आसा नइ टूटय। असोक बंजारा जइसे कविमन के आसा वाला नवा परंपरा हे। जेमा हड़बड़ी नइ करके नसीहत हे।
‘आंखी म नवा सपना बसा के रखव,
अपन घर ल घर तो बना के रखव ।
बड़ दुरिहा हे कई कोस हे रेंगना,
गोड़ ला फेर अपना थिरका
के रखव।’

Gulal Verma Desk
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