बलौदा बाजार जिले में कोरोना संक्रमण से अब तक 150 लोगों की हो चुकी है मौत

लोगों की लापरवाही है कि थमती नहीं, प्रशासन भी उदासीन नजर आ रहा

By: Gulal Verma

Published: 05 Feb 2021, 04:42 PM IST

बलौदा बाजार। ‘हाथी निकल गया, पूंछ रह गई’ कहावत कोरोना के मामले में जिले में चरित्रार्थ हो रहा है। जिले में कोरोना संक्रमण को लेकर शुरुआती अगस्त-सितंबर तक जिला प्रशासन तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जितनी तेजी दिखाई जा रही थी, वह तेजी बीते सितंबर के बाद से ही लगभग पूरे जिले में ही थमती हुई नजर आ रही है। जिसका परिणाम है कि जिला प्रशासन जहां अपने ही बनाए गए नियमों का पालन कराने में एक ओर पूरी तरह से विफल होता हुआ नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर आमजनों में भी कोरोना संक्रमण को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। नगर में सार्वजनिक चौक-चौराहों से लेकर शासकीय कार्यालयों को देखकर लगता ही नहीं की कभी किसी को कोरोना संक्रमण का डर है। वहीं, लोगों की लापरवाही के बीच जिले में कोरोना संक्रमण की वजह से मृतकों का आंकड़ा बुधवार 3 फरवरी को 150 पहुंच गया है।
विदित हो कि बीते पखवाड़ेभर के दौरान जिले में कोरोना संक्रमण की वजह से पांच लोगों की मौत हो चुकी है तथा बुधवार 3 फरवरी तक जिले में कोरोना संक्रमण की वजह से होने वाली मौत का आंकड़ा बढक़र 150 तक पहुंच गया है। बावजूद इसके जिला मुख्यालय से लेकर जिले के अन्य इलाकों में आमजनों से लेकर अधिकारियों तक कोरोना संक्रमण से बचाव के नियमों को जानबूझकर भूलने लगे हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर जिलेवासियों को नियमों का पालन कराना, लापरवाहों पर कार्रवाई करने का जिम्मा जिला प्रशासन का है, परंतु ऐसा नजर आता है कि जिले में कोरोना से लड़ते-लड़ते अब जिला प्रशासन की सांसे भी फूलने लगी हैं। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि अब जिला प्रशासन अपने ही बनाए गए नियमों का पालन कराने में फेल होता हुआ नजर आ रहा है। नगर समेत पूरे जिले में प्रतिदिन बगैर मास्क पहने बड़ी संख्या में लोगों को बेपरवाह रूप से घूमते हुए देखा जा सकता है जिनके खिलाफ कार्रवाई तो दूर इनसे सामान्य पूछताछ तक नहीं हो रही है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान जिला प्रशासन के द्वारा प्रारंभ किए गए कई प्रयोग भी अब बीते कई दिनों से बंद हो चुके हैं जिनकी पूरे जिले में चर्चा है।
पखवाड़ेभर के दौरान पांच मौतें
जिले में बीते पखवाड़ेभर के दौरान पांच लोगों की कोरोना संक्रमण की वजह से मौत हो चुकी है। इसमें 21 जनवरी को एक मृत्यु, 27 जनवरी को सिमगा ब्लाक के 63 वर्षीय पुरुष की मृत्यु, 28 जनवरी को सिमगा ब्लाक की 72 वर्षीया महिला की मृत्यु, 30 जनवरी को सिमगा ब्लाक के 50 वर्षीय पुरुष की मृत्यु तथा 3 फरवरी को सिमगा ब्लाक के 35 वर्षीय पुरुष की मृत्यु को मिलाकर जिले में मृतकों का आंकड़ा 150 हो गया है। कोरोना को लेकर अधिकारियों से लेकर आमजनों तक द्वारा की जा रही लापरवाही जिले में वैक्सीनेशन प्रारंभ होने के बाद और अधिक बढ़ गई है।
कहीं नियमों की परवाह नहीं
जिला मुख्यालय से लेकर जिले में बीते दिनों राजनीतिक धरना, प्रदर्शन, सभाएं हो चुकी हैं, जिसमें सैकड़ो लोग जुटे हैं। परंतु ना तो इन राजनीतिक कार्यक्रमों में सोशल डिस्टेंसिंग नजर आती है और ना ही मास्क का उपयोग नजर आता है। इसी प्रकार जिला मुख्यालय में ही सामाजिक, धार्मिक, पारिवारिक कार्य्क्रम, डीजे बैंड का प्रयोग से लेकर अन्य कार्यक्रम खुलेआम हो रहे हैं। जिसमें सैकड़ो लोग जुट रहे हैं, जो खतरनाक साबित हो रहा है।
ज्यादातर एटीएम के सेनिटाइजर खाली
मार्च-अप्रैल में नगर के शासकीय तथा निजी बैंकों के एटीएम में सेनिटाइजर की व्यवस्था की गई थी, ताकि कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए एटीएम का प्रयोग करने के पूर्व तथा बाद ग्राहक सेनिटाइजर का उपयोग कर सकें। परंतु, बीते कई दिनों से जिला मुख्यालय समेत समूचे जिले के अधिकांश एटीएम में सेनिटाइजर की शीशी खाली पड़ी है।

शासकीय कार्यालयों में ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं
जिला प्रशासन द्वारा जिलेवासियों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कड़े निर्देश जरूर जारी किए गए हैं, परंतु नगर के कई शासकीय कार्यालयों में ही सोशल डिस्टेंसिंग के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। मंगलवार को नगर के आरटीओ कार्यालय में लायसेंस बनवाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदक पहुंचे, जहां देखते ही देखते सौ फीट तक आवेदकों की लंबी कतार लग गई। हैरत की बात है कि अधिकांश आवेदकों ने मास्क का उपयोग नहीं किया था। बावजूद इनको रोकने-टोकने के लिए किसी विभागीय कर्मचारी को फुरसत नहीं थी।

हाथ धोने के लिए लगाई गई पानी टंकी में पानी नहीं
नगर पालिका परिषद द्वारा कोरोना संक्रमण को रोकने तथा नगरवासियों को हाथ धोने के लिए जागरूक करने के लिए नगर के विभिन्न चौक-चौराहों में आमजनों के हाथ धोने के लिए पानी टंकी, वाश बेसिन का इंतजाम किया गया था। शुरुआती दो-तीन माह नगर पालिका द्वारा इन पानी टंकियों में नियमित रूप से पानी भी भरा जाता था, जिसका नगरवासियों द्वारा उपयोग भी किया जाता था। परंतु बीते कई दिनों से नगर पालिका द्वारा लगाई गई अधिकांश पानी टंकियों में पानी ही नहीं हैं, जिसकी वजह से लाखों रुपयों की पानी टंकियां नगर में केवल शोपीस बनकर रह गई हैं।
सेनिटाइजर टनल भी खाली
जिला अस्पताल समेत कई शासकीय कार्यालयों में तामझाम के साथ सेनिटाइजर टनल प्रारंभ किया गया था। सेनिटाइजर टनल प्रारंभ होने पर जन संपर्क विभाग तथा सोशल मीडिया के माध्यम से संबंधित विभागों द्वारा बाकायदा इसका जमकर प्रचार-प्रसार भी किया गया था। सेनिटाइजर टनल से गुजरने पर सेनिटाइजर का स्प्रे होता था, जिससे इस सेनिटाइजर टनल से गुजरने वाला स्वयं को सुरक्षित महसूस करता था। परंतु वर्तमान स्थिति यह हो गई है कि जिला अस्पताल समेत शासकीय कार्यालयों के सेनिटाइजर टनल खाली पड़े हैं।

Gulal Verma Desk
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