किसान विरोधी कृषि कानून के लिए कांग्रेसियों ने केंद्र सरकार को जमकर कोसा

समर्थन मूल्य व मंडी प्रथा हो जाएगी खत्म, पूंजीपतियों को मिलेगा लाभ : प्रभाकर

By: Gulal Verma

Published: 12 Feb 2021, 04:50 PM IST

बलौदा बाजार। प्रदेश कांग्रेस कमेटी व जिला कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार ब्लॉक शहर व ग्रामीण कांग्रेस कमेटी बलौदा बाजार के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय गार्डन चौक पर केंद्र के तीन कृषि काले कानून के विरोध स्वरूप किसान सम्मेलन व प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कृषि कानून के लिए केंद्र सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने तीनों कृषि कानून को किसानों के अहित में बताया हुए वापस लेने की मांग की। वहीं, इस किसान सम्मेलन में कोकड़ी, रिसदा, संकरी, कंजी, लटुवा, झोंका, पारागांव, खजुरी, मोहतरा, रसेड़ी, रसेड़ा, सोनाडीह व केसडबरी से बड़ी संख्या में किसान उपस्थित हुए। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षद्वय विक्रम गिरी व रूपेश सिंह ठाकुर द्वारा सभी किसानों को किसान गमछा भेंटकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में सुरेंद्र शर्मा अध्यक्ष कृषक कल्याण परिषद, जनकराम वर्मा पूर्व विधायक, जिला अध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर, राकेश वर्मा अध्यक्ष जिला पंचायत, दिनेश यदु, परमेश्वर यदु, सीमा वर्मा महामंत्री प्रदेश कांग्रेस, राकेश वैष्णव, प्रभारी द्वय शैली भाटिया व गोपी साहू, तुलसी वर्मा पूर्व ब्लाक अध्यक्ष, प्रभाकर मिश्रा, संतोष तिवारी, मोती वर्मा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पद्मेश्वरी साहू, प्रेमलता बंजारे, प्रेमलता वर्मा, लक्ष्मी पांडेय आदि मंच पर उपस्थित रहे।
किसान सम्मेलन में प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यह तीन कानून किसानों के हित में नहीं है। इस कानून से समर्थन मूल्य, मंडी प्रथा खत्म व कालाबाजारी-जमाखोरी की प्रथा प्रारंभ हो जाएगी और पूंजी पतियों को इसका पूरा लाभ मिलेगा। किसान अपने ही उपज को अधिक दामों में खरीदने के लिए विवश हो जाएगा।
जिलाध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि संसद में मोदीजी घडिय़ाली आंसू बहा रहे हैं और कांग्रेसियों को आंदोलनजीवी बता रहे हैं। उन्हें पता नहीं इस देश को आजादी आंदोलन से ही मिली है। मोदीजी को रोना है तो वह पुलवामा और बलवान घाटी में हुए सैनिकों की शहादत पर रोते, दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन करने वाले 210 किसानों की शहादत पर रोते। कोरोनाकाल के वक्त सैकड़ों मजदूरों के मरने पर रोते। लेकिन, उन्हें इनकी फिक्र नहीं है। उन्हें फिक्र है तो अडानी और अंबानी की। उन्होंने कहा कि जैसे ही राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने वादे के अनुरूप सबसे पहले ऋण माफ किया और 2500 के समर्थन मूल्य में प्रत्येक किसान का धान खरीदने का कार्य किया। लेकिन, केंद्र के विरोध के कारण राजीव गांधी न्याय योजना के माध्यम से चार किस्तों में अंतर की राशि को देने का निश्चय किया। तीन किस्त दी जा चुकी है और अंतिम किस्त अगले माह सभी के खातों में डाल दी जाएगी।
कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मोदीजी संसद में कर्णप्रिय आवाज में कहते हैं कि यह कानून 3 महीनों से लागू हो चुका है। किसी को अब तक कोई फर्क नहीं पड़ा, केवल चार पांच राज्यों के किसान आंदोलन पर बैठे हैं। इसका मतलब यह नहीं कि इस काले कानून से छत्तीसगढ़ के किसानों को कोई नुकसान नहीं है। क्योंकि, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल की सरकार है जो किसानों का धान 2500 प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है। प्रति एकड़ 10000 रुपए का मूल्य प्रदान करने वाली यह पूरे देश की इकलौती सरकार है।
सुशील शर्मा, संदीप पांडे, पदमेश्वरी साहू, सुखदेव साहू, जनपद सदस्य आर्यन शुक्ला, केके वर्मा, कार्यक्रम के प्रभारी सिमगा के शैली भाटिया व गोपी साहू ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने केंद्र के तीन काले कृषि कानून का पुरजोर विरोध करते हुए किसानों से इस आंदोलन का समर्थन करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर पार्षदगण गोविंद पात्रे, गौतम ठेठवार, क्रांति दिगंबर साहू, रविंद्र डिगेश्वरी नामदेव, एल्डरमैन गंभीर सिंह ठाकुर, हेमचंद केसरवानी, मनोज प्रजापति, अंबु पंजवानी, सुखदेव साहू, देवेंद्र बंजारे, लखेश साहू, मोती वर्मा, रामकुमार छल्ला साहू, कुलेश्वर यदु, टिकेश्वर साहू, अंजुल तिवारी, अविनाश मिश्रा, शारदा सोनी, मनीष चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में किसान व कांग्रेसजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन ब्लाक शहर कांग्रेस अध्यक्ष रूपेश ठाकुर व आभार ग्रामीण अध्यक्ष विक्रम गिरी द्वारा किया गया। इसके बाद समस्त कांग्रेसजन व किसानों द्वारा दिल्ली के सिंधू बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान लगभग 210 किसानों की शहादत पर उन्हें श्रद्धांजलि प्रदान करते हुए 2 मिनट का मौन रखा गया।

Gulal Verma Desk
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