समितियों में करोड़ों रुपयों का जाम धान बारदाने फटने से हो रहा खराब

समर्थन मूल्य पर खरीदे धान का परिवहन नहीं होने का साइट इफैक्ट

By: Gulal Verma

Published: 03 Mar 2021, 05:02 PM IST

बलौदा बाजार। जिले में इस वर्ष किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद भी शासन द्वारा समितियों से धान का परिवहन ना कराए जाने का दुष्परिणाम अब समितियों में नजर आने लगा है। जिले की समितियों में 18 लाख क्विंटल से अधिक धान को प्लास्टिक के बारदानों में रखा गया है, परंतु मौसम की मार ना सह पाने की वजह से अब ज्यादातर प्लास्टिक के बारदाने फटने लगे हैं, जिसकी वजह से धान नीचे गिरकर खराब हो रहा है। समय रहते यदि इस धान का परिवहन या सुरक्षित रखने का इंतजाम ना कराया गया तो यह सीधे-सीधे समितियों के लिए भारी पड़ेगा तथा धान का नुकसान भरने के फेर में इस वर्ष अधिकांश समितियां सडक़ पर आ जाएंगी।
विदित हो कि राज्य शासन द्वारा किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीफ धान की खरीदी की जा रही है जो इस वर्ष 30 जनवरी को बंद हो चुकी है। 30 जनवरी को जिले में धान की खरीदी बंद होने के बाद भी आज तक उपार्जन केन्द्रों से धान का परिवहन नहीं किया गया है जिसकी वजह से जिले के उपार्जन केन्द्रों में बंपर मात्रा में धान जाम है। जिले की समितियों में रखे धान के बोरों में अब बीते दिनों हुई बारिश तथा वर्तमान की तेज धूप का असर नजर आ रहा है। समितियों में विपणन संघ द्वारा धान को रखने के लिए प्रदान किए गए प्लास्टिक के बारदाने अब फटने लगे हैं जिसकी वजह से धान फड़ में नीचे गिरकर खराब हो रहा है। जिले के 173 उपार्जन केन्द्रों में वर्तमान में लगभग 18 लाख क्विंटल धान केवल प्लास्टिक के बारदानों में रखा गया है परंतु स्टेकिंग किए दो माह के भीतर ही प्लास्टिक के बारदाने मौसम की मार ना झेल पाने की वजह से सडऩे लगे हैं। जानकारों के अनुसार प्लास्टिक के बारदाने तेज धूप में जल्दी फटते हैं। बीते दिनों हुई बारिश के बाद वर्तमान में भीषण गर्मी तथा तेज धूप की वजह से अधिकांश उपार्जन केन्द्रों में रखे प्लास्टिक के बारदाने खराब हो रहे हैं तथा धान फड़ में गिरकर फैल रहा है। धान को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी समिति की है परंतु इस वर्ष परिवहन ना होने की वजह से धान की बंपर मात्रा को सुरक्षित रखना समितियों के लिए भारी पड़ रहा है।
समितियों को होगा तगड़ा नुकसान
जानकारी के अनुसार परिवहन ना होने की वजह से समितियों के लिए इस वर्ष धान को सुरक्षित रखना बेहद चुनौती भरा हो गया है। प्लास्टिक के बारदाने में रखे धान के खराब होकर फटने की वजह से पुनरू धान की भराई, तौलाई एवं हमाली में समितियों को अतिरिक्त व्यय करना पड़ेगा। परिवहन ना होने की वजह तथा वर्षा की वजह से खराब होने के साथ ही साथ मवेशियों, चूहों, सूखत की वजह से भी धान की मात्रा में भी कमी आएगी जिससे समितियों को हानि होना तय माना जा रहा है। समितियों में रखे धान की पूर्व की मात्रा में कमी आने पर शासन के नियमानुसार वसूली संबंधित समितियों से ही की जाती है जिसकी वजह से जल्द से जल्द यदि धान का परिवहन ना किया गया तो इस वर्ष कई समितियां नुकसान ना सह पाने की वजह से सडक़ पर आ जाएंगी।
कितना धान जाम है
जिले के अधिकांश उपार्जन केन्द्रों में दो माह से अधिक समय से धान का परिवहन बंद है जिसकी वजह से सभी उपार्जन केन्द्रों में धान का बंपर स्टॉक जाम है। धान के स्टॉक की तुलना में पर्याप्त मात्रा में कैप कवर नहीं है, जिसकी वजह से किसानों से खरीदे गए धान खुले में ही रखे हुए हैं। जिले में इस वर्ष 161221 कृषकों से 12157413100 लाख रुपयों के कुल 6694044 क्विंटल धान की खरीदी की गई है। शासन की धान खरीदी योजना को पूर्ण हुए 1 माह से अधिक समय पूर्ण हो चुका है बावजूद इसके संबंधित विभागीय अधिकारी परिवहन को लेकर गंभीर नहीं हैं जिसकी वजह से जिले में मात्र 56 प्रतिशत धान का ही परिवहन हुआ है तथा अब तक महज 3750703 क्विंटल धान का ही परिवहन किया गया है तथा वर्तमान में 2943340 क्विंंटल धान परिवहन के अभाव में समितियों में जाम है जिसमें से लगभग 18 लाख क्विंंटल धान केवल विपणन संघ से प्राप्त प्लास्टिक के बारदानों में रखा हुआ है जो अब बारदानों के फटकर गिरने से खराब हो रहा है।

Gulal Verma Desk
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