पहुंचा गंगरेल जलाशय का पानी, तालाब भरने का काम शुरू

ग्रीष्मकाल में निस्तारी पानी की समस्या से मिलेगी निजात

By: Gulal Verma

Published: 07 Apr 2021, 04:38 PM IST

बलौदा बाजार। ग्रीष्मकाल के मौसम के आगमन के साथ ही जिले के तालाबों में निस्तारी के लिए जल भरने का काम शुरू हो चुका है। इस क्रम में गंगरेल जलाशय से छोड़ा गया पानी बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में बीबीसी केनाल के जरिए पहुंच गया है। गौरतलब है कि निस्तारी उपयोग के लिए हर वर्ष जिले की चुनिंदे तालाबों में जल भराव किया जाता है। जिले के कुल 260 ग्रामों के 485 तालाबों को हर वर्ष की तरह इस साल भी पानी से भरने का लक्ष्य रखा गया है। तालाबों के भरे जाने से एक ओर जहां ग्रामीण इलाकों की निस्तारी समस्या का समाधान हो रहा है, वहीं आगामी अप्रैल-मई माह के लिए भूजल स्तर को रिचार्ज होने में बड़ी मदद मिल रही है।
विदित हो कि ग्रीष्मकाल में जिले के जलाशयों तथा तालाबों को भरे जाने के लिए गंगरेल जलाशय से पानी छोड़ा गया है। जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बलौदा बाजार नहर में निस्तारी के लिए वर्तमान में 700 क्यूसेक जल प्रवाह 20 मार्च को छोड़ा गया है तथा जिले में लगभग 25-26 मार्च को पानी पहुंच गया है। छोड़ा गया जल प्रवाह 10-11 अप्रैल तक चलेगा। जल संसाधन विभाग के प्रभारी ईई एनके पाण्डेय ने बताया कि बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के 260 ग्रामों के 485 तालाबों को भरे जाने का लक्ष्य है तथा जिन तालाबों में मनरेगा के तहत वर्तमान में कार्य प्रारंभ है तथा जिन तालाबों में पर्याप्त पानी है उन तालाबों को नहीं भरा जाएगा। मंगलवार तक की स्थिति में जिले के 263 तालाबों को भर लिया गया है तथा 217 तालाबों को भरा जा रहा है। पाण्डेय ने कहा कि पानी बहुत मूल्यवान है, तालाबों तक नहरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। खेतों में भरते हुए पानी आगे ले जाने से पानी की बहुत बर्बादी होती है, किसी भी सूरत में पानी की बर्बादी नहीं होनी चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
चिन्नास्वामी तथा धोबी तालाब में पानी पहुंचा
गंगरेल से छोड़े गए पानी से नगर के चिन्नास्वामी तालाब को भरा जाने लगा है। नगर पालिका द्वारा नगर के सबसे बड़े तालाब रामसागर तालाब की भी सफाई कराई गई है, जिसके बाद रामसागर तालाब को भी भरे जाने का रास्ता साफ हो गया है। छुईहा जलाशय की नहर के माध्यम से नगर के धोबी तालाब को भी भरा जाना प्रारंभ हो गया है। नगर के तालाबों को भरे जाने से एक ओर जहां आगामी ग्रीष्मकाल में लोगों को निस्तारी की समस्या से निजात मिलेगी। वहीं, तालाबों में पर्याप्त पानी होने से नहरों तथा तालाबों के आसपास के इलाकों का भूजल स्तर भी रिचार्ज हो गया है।

Gulal Verma Desk
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