सोनेसिल्ली में प्रशासन ने 116 एकड़ शासकीय भूमि से हटाया कब्जा

मुलाकात नहीं होने पर विधायक के खिलाफ लगाए नारे

By: Gulal Verma

Updated: 09 Jun 2021, 04:01 PM IST

नवापारा राजिम। नगर के समीप कुर्रा सोनेसिल्ली मार्ग पर स्थित ग्राम की सीमा के समीप लगभग 116 एकड़ शासकीय भूमि पर विगत कई वर्षों से वहां के किसान काबिज थे और खेती कर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे थे । इस वर्ष भी उन्होंने खरीफ फसल लेने की तैयारी में खेत की जोताई कर ली थी। लेकिन सोमवार को अचानक राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम दो जेसीबी लेकर मौके पर पहुंच गई। इसकी जानकारी मिलते ही संबंधित कब्जाधारी अपने परिवार सहित मौके पर पहुंच गए और बिना किसी नोटिस के अतिक्रमण हटाने की बात पर अधिकारियों से विवाद करने लगे।
एसडीएम निर्भय साहू ने कब्जाधारियों से कहा कि अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई नियमत: की जा रही है और इसमें किसी प्रकार का बाधक न बने, लेकिन कुछ कब्जाधारी इसके बाद भी हंगामा करते रहे। यह देख पुलिस ने 2 महिला और 4 पुरुष को पकडक़र थाने ले गई, जिन्हें कुछ घंटों के बाद वापिस उनके घर छोड़ दिया गया। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निर्बाध रूप से चलती रही। इस दौरान दोनों जेसीबी द्वारा सडक़ के दोनों पार स्थित अतिक्रमित भूमि के मेड़ को हटाकर अतिक्रमण मुक्त किया गया।
शासकीय भूमि से किया जाएगा बेदखल : केके साहू
इधर तहसीलदार केके साहू ने कहा कि सोनेसिल्ली में विकास कार्यों के लिए जमीन की कमी थी। अतिक्रमण पूरे नियमानुसार हटाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले काफी वर्षों से लोग काबिज थे, किसी की निगाह इन पर क्यों नहीं पड़ी, यह समझ से परे है। उक्त भूमि पर कुछ ऐसे लोग भी काबिज हैं, जिनके अन्यत्र स्थान पर 15 से 25 एकड़ भूमि है। विकास कार्य के लिए शासकीय जमीनों का अधिग्रहण आवश्यक है।
नाराज ग्रामीण पहुंचे विधायक निवास
सोनेसिल्ली के ग्रामीणों द्वारा विधायक के निवास स्थान पैतृक ग्राम तोरला पहुंचे। कर्मचारी द्वारा सभी ग्रामीणों को चाय-पानी पिलाया व विधायक के रायपुर में होने की जानकारी दी। विधायक निवास से निकलने के बाद ग्रामीणों ने विधायक के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही वहां पर अशांति का महौल बनाया गया, जिसककी सर्वत्र निंदा की जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि जिस जमीन को ग्रामीण अपना बता रहे है, वह मध्यप्रदेश शासन के समय सोसायटी बनाकर कास्तकारी करने के लिए लिया गया था। जिसे मध्य प्रदेश शासन के द्वारा ही सोसायटी की जमीन को निरस्त करते हुए अपने कब्जे में ले लिया था। जो राजस्व रिकार्ड में अभी भी दर्ज है। जमीन पर जिन ग्रामीणों का कब्जा है उनके द्वारा तहसील कार्यालय, अनुविभागीय न्यायालय के साथ-साथ विभिन्न न्यायालयों में अपना दावा प्रस्तुत कर आवेदन लगाए थे, जिसको सभी न्यायालयों के द्वारा खारिज कर दिया गया है।
अतिक्रमण हटाए जाने के बाद सरपंच व पंचों ने राजस्व व पुलिस प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि अतिक्रमण हटने के बाद अब अब ग्राम का विकास करने में परेशानी नहीं होगी।

Gulal Verma Desk
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