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13 वर्षों में घरों से 20 हजार से अधिक सांपों को पकडक़र छोड़ा गया जंगल में

एम. सूरज कुमार व नोवा नेचर कर रहे मदद

रायपुर

Published: August 14, 2021 08:31:16 am

मैनपुर। सांप प्रकृति के कुछ बेहद खूबसूरत और आवश्यक संरचना मे से एक है, लेकिन इनसे जुड़ी किस्से- कहानियों के कारण सदियों से लोगों का इनसे डरना स्वाभाविक हो गया है। इसके विपरीत हमारे आसपास रहने वाले कई प्रजाति विषहीन होते हैं और उनसे मानव जीवन को किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती। पिछले 13 वर्षो से जहरीले व अन्य प्रकार के सर्प को ग्रामीणों के घरों से पकडक़र जंगल तक सुरक्षित छोडऩे का कार्य करने वाली नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष एम. सूरज कुमार ने चर्चा करते हुए बताया कि ूपूरे छत्तीसगढ प्रदेश के चार अलग-अलग जिलों गरियाबंद, दुर्ग, रायपुर, बीजापुर में नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी पिछले 13 वर्षो से सर्प बचाने का कार्य कर रही है। इस कार्य में 24 घंटा लगभग 20-25 लोग लगे हुए हैं।
उन्होंने आगे बताया कि सभी सर्प वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है, और इसकी जानकारी वन विभाग को देने के बाद सर्पो को पकडकर सुरक्षित रहवास में छोड़ा जाता है। हमारे संस्था द्वारा अब तक लगभग 20 हजार सर्प पकड़े जा चुके हैं। उनके द्वारा अकेले लगभग 6 हजार से ज्यादा सर्प पकड़े जा चुके हंै। वर्ष 2012 से वे यह कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2002 से संस्था का गठन किया गया है। एक वर्ष पहले तक पूरे छत्तीसगढ़ में 32 प्रजाति के सांप पाए जाते थे, लेकिन पिछले एक वर्ष में और 10 प्रजाति के अतिरिक्त सर्प मिले हैं। अब इनकी संख्या 42 हो गई है।
उन्होंने बताया कि मैनपुर क्षेत्र के उंदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में काफी दुर्लभ प्रजाति के सर्प पाए जाते हैं। मैनपुर क्षेत्र में भारी संख्या में सर्प पकडक़र उन्हें बाकायदा उनके रहवास तक सुरक्षित छोड़ा गया है। भारत में पाए जाने वाले सभी सर्पों में सिर्फ 20 प्रतिशत ही विषैले हैं और 80 प्रतिशत विषहीन होते हैं। सांप किसान के सबसे अच्छे मित्र होते हैं। वे चूहों, मेंडक, कीट पतगें को खाकर उनकी संख्या को कम करते हैं। उनके द्वारा होने वाली बीमारियों को भी कम करते हैं। हाल में अध्ययन मे पाया गया सर्प के विष से कई बीमारियों का भी इलाज हो सकता है। छत्तीसगढ़ में कुछ 42 प्रजाति के सांप पाए जाते हैं। इनमें से तीन ही ऐसे होते हैं जिनसे मनुष्य को खतरा हो सकता है। वे हैं भारतीय नाग, सामान्य करैत व जुड़ा महामंडल।
सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार
एम. सूरज ने बताया कि सांप डसने के बाद पीडित व्यक्ति को जितना हो सके शांत रखें, उत्तेजित ना करें। इससे रक्त की गती बढ़ेगी और विष हृदय तक चला जाएगा। दंश के स्थान पर किसी प्रकार का काटना, विष चूसना, रस्सी गांठ बंधना आदिना करें। इससे समस्या बढ़ेगी कम नहीं होगी। पीडि़त व्यक्ति को किसी भी प्रकार के नशीली पदार्थ या चीजों का सेवन ना कराये। झाडफूंक, बैगा, गुनिया से बचें। प्राथमिक उपचार हो सके तो दंश किए सर्प की पहचान करें या उसका फोटो लेकर दूर हो जाएं। बेंडेज या कपड़ेे की चौड़ी पट्टी को दंश वाले स्थान से जितना हो सके भाग को लपेटे और तत्काल अस्पताल जाएं। पोलीवलेंट एंटीवेनम राज्य में पाए जाने वाले सभी विषैले सर्पों के दंश के प्रति कारगर हैं, जिसे चिकित्सक की सलाह पर ही दिया जाएगा। विषहीन सर्प के काटने पर भी यदि असमंजस्य लगे तो अस्पताल में एक दिन के लिए निगरानी में रहें। इन्हें सुरक्षित दूरी से लम्बे लकड़ी के सहारे घर से बाहर करें।
13 वर्षों में घरों से 20 हजार से अधिक सांपों को पकडक़र छोड़ा गया जंगल में
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