घरों में विराजित करने गणपति की प्रतिमा लेने उमड़ी भीड़

गणेशोत्सव आज से, लोगों में भारी उत्साह

By: Gulal Verma

Updated: 10 Sep 2021, 05:15 PM IST

बलौदाबाजार। कोरोना संक्रमणकाल में एक ओर जहां लोग तीसरी लहर को लेकर आशंकित हैं, वहीं शुक्रवार को गणेश चतुर्थी होने के साथ ही पूरे दस दिनों के लिए गणपति बप्पा विराजमान रहेंगे, जिससे लोगों में भारी उत्साह है। गुरुवार को प्रतिमा दुकानों में गणपति की प्रतिमा लेने के लिए लोगों की भीड़ रही। अपने घरों में बैठाने के लिए बप्पा को लेने आए बच्चे विशेष रूप से काफी उत्साह में नजर आए। सार्वजनिक गणेशोत्सव पर प्रशासन के प्रतिबंधों के चलते इस वर्ष घरों में विघ्न विनाशक को बैठाने के लिए लोगों में काफी उत्साह नजर आ रहा है।
विदित हो कि तीजा के दूसरे दिन गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है। नगर समेत अंचल में भी गणपति स्थापना का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है तथा चौक-चौराहों तथा घरों में बड़ी संख्या में गणपति स्थापना की जाती है। बीते वर्ष से कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन द्वारा सार्वजनिक गणेशोत्सव समितियों के लिए भले ही कड़े नियम निर्धारित कर दिए हैं, परंतु बप्पा को अपने घरों में बैठाने का जोश लोगों में भरपूर नजर आ रहा है। बीते तीन-चार दिनों से नगर के मुख्य मार्ग किनारे गणपति की प्रतिमाएं सजी हुई हैं। इन स्थानों पर बड़ी संख्या में पहुंचकर लोग गणपति बप्पा की प्रतिमा ले रहे हैं। गणपति स्थापना के मुहूर्त के बारे में जानकारों ने बताया कि भगवान गणपति को विघ्नहर्ता माना जाता है, लिहाजा उनकी स्थापना किसी भी समय की जा सकती है। परंतु सुबह गणपति स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है।
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा दर्शन मना है
हिंदू मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन जहां गणपति की स्थापना की जाती है, वहीं इस दिन चन्द्रमा का दर्शन किया जाना पूरी तरह से मना होता है। मान्यता के अनुसार इस दिन चन्द्रमा ने गणपति का उपहास किया था, जिसके बाद गणपति ने चन्द्रमा को श्राप दिया था। जिसके बाद से इस दिन चन्द्रमा के दर्शन करने वाले को गंभीर कलंक लगने की आशंका होती है। लिहाजा, मान्यताओं में इस दिन चन्द्रमा दर्शन निषेध माना जाता है। इस दिन की खास बात है कि साल के अन्य गणेश चतुर्थी को व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के बाद चन्द्रमा को अध्र्य देती हैं, परंतु भादो यानी गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा दर्शन निषेध होता है तो महिलाएं इस दिन अध्र्य भी नहीं देती हैं।
कैसे करें पूजा प्रथम देव की
शुक्रवार को विराजने के बाद 19 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी। प्रात:काल जगने के बाद सभी दैनिक कामों से निवृत होकर स्नान करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लेते हुए गणपति का ध्यान करें। एक साफ चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर इसके ऊपर गणेशजी की प्रतिमा को स्थापित करें। गंगा जल का छिडक़ाव करके पूरे स्थान को पवित्र करें। भगवान श्रीगणेश को पुष्प की मदद से जल अर्पित करें। इसके बाद लाल रंग का पुष्प, जनेऊ, दूब, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, नारियल और मिठाई भगवान को समर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाएं। सभी चढ़ावा के बाद भगवान गणेश की धूप, दीप और अगरबत्ती से आरती करें। गणेश जी का पूजन करते समय दूब घास, गन्ना और बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।

Gulal Verma Desk
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