मणिकंचन केंद्र से मिला 58 महिलाओं को रोजगार

हर महीने 6 हजार रुपए कमा रहीं महिलाएं

By: Gulal Verma

Published: 23 Sep 2021, 04:50 PM IST

बलौदाबाजार। बलौदाबाजार में नगर पालिका परिषद द्वारा 3 मणिकंचन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। तीनों मणिकंचन केंद्र में 58 महिलाएं विभिन्न प्रकार के कार्य कर हर माह 6 हजार रुपए की आय प्राप्त कर रही हैं। यह महिलाएं विभिन्न स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। इनके द्वारा गोबर की लकड़ी, गोबर के दीये और गोबर का खाद बनाने का कार्य किया जा रहा है।
बलौदाबाजार नगर के वार्ड क्रमांक 10 में स्थित मणिकंचन केंद्र की सुपरवाइजर सुनीता साहू ने बताया कि मणिकंचन केंद्र खोलने के बाद महिलाओं के लिए रोजगार का एक नया जरिया बन गया है। यह कार्य शुरू होने के बाद हम सभी महिलाओं में एक नया हौसला जागृत हुआ और आत्मविश्वास आया। महिलाओं का कहना है कि इस कार्य के शुरू होने से कम से कम उनके परिवार के बच्चों का पालन पोषण और शिक्षा का कार्य आसानी से हो रही है। इसके पहले वह आर्थिक तंगी से गुजर कर बहुत लाचार और बेबस महसूस करती थी। बायो कंपोस्ट जैविक खाद बनाने के लिए महिलाएं इसी वार्ड में स्थित सब्जी बाजार से सब्जियों के अवशेष उठाकर लाती हैं, जिससे जैविक खाद का निर्माण किया जाता है। प्रतिमाह सिर्फ इसी केंद्र में प्रतिदिन 10 क्विंटल खाद का निर्माण किया जा रहा है। आने वाली नवरात्रि पर्व व दीपावली को देखते हुए इन महिलाओं द्वारा गोबर के दीयों का निर्माण किया जा रहा है। अभी तक इस केंद्र में 1500 गोबर के दीए बनाए जा चुके हैं। यह गोबर के दिए 30 रुपए प्रति दर्जन में विक्रय किए जाते हैं। अभी तक गोबर की लकड़ी तकरीबन 5 क्विंटल बेची जा चुकी है। यह लकड़ी 10 रुपए प्रति किलो में बिक्री की जाती है। तकरीबन 40 क्विंटल गोबर से बनी लकड़ी अभी भी स्टॉक में उपलब्ध है। गोबर की लकड़ी से भी बड़े पैमाने पर महिलाएं आय अर्जित कर सफलतापूर्वक अपना जीवन यापन कर रही हैं। इसके अलावा भैंसापसरा स्थित समुदाय विशेष की निर्धन गरीब बस्ती के लोग जो पॉलिथीन व प्लास्टिक का कचरा बीनने का काम करते हैं उनके द्वारा भी इस मणि कंचन केंद्र में प्लास्टिक संबंधी वस्तुओं और कचरा एकत्रित कर उनकी छंटाई की जाती है और उसका विक्रय किया जाता है। इस विक्रय कार्य में तकरीबन 14-15 महिलाएं अपना रोजगार सृजित कर रही हैं। इनके द्वारा लाए गए प्लास्टिक कचरे को मणिकांचन केंद्र में छटाई की जाती है। उसके बाद प्राप्त सभी प्लास्टिक सामग्री सफेद प्लास्टिक, पन्नी, लोहा, टीना, प्लास्टिक की बोतल इत्यादि बड़े पैमाने पर इक_ा होती है और बिक जाती है। इसके माध्यम से 15 महिलाएं प्रति जोड़ी 6 हजार रुपए की मासिक आय अर्जित करती हैं। यह सारा कार्य नगर पालिका के मार्गदर्शन में संचालित होता है।

Gulal Verma Desk
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