लीला के लीला

कहिनी

By: Gulal Verma

Updated: 11 Oct 2021, 04:29 PM IST

गमरू के जर पीरा माड़ते नइये। खड़े नइ हो सकत, रावन कहां बना पाही। महानिया एक हजार रुपिया नारियल ल लहुटावत कहिस। रावन समिति वाले चक्कर म परगे। पांच पदाधिकरी हर बछर जइसे चंदा उगाही करके मूरतिकार महोबिया तीर आय रिहिन। अध्यक्ष बोलिस- देख महोबिया पीछू बछर ग्यारा हजार दे रेहेन। ऐ बछर पंदरा हजार लेले। फेर, तिही रावन बनाबे जी। महोबिया धीर लगहा कहिस- बीस हजार म नइ बना सको। एक आडर ल पूरा नइ कर सकत हौं।का बताव मोर हेल्पर गमरू बीमार हे। ये जान के महुं थरथरा गे हंव। समिति वाले- ठीक हे सहर जाके पता लगावत हंन। नइ के कोनो दवा नइये। तभी लें, जावत-जावत गमरू के घर तको झांके बर पहुंच गे।
गमरू के नोनी लीला गांव के होसियार लडक़ी ल सब जानय। हर खेल म, गाना-बजाना सब म एक नंबर हे। सब झन ला राम-राम कहिके परछी म बइठारिस। गमरू के हालत देख के सब मान ग सही म कमजोर हो गे हे। बचपन से गमरू मूरतिकार के हाथ बटावत हे। आधा कलाकार बनगे हवय। फेर, मोतीझरा बुखार ह तोड़ के रख दिस। लीला सब झन ल कहिस- ससर जाके देख आवो अउ जादा झन घूमह।ू आके बताहू मंय इंतजाम करहूं। मोर उपर भरोसा करे ला परही, फेर पहिली सहर किंजर के आ जाओ। लहूट के बता देहू, का होइस मंय अगोरा करहूं।
सब झन के जाये के बाद लीला अपन बाबू ल कहिस- बाबू तैं सुते-सुते मोला बताबे मंय अपन मंडली ल जोर के रावन बनाय बर चाहत हंौं। बस तोर सहारा चाही। गमरू हंस परिस- वाह बेटी वाह, तोर बाप आज तक महोबिया के कमिया रिहिस। वोकर बेटी मूरतिकार बनहू कहिथे। लीला कहिस-गांव के तिहार हे बाबू। घर-घर के चंदा माने सबके आसीरवाद जुड़े हे। भगवान हिम्मत दिही, मंय बना के बताहूं।
थोरकिन देर के बाद खोमिन, लता, मीना, दुरगा, बोधिनी, रमशीला, सुनु सब जुरियागे। मीटिग होगे। गमरू के बीमारी से जूझत परिवार ल सहारा दे बर सरमदान करेबर सब तइयार होगे। रात के आठ बजे समिति वाले मुुंहु लटकाए आ गे कहिस। सहर म कोनो रावन बनाय बर तियार नइ होइस। हममन पच्चीस हजार के लालच दे देन, फेर कोनो बयाना झोके बर तियार नइ होइस। लीला बोलिस- सब भगवान के रचे लीला हे कका, ऐ बछर रावन मोर टीम बनाही, फेर एडवांस म दस हजार देहू, बाकी रावन खड़े होय के बाद।
लीला अपन बाबू गमरू ल दस हजार धराइस, वो खुस होगे। दूसर दिन कंडरा पारा के नथेला से पचास सइगो बांस बिसा लिन। बाकी लडक़ीमन घर-घर जाके जुन्ना अखबार बटोर लिन।गमरू तिर बड़े मुड़ी के साचा पठेरा म रखे रिहिस। कई बछर पहिली महोबिया बड़े रावन के आर्डर बर बनाय रिहिस। फेर, कोनो नइ बनवा सकिन, तेकर सेती बड़े मुड़ी के साचा गमरू ल दे दे रिहिस। आज वो काम आ गे। बड़े मुड़ी के हिसाब से हाथ गोड़, पेट सब बड़े बनाय बर परही। दूसर दिन बड़े मेडम संग सहर जाके रंगीन कागज, पेंट मुकुट बर चमकीला सनपना ले आइस। सब लडक़ीमन मिल के बड़े-बड़े बटन, जेवर माला, तलवार बना डारिन। रावनभाठा के लिपई-पोतई होइस।
बाला महाराज सबला कहिस- चलो राम लीला खेलबो। सब तइयार होगिन। कान्हा देवा राम लछमन, नमन हनुमान, मधुर विभीषण रोमित सुग्रीव अउ सब अलग-अलग पाठ लेके तइयार होगे। लीला अउ वोकर सहेलीमन ताके सीता, मंदोदरी, त्रिजटा, कौसल्या, कैकई, मनथरा बनगे। बाला महाभारत के रमायन मंडली हारमोनियम, ढोलक, मंजीरा के तान जम गे। राम लीला, रावन दहन, आतिसबाजी होने वाला हे ये खबर जंगल म आगी असन बगर गे। चारों डहार गांव म मनखे दसहरा के इंतजार करे लगिन।
गमरू के मेहनत, उत्साह अउ दवा के सेती सुधार होगे। वोहा चले फिरे लगिस। जेन हमहोबिया के हेलपर रिहिस अब डायरेक्टर बनगे। नवा-नवा कलाकार ल मौका का मिलगे। अतेक बड़ रावन खड़े होगे। बस, देखो-देखो मचगे। पटाखा, बम, दनाका लड़ी ्रफुलझरी ल रावन के सेरवानी म अइसे सजा दिस, जइसे राजा खड़े हे। लीला ल पहिली ही बांचे ग्यारा हजार दे दिन। वो पइसा पाके सब लडक़ीमन नवा-नवा फराक ले आइन। चुनई होवइया हे, जान के सब पारटी के नेतामन बढ़-चढ़ के भाग लेत रिहिन। सब गमरू ल भेंट दे लगिस। गमरू के आंखी ले अंासू आ गे। अपन बेटी लीला के गुन, हुनर ल देख-सुन के वोहा गद्गद् होगे।

Gulal Verma Desk
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