छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 : कांटे की टक्कर वाली सीटों पर रोमांचक होगा मुकाबला

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 : कांटे की टक्कर वाली सीटों पर रोमांचक होगा मुकाबला

Deepak Sahu | Publish: Sep, 07 2018 12:21:11 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

विधानसभा की दो सीटें ऐसी थीं, जिनमें हार-जीत का अंतर एक हजार मतों से भी कम था

मिथिलेश मिश्र@रायपुर. विधानसभा के लिए हुए पिछले चुनाव में कुछ सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिली। विधानसभा की दो सीटें ऐसी थीं, जिनमें हार-जीत का अंतर एक हजार मतों से भी कम था। 10 सीटों पर यह अंतर 2500 वोटों से कुछ कम कुछ अधिक था। इनमें से कुछ सीटों का विश्लेषण करें तो क्षेत्र के हालात बहुत नहीं बदले हैं। कुछ बुनियादी समस्याएं अभी भी जस की तस हैं। उनको दूर करने के लिए राजनीतिक दलों के अपने-अपने वादे हैं। मतदाता किनपर भरोसा करता है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इन सीटों पर इस बार मुकाबला रोमांचक होने की संभावना जताई जा रही है।

सबसे कम अंतर से फैसले वाली 10 सीट

क्रमांक विधानसभा जीते हारे मतों का अंतर
01 तखतपुर राजू सिंह क्षत्रिय(BJP)

आशीष सिंह ठाकुर(Congress)

608
02 मोहला मानपुर तेजकुंवर गोवर्धन नेताम(Congress) भावेश शाह मंडावी(BJP) 956
03 बैकुंठपुर भइयालाल रजवाड़े(BJP) वेदांती तिवारी(Congress) 1069
04 डोंगरगांव दलेश्वर साहू(Congress) दिनेश गाँधी(BJP) 1698
05 रायपुर ग्रामीण सत्यनारायण शर्मा(Congress) नन्द कुमार साहू(BJP) 1861
06 खैरागढ़ गीतवार जंघेल(Congress) कोमल जंघेल(BJP) 2190
07 धरसींवा देवजी भाई पटेल(BJP) अनीता शर्मा(Congress) 2390
08 राजिम संतोष उपाध्याय(BJP) अमितेश शुक्ल(Congress) 2441
09 कवर्धा अशोक साहू (BJP) मोहम्मद अकबर(Congress) 2558
10 जैजैपुर केशव चंद्रा(BSP) कैलाश साहू(BJP) 2579

विधानसभा क्षेत्र: तखतपुर
मुद्दा बिजली यहां की प्रमुख समस्याओं में शुमार है। कम बिजली मिलना, पॉवर कट से लोग परेशान हैं। गांवों में साफ पानी को लेकर शिकायतें हैं। डॉक्टरों और शिक्षकों की कमी भी मसला है।

मेरे पहले कार्यकाल में गांव में ही सडक़ नहीं थी। अब कोई गांव पहुंचविहीन नहीं है। स्कूलों-कॉलेजों की संख्या बढ़ी है। बिजली उप केंद्रों की संख्या चार से बढक़र 11 हो गई है।
राजू सिंह क्षत्रीय, विधायक

पांच वर्ष से जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं। किसानों के मुददे पर बड़ा आंदोलन किया। तखतपुर में बिजली के लिए बड़ा प्रोटेस्ट हुआ। सुविधाओं के लिए संघर्ष जारी है।
आशीष सिंह ठाकुर, पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी

विधानसभा क्षेत्र: राजिम
धान उत्पादक प्रमुख क्षेत्रों में शुमार राजिम में सिंचाई प्रमुख मसला है। पंपों को बिजली की अनुपलब्धता और नहरों का अधूरा रहना बड़ा मुद्दा है। कौशल्या मंदिर भी भावनात्मक मसला बना हुआ है।

मुख्यमंत्री की मदद से क्षेत्र में 1200 करोड़ के विकास काम करवाए हैं। रूके हुए कामों पूरा करवाया है। राजिम में लंबे समय से लंबित राजस्व अनुभाग कार्यालय शुरू हो गया है।
संतोष उपाध्याय, विधायक

जब मैं मंत्री था तो गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याओं की जानकारी लेता था। वहां सारी मांगों को पूरा किया। अभी भी क्षेत्र में लगातार सक्रिय हूं। उनके सुख-दुख: में शामिल हूं।
अमितेश शुक्ल, पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी

विधानसभा क्षेत्र: डोंगरगांव
मुद्दा- बिजली कटौती, लो वोल्टेज यहां की प्रमुख समस्याओं में शुमार है। साफ पानी, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और स्कूलों में शिक्षकोंं की कमी मुद्दा बना हुआ है। पलायन भी बड़ी समस्या है।

चुनाव परिणाम आने के दूसरे दिन ही आम मतदाताओं से शतत संपर्क रहा है। क्षेत्र की शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़, बिजली और पानी जैसी मूलभूत समस्याओं को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री रमन सिंह और सांसद अभिषेक सिंह के माध्यम से काम करवाए हैं। लोगों की व्यक्तिगत समस्याओं को दूर करने के साथ उनके सुख-दुख में सहभागी बने हैं। विधानसभा क्षेत्र के सभी गांवों में आना-जाना रहा है।
दिनेश गांधी, पूर्व भाजपा प्रत्याशी

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