रायपुर दक्षिण और खरसिया विधानसभा के विभिन्न तबकों के मतदाताओं की राय

रायपुर दक्षिण और खरसिया विधानसभा के विभिन्न तबकों के मतदाताओं की राय

Deepak Sahu | Publish: Sep, 12 2018 05:22:14 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

भाजपा-कांग्रेस की सबसे बड़ी जीत वाली विधानसभा सीटों का हाल

रायपुर. प्रदेश में भाजपा की दूसरी सबसे बड़ी जीत वाली सीट है। विधायक बृजमोहन अग्रवाल प्रदेश के कृषि एवं जल संसाधन मंत्री भी हैं। हर घर में उनकी पहचान है। लेकिन प्रदेश के ताकतवर नेता होने की वजह से लोगों को उनसे जितनी उम्मीदें थी, उसमें कुछ कसर महसूस होती है।

स्थानीय लोग बढ़ती आपराधिक घटनाओं और शराब की दुकानों की वजह से कुछ नाराज हैं। स्वास्थ्य केंद्रों का भी हाल ठीक नहीं है। हालांकि खोखोपारा में एक 30 बिस्तर अस्पताल बना है। लेकिन अधिकतर लोगों का मानना है कि इससे मरीजों की कतार कम नहीं हुई है। लोगों को मेडिकल कॉलेज और एम्स ही जाना पड़ता है। लोग कहते हैं कि स्थानीय विधायक चुनाव से एक महीने पहले केवल शिलान्यास करते हैं, उसका बहुत फायदा नहीं मिलता। क्षेत्र के आधे लोग मानते हैं कि सरकारी दफतरों में काम कराना आसान हुआ है, लेकिन 60 प्रतिशत लोगों ने काम के लिए रिश्वत की बात भी कही है।

 

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विधायक और मंत्री, बृजमोहन अग्रवाल ने बताया क्षेत्र में 100 करोड़ की सडक़ें बनी हैं। तालाबों का सौंदर्यीकरण हुआ है, खोखोपारा और मठपुरैना में 30 और 100 बिस्तर अस्पताल बने हैंं। 5 हाइस्कूलों और 10 मिडिल स्कूलों का उन्नयन कराया है। एनिमल होल्डिंग सेटर भी बना है।

कांग्रेस ,निकटम प्रतिद्वंद्वी, किरणमयी नायक ने बताया हकीकत यह है कि पिछले चार aसाल से विधायक ने अपने क्षेत्र का ध्यान रखा ही नहीं है। दूसरे के कामों को अपनी उपलब्धियों के तौर पर गिना रहे हैं। आखिरी साल में वे क्षेत्र में उतरते हैं धनबल के सहारे जीत जाते हैं।

 

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खरसिया

कां ग्रेस की दूसरी सबसे ज्यादा लीड वाली विधानसभा खरसिया में हैपिनेस इंडेक्स बहुत ज्यादा सुखद नहीं है। लोगों के उम्मीद के मुताबिक उन्हें न तो सुविधा मिल सकी है और न ही माहौल मिल सका है। यानि कि इस विधानसभा में खुशियां जैसे बूंद-बूंद टपक रही है। विधानसभा चुनाव 2008 और 2013 के बीच के फासले को देखें तो लोग इसे आमूलचूल परिवर्तन ही बता रहे हैं। उनके कहने का आशय है कि इतने दिन बीतने के बाद इतना काम तो हो ही जाता है। उनका आशय समस्या के त्वरित निदान को लेकर है जैसे हमने सडक़ मांगी, पुल मांगा लेकिन इसके लिए या तो चुनावी साल का इंतजार होता है या फिर दो तीन साल बाद बजट में शामिल होगा, अगले साल इसकी स्वीकृति होगी जैसी स्थिति है। वहीं अब विकास के इस गति के आधार पर यदि साल 2018 की दिशा की बात करें तो लोगों का यह मानना है कि समय के अनुसार काम होंगे, व्यवस्था एकाएक कुछ इलाकों की तरह चमत्कार के स्वरूप में नहीं बदलेगी।

खरसिया,विधायक, उमेश पटेल ने बताया सरकार दस साल से इस क्षेत्र में ध्यान नहीं दे रही है। डाक्टरों और संसाधनों की कमी है। शिक्षक नहीं हैं, इलाके में अपराधों में कमी नहीं आ रही है। कई पत्र कई विषयों को लेकर लिखा गया है लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही है।

निकटतम प्रतिद्वंद्वी, जवाहर नायक ने बताया खरसिया में विधायक की अनुकंपा नियुक्ति हुई है। यहां के विधायक हमेशा निष्क्रिय रहे। जनता के हित पर कभी ध्यान नहीं दिया, इसलिए लोग परेशान है। सरकार तो सब कर रही है लेकिन विधायक निष्क्रिय हैं।

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