Chaitra Navratri 2021: चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की होती है उपासना, जानिए मंत्र, कथा और पूजा विधि

Chaitra Navratri 2021: चैत्र नवरात्रि का आज पांचवां दिन है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के माता स्कंदमाता (Maa Skandmata) के स्वरूप की उपासना की जाती है। माता स्कंदमाता अत्यंत दयालू हैं।

By: Ashish Gupta

Updated: 17 Apr 2021, 09:33 AM IST

रायपुर. चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2021) का आज पांचवां दिन है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के माता स्कंदमाता (Maa Skandmata) के स्वरूप की उपासना की जाती है। माता स्कंदमाता अत्यंत दयालू हैं। कहते हैं कि देवी दुर्गा का यह स्वरूप मातृत्व को भी परिभाषित करता है। इनकी चार भुजाएं हैं। इनकी दाहिने तरफ की ऊपर वाली भुजा में भगवान स्कंद गोद में हैं। दाहिने तरफ नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा वर मुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में भी कमल है। स्कंदमाता का वाहन शेर है। स्कंदमाता कमल आसन पर भी विराजमान होती हैं, इसीलिए माता स्कंदमाता को पद्मासना देवी के नाम से भी जाना जाता है। देवी स्कंदमाता को भोग में केले का फल और खीर अवश्य चढ़ाएं।

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माता स्कंदमाता की पूजा विधि
नवरात्रि में आज के दिन सबसे पहले चौकी पर सफेद या लाल वस्त्र पर मां स्कंदमाता की स्थापना करें। इसके साथ कलश और अखंड ज्योत की पूजा करें। साथ ही नवग्रहों की भी पूजा करें। इसके साथ चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दूर्वा और सुहाग की सामग्री अर्पित करें। साथ ही फूलों की माला, धूप, दीप, नैवेद्य और पान-सुपारी जरूर अर्पित करें। पूजा करते समय दुर्गा शप्तशती का पाठ भी करें।

माता स्कंदमाता का बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।

स्कंदमाता का पूजा मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

व्रत कथा
प्राचीन कथा के अनुसार ताड़कासुर नाम का एक राक्षस था। ब्रम्हा जी को प्रसन्न करने के लिए वह घोर तपस्या कर रहा था। उसके कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रम्हा जी उसके सामने आए और उन्होंने ताड़कासुर से वरदान मांगने के लिए कहा। तब ताड़कासुर ने अमर हो जाने का वरदान मांग लिया। ब्रम्हा जी ने ताड़कासुर को समझाया जिसने भी जन्म लिया है उसे एक दिन मरना ही है। इससे ताड़कासुर निराश होकर ब्रम्हा जी से कहा मुझे ऐसा वर दें कि भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही उसकी मृत्यु हो।

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ताड़कासुर का ऐसा मानता था कि भगवान शिव कभी भी विवाह नहीं करेंगे। इसीलिए उसकी कभी भी मृत्यु नहीं होगी। जब उसे यह आशीर्वाद मिल गया तब उसने लोगों पर हिंसा करना प्रारम्भ कर दिया। ताड़कासुर के अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे और ताड़कासुर से मुक्ति दिलाने प्रार्थना करने लगे। देवताओं की प्रार्थना सुनने के बाद भगवान शिव ने मां पार्वती से विवाह किया और कार्तिकेय के पिता बने। बाद में कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध किया।

शास्त्रों के अनुसार इनकी कृपा से अज्ञानी भी ज्ञानी हो जाता है। पहाड़ों पर रह कर सांसारिक जीवन में नवचेतना का निर्माण करने वाली देवी हैं। मां स्कंदमाता स्कंदकुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण भक्त इन्हें स्कंदमाता के नाम से पुकारते है। कहा जाता है कि मां स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। कहा जाता है जो लोग निःसंतान हैं मां स्कंदमाता कि उपासना करते हैं तो उन्हें संतान प्राप्ति का भी योग मिल जाता है।

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