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बासी के महत्तम : बासी खाय ले लोगनमन के भूख अउ पियास दूनों मिटा जथे

भात ल पानी म डार के रात के रखे जाथे। बिहनिया जब वोला खाके किसान खेत जाथे, त न भूख लागय, न पियास। बासी ह पेट ल भरथे त वोकर पसिया ह पियास मिटाथे।

रायपुर

Updated: May 02, 2022 04:49:17 pm

दुनियाभर म एक मई ल जांगर टोर कमाने वालामन के दिन माने जाथे। दुनिया बहुत तरक्की कर लिस, फेर मजदूर के जिनगी उही ढंग ले चलत हे। कविमन मजदूर के जिनगी के संगे-संग चंट चलाकमन के तरक्की के बारे म लिखे हें। हरि ठाकुर लिखें हें-
लोटा लेके आने वाला।
इहां टिकाइन बंगला।
जांगर टोर कमाने वाला।
हे कंगला के कंगला।
ऐसे काबर होथे? जांगर टोर कमाने वाला कंगला रहि जथे अउ छल-परपंच करइया बंगला टेका लेथे। ये बात सदा दिन चलिस। तभे तो कहावत हे
‘कमाए निगोटी वाला, खाये टोपी वाला।’ संत पवन दीवान लिखित- देस जाय कुंडा म, सिद्ध कर सुवारथ ल, नेतामन टोपी बना के पहिर लव भारत ल।
जमीन म गडक़े काम करइया, पछीना बोहाने वाला मजदूरमन के ताकत कभु कम नइ होइस। सोसन चाहे जइसे चलिस, एकता के काम संगे-संग चलत गिस। अगर, बड़हरमन ल धन के घमंड हे, त गरीब ल अपन बल के जानबा हे। तभे तो धमतरी के कवि भगवती सेन ह लिखिस।
हम काबर कोनो ल डरविन।
जब असल पछीना गारत हन।
हम नवा सुरूज परघाए बर।
श्रम के आरती उतारत हन।
मजदूर-मजदूर भाई-भाई, ए नारा दुनियाभर म चलथे। जात-पात, ऊंच, नीच, गीता-कुराान के झगड़ा सब मजदूर जगत म नइ चलय। लड़वइयामन थक गे, फेर मजदूरमन के एकता नइ टूटीस।
सवाल रोटी के हे। सबले बड़े ऐकरे वाल हे। कविमन गजब सुग्घर बात लिख देथे।
सुदामा परसाद ह लिखे हे-
एक आदमी ह रोटी बेलथे।
दूसर आदमी ह रोटी खाथे।
एक तीसर आदमी हे
जौंन ह न रोटी खाथे,
न रोटी बेलथे।
वोहा रोटी संग खेलथे।
मंय पूछथंव ओ कौन हे,
मोर देस के संसद मौन हे।
ये कविता म मजदूरमन के एकता अउ वोला टोरने वालामन के कोसिस करइया के बारे म लिखे गे हे।
मजदूर दिवस म हर बछर एक से बढक़े एक काम होथे। फेर, येसो हमर छत्तीसगढ़़ म एकठन बहुत अच्छा काम होइस हे। मजदूरमन ल सनमान देवई माने जगभर ल सनमान देवई। जउन ह छत्तीसगढ़ के मजदूर, किसान, आदिवासी, बूता करइयामन के संसो करही उही ह मान पाही, ये बात ल सबो जानत हन।
एक मई के बोरे बासी खाके मजदूर दिवस के महत्तम ल सबला बताय गिस, ऐ बात ह बहुचेत होइस।
हमर किसान मुख्यमंतरी ह ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी, छत्तीसगढ़ के ये चिनहारी’ नारा दिस। जांगर टोर कमाने वालामन के उपज के अच्छा भाव दिस। एक मई मजदूर दिवस म बोरे बासी खाय के नारा देके मजदूर, बनियार, मेहनतकस लोगनमन ल अनोखा सम्मान दिस। ‘जइसे अन- तइसे मन’ कहावत हे। त बासी के बारे म केहे गे हे - ‘गजब पुस्टई भरे हे भइया, छत्तीसगढ़ के बासी म।’
भात ल पानी म डार के रात के रखे जाथे। बिहनिया जब वोला खाके किसान खेत जाथे, त न भूख लागय, न पियास। बासी ह पेट ल भरथे त वोकर पसिया ह पियास मिटाथे। स्ंासारभर म बासी ह अइसन भोजन ये जेकर संग पानी पीये के जरूरत नइ परय। खाना अउ पीना दूनों एकेठन बासी म होथे। बासी ल मजदूर, आम मनखे, किसान संग जोर के जउन खाय अउ महत्तम बताय के संकल्प ले गे हे वोहा छत्तीसगढ़ के पहिचान के बड़े कारज ए।
वोइसे तो बासी के महिमा छत्तीसगढ़ के बहुतझन कविमन बताय हें। फेर टिकेन्द्र नाथ टिकरिहा के कविता म बासी के गुन अउ गजब सुग्घर ढंग ले बताय गे हे। छत्तीसगढ़ के परमुख नाटककार टिकेन्द्र नाथ टिकरिहा ह बासी के बारे म लिखे हे-
अइसे हावय छत्तीसगढ़ के बासी
जइसे नवा बहुरिया के
मुच-मुच हांसी।
आगू लिखथें कि
उथलही के मरम जानिस नइ,
गहिरी के हावय ऐहा बासी।
माने बासी ल गहिरही म खाय जाथे। थारी ह उथली होथे। गहिरही बरतन ह गहिर होथे। जेकर सेती कवि केहे हे कि बासी ल गहराई पसंद हे। उथली पसंद नइ ए। ऐहा बड़े बात ए। छत्तीसगढ़ के बासी ल जइसे गहराई पसंद हे, वोइसने छत्तीसगढ़ के हर संस्कार म गहराई हे। मुख्यमंतरी ह बहुत गहरा सोच-बिचार के बाद संगे -संगे म सबला वोकर मरम बताथे।
भाव धान के मिल ही पूरा।
केनो वचन न रहय अधूरा।
मुख्यमंतरी किहिस अउ सचमुच म धान के घोसि कीमत मिलिस। अब तो 2800 के भाव मिलही ए केहे जात हे। त छत्तीसगढ़ के बिसेसता ल दुनिया जानय ए कोसिस बड़़ई के लइक हे। नवा-नवा नारा नवा छत्तीसगढ़ के नवाराधानी म पढ़े बर मिलथे। मजदूर दिवस के मौका म घलो नवा नवा नारा चलही।
बोरे बासी गोंदली नून खाके
करबो बूता दून।
बोरे बासी आमा के अथान खाके
बढ़ाबे सबके मान।
थोकन बात मई दिवस के हो/ बर चाही। 1886 म अमरीका के सिकागो सहर म लाखों मजदूर आठ घंटा काम करे के मांग करे बर सकलइल। पंदरा-सोला घंटा काम लेवइया सरकार ह गोली चलवा दिस। ग्यारा मनखे मरिन, चार नेतामन ल फांसी होगे। 1889 ले आज तक उही सहीद अउ मजदूर एकता के नाव म एक मई के मजदूर दिवस मनाए जाथे। आज सबो जगा धीरे-धीरे जागरन होवत हे। एकता के बात होवत हे। छत्तीसगढ़ सरकार ह मजदूर दिवस ल मान देबर मजदूर मेहनत करइयामन के बासी ल पहली बेर अतेक जोरलगहा मान दे हे।
छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ के देवी- देवता, छत्तीसगढ़ के नाच-पेखन, छत्तीसगढ़ के खान-पान, परंपरा के महत्तम बताना जरूरी हे। इही तरह हमर नवा राज छत्तीसगढ़ के बड़े पहिचान बनही।
सब ल काम मिलय,
सबके मुंह म रहय हांसी,
सब संग सब मिलंय-जुलंय,
सब बर पुर जय बासी।
बासी के महत्तम : बासी खाय ले लोगनमन के भूख अउ पियास दूनों मिटा जथे
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