खैइरी कुकरी के खोज

कहिनी

By: Gulal Verma

Published: 29 Mar 2019, 04:36 PM IST

होरी तिहार म जम्मो मनखे रंग-गुलाल म मात गे हे। मेहा माते हंव हीरा चोरी के पतासाजी म। डिटेक्टर बाबू होय ले जिम्मेदारी बढ़ जथे। दरूहामन के लड़ई-झगरा के सेती पुलिसमन करा समे नइये। संगवारी डा. हकला ह मोर घर आइस। मेहा बताएंव के हीरा चोरी के खोजबीन म लगे हंव। वारदात म एकठन टोपी अउ कुकरी मिले हे। कुकरी ल देख के मन नइ मानिस त वोला मार डरेंव। वोकर गर म हीरा मिलिस। हीरा मिलगे त चोर घलो ह पकड़ म आ जही। कुकरी के गोड़ म चिट्ठी बंधाय रहिस। वोला पढ़ के पता चलिस के चोर के नांव मंगलू राम हे। वोहा अपन सुवारी ल जन्मदिन के दिन खैइरी कुकरी उपहार म देय रहिस।
डा. हकला कहिस- अखबार म बिग्यापन दे ले वोहा खच्चित आही। सिरतोन म वोइसनेच होइस। बेरा उत्ते मंगलू पहुंच गे। वोहा टोपी अउ कुकरी मांगे लगिस। मेहा कहेंव- तेहा अपन टोपी अउ कुकरी ल छोड़ के काबर भागेस? मंगलू कहिस- पुलिस ह सब ल पकड़-पकड़ के लेगत रहिस, वोला देखके मेहा भाग गेंव। बता मंगलू तेहा कुकरी ल कोन दुकान ले बिसाय रहेंस? साहेब बिहारीलाल के दुकान ले। ठीक हे, टोपी ले जाय अउ कुकरी के पइसा। काबर के कुकरी ल तो खा डरेन ह।
मंगलू के जाय के बाद दूनों संगवारी पहुंच गंन बिहारीलाल के दुकान म। बिहारीलाल बताइस के वोहा खैइरी कुकरा-कुकरी ल बदीनभाई के फारम ले लानथें। हमन बदीनभाई के फारम पहुंच गेंन। अइसने बिकरी-बट्टा के बारे म बात करत रहेंव ततके बेर एकझन परभु नाव के टूरा आके बदीनभाई ल पूछिस- मोर खैइरी कुकरी ल काकर करा बेचे हस? बदीनभाई ल मेहा पूछेंव- ए टूरा तोला काबर परेसान करत हे? वोहा कहिस- ए टूरा के दीदी ह अपन पोसवा कुकरीमन ल मोर करा बेचथे। गांव के अउ कतकोन मनखेमन घलो बेचथें। फेर, कोनो सरेखा नइ लेवंय। ए टूरा के दीदी के कुकरी म ‘हीरा जरे होहय’ तइसे मोर खैइरी कुकरी कहिके ऐहा हलाकान कर देहे।
हमन दूनों संगवारी समझ गेंन के इही टूरा ह हीरा चोरी करके लुकाय खातिर खैइरी कुकरी ल खवा दिस होही। फेर, वोकर दीदी ह उही कुकरी ल बेच दिस होही। टूरा ल तीर म बला के पूछेंव- सहीं-सहीं बता परभु खैइरी कुकरी के काबर खोज-खबर लेवत हस? अइसे हमन ल खैइरी कुकरी अउ हीरा मिल गे हे। परभु कहिस- साहेब, अपन मालिक घर ले हीरा चोरी करके कुकरी ल खवा दे रहेंव। वो कुकरी ल दीदी ह बेच दिस। कुकरी मिल जही त हीरा तको मिल जही सोच के फारम के चक्कर लगावत हंव।
परभु ल पकड़ के हमन वोकर मालिक तीर लगेन। मालिक कहिथे- हत रे, टूरा तेहा धोखा देबे अइसन नइ सोचे रहेंव। परभु कहिथे- मोला छमा कर दे मालिक। कभु चोरी नइ करंव। मालिक कहिथे- होरी तिहार के दिन अउ तोर पहिली गलती के सेती छमा कर देंव। सिरतोन मोला परभु जइसे हीरा मिल गे। संगवारी दूनों मिलके मालिक करा बिदा मांगेन। बिदागरी म बने पोठ रुपिया दिस। तहां रंग-गुलाल लेवत घर आके सुग्घर होरी तिहार मनाएन।

Gulal Verma Desk
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