नदावत हे नानपन के खेल

लोक संस्क

By: Gulal Verma

Published: 24 May 2018, 11:02 PM IST

गरमी के छुट्टी म नानपन के दिन म संगी-संगवारी के संग मिल-जुल के किसम-किसम के खेलंय। गांव के चौक, मइदान म लइकामन के भीड़ गांव के फुलवारी असन चहके। गिल्ली-डंडा, डंडा पिचरंगा, छू-छुवउला, बांटी, भौंरा, बिल्लस, कोंटान, तीरा-पासा, असन कतको खेल लइकामन के संग -संग बड़ेमन ल घला रिझाये।
ननपन म छूट्टी के अगोरा रहय। ये खेलमन ल बेरोक-टोक खेले बर। गांव के बर-पीपर के छंइहा ह खेल के जगा होवय। जिहां गांव भर के लइकामन जुरिया के खेल खेले। घर के अंगना म गोटा, तिरी पासा, रेस टिप, रोसनदान, घांदी-मुंदी, नूनबोरा, चूड़ी लुकउला असन कतनो खेल होवय । ये खेलमन सुवस्थ मनोरंजन के संग-संग हमर अन्तस म ईमानदारी, खेल भाव अउ सुवस्थ मन, देह ल घलो बनाथे। ये खेलमन मनखे के संग परकरीति ले घलो जुड़े रहय।
'घांदी मुंदी घोर दे पानी दमोर देÓ असन कतको बात खेल-खेल म लइकामन के मुंह ले निकलय। चोरी ले बचे बर संदेस देवत रोसनदान खेल म-
Óरोसनदान भई रोसनदान,
Óसवा रुपय की घड़ी चुराई,
Óअब तो पकड़ में आना पड़ेगा,
जेल की रोटी खाना पड़ेगाÓ
ये खेलमन बाल मन ल रिझाये के संग-संग सन्देस घलो देथे। जेन जिनगी म काम आथे।
ये खेलमन मेल बढ़ाय, माटी ले जुड़े हो के सेती मनखे ल माटी ले जोड़थे। गांवभर के जानकारी घलो एक-दूसरे ले मिल जाथय। आज बिग्यान के जुग आय। सिरतोन म हमन तरक्की करत हन। बचपन म कान्वेंट अउ पब्लिक स्कूल ले रास्टरीय-अंतररास्टरीय पाठ्यक्रम ल पढ़त हन। बिकास के रद्द गढ़त हन।
पूरा संसार के जानकारी घलो एक क्लिक करे म मिल जावत हे। फेर, मनखे ह मनखे ले आज दूरहावत हे। नानपन आज सिकुड़त जावत हे। वो घर म बइठ यू-ट्यूब, वीडियो गेम म मस्त हे। परोसी के पता नइये। ककादाई- ममा ददा, धरुव, परहलाद के कहिनी ले दूरिहा के मोटू पतलू तक सीमित होके रहिगे हे। गांव के मनखे ले एक जगा सकलई, नाता-गोत्ता निभई सब सिरावत हे। आज सब अलग रहे बर चाहत हे। तेकर सेती अब हमर नानपन के ये खेलमन सूरता बन के रइ गे हे।

Gulal Verma Desk
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