नाचा म गम्मत

Gulal Verma

Publish: Jun, 14 2018 07:28:17 PM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
नाचा म गम्मत

लोककला

नाचा के बीच म परिवारिक, सामाजिक, राजनैतिक, जागरूकता, सिक्छा अउ सुवास्थ के संदेस दे बर होथे त गम्मत के रूप म कलाकार अभिनीत करथे। मान ले दहेज एक सामाजिक समसिया हे। वोला एक छोटकुन कथा के रूप दे के जतेक कलाकार के जरूरत होथे, उही के बीच ले के उही उद्देस्य अउ समसिया ल गम्मत के रूप म अभिनीत करे जाथे।
नाचा के गम्मत म सामाजिक समसिया, परेम कथा, हास्य, बियंग, बाल बिहाव, टोनही समसिया, सिक्छा, सुवास्थ, ननद-भउजाई आदिमन के कथानक बना के बड़े ही परभावी भाव-भंगिमा, अभिनय, नाच-गाना, संवाद के माध्यम ले परस्तुत करे जाथे। गम्मत ल अइसे मौखिक परम्परा ले अभिव्यक्त अउ अभिनीत करे जाथे के कब पूरा रात बीत जथे, पहाती हो जथे, अभास घलो नइ होवय।
गांव के देखइयामन दिनभर बुता करे के बाद घलो जुड़, गरमी ल महसूस करे बिना 'नाचाÓ म अतेक लीन हो जथे के वोला थकावट के अनुभव ह पता नइ चलय। इही सेती नाचा बुता के परिहार घलो करथे। नाचा ल लोक कलाकारमन अपन कलाकारी, होसियारी, बुद्धिमानी स्मरन सक्ति, परतिभा अउ हाजिरजवाबी ले अभिनय करके जिनगी के सच्चाई, समाज के समसिया, कुरीति, कुनीति, सही-गलत बताथें। नाचा के गमम्त अतेक बढिय़ा होथे के बड़े-बड़े नाटकमन से ऐकर तुलना करे जाथे।
बगैर दिखावा, बगैर महंगा सेट, बगैर मेकअप, बगैर साज.सज्जा, सजावट के लोक जिनगी के व्यथा कथ, दुख-सुख के अइसे छबि बन जाथे के वोकर दूसर उदाहरन हमन ल बड़ मुसकुल ले मिलथे। नाचा के गम्मत ह लोगनमन ल हंसाथे घलो, रोवाथे घलो। नाचा संहिच म लोकगीत, लोक नाच, लोक संवाद के रसधारा ले लोगन ल सराबोर कर देथे। हर मनखे समझथे के गम्मत के कथा ह वोकर अपनेच घर-परिवार, समाज के आय। इही दे गे सक्छा के सन्देस, जिनगी के मूल, लइका-बुढ़वा के बिचार मन ल एक दिसा देथे। इही तरह नाचा अउ गम्मत मनोरंजन के संग जिनगी ल नवा दिसा देय के उचित माध्यम हे ।

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