तीजा के लुगरा

तीजा के लुगरा

Gulal Verma | Publish: Sep, 10 2018 10:34:47 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ी कहिनी

पा रा के जम्मोझिन ल तीजा जावत देखय, त जानाबई ल घलो अबड़ मन होवय। फेर, मन मार के रहि जाय। कहि नइ सकय बिचारी ह। भईमन अपन अपन जगा बने खात कमावत रहय। भतीजामन बड़े बड़े साहेब बनगे । फेर, जानाबई ल कोनो नइ पूछय। जानाबई के देरानी जेठानीमन ताना मारंय। तीजा लकठियातिस तहन जानाबई फोकटे-फोकट मइके के मनखे अगोरय। वोमन फकत अपन बेटा-बेटी, नाती-नतनीन म माते रहंय। बिगन पूछे एक-दू बेर हिम्मत करके चली दे रहिस बिचारी ह। त अइसे बेवहार करिन के झन पूछ। अइसे झलझलहा लुगरा दीन के ससुरार म देखाय म सरम आवय। गोबरहीन तको लुगरा हांस दीस।
एक बेर बिहाव म भात झलके बर वोकर देरानी ह उही लुगरा ल मांगिस अउ जाना दीदी के तिजाही लुगरा आय कहिके हांसी उड़इस। जानाबई अपमान के घूंट पीके रहि गीस। फेर, कुछु नइ कहि सकिस। बड़े बड़े भाई के गरीबीन बहिनी अउ बड़े-बड़े भतीजामन के असहाय लचार फुफु जानाबाई अपन मइके उपर गरब तको नइ कर सकय। जेकर तीर अपन मइके के गरब करतिस, तिही वोकर उपर हांसतिस। जेन असलियत जानय ते वोकर मइके उपर थूकंय घलो। बिरोध नइ कर सकय बिचारी जनाबई।
जानाबई के बेटी बाढग़े। ससुरार चलदीस। अब हरेक बछर बेटी तीजा आवय। धीरे धीरे जानाबई तीजा म मइके ल भुलाय लगिस। वोकर बेटी बने बढ़हर घर गे रहय। ससुरार म कोनो हांसय झन कहिके नोनी ल सुघ्घर तिजाही लुगरा देवय। ससुरार म देखावय त वोकर ससुरार वालेमन अबड़ खुस होवंय। तभो ले नोनी अपनेच तिजाही लुगरा ल अपनेच ससुरार वालेमन के आगू म हीन देवय। एक बछर के बात आय। जानाबई के नोनी तीजा आय ले मना कर दीस। जानाबई सोचिस हरेक बछर बेटी तीजा आही कहिके बहाना बना देवत रेहेंव। ये दारी नइ आवत हे। तीजा नइ जाय के मेहा कायेच बहाना मारहूं। तेकर ले ये बछर महूं तीजा चल देवंव का!नोनी संग ॥ड्ड1 म गोठियइस । नोनी कहिथे- बिगन लेवइया कइसे जाबे। जानाबई कहिथे- अपन मइके जाय बर मान-सम्मान नइ खोजे बेटी। नोनी कहिथे- लुगरा जीते बर आहे अइसे कही। तोला भातिन तबने लुगरा देतिन। फेर, बर बिहाव म तको म तोला झलझलहा लुगरा धरा देथें। जानाबई कहिथे- काहीं नइ होय बेटी। मइके के चेंदरा घलो नोहर होथे।
बहुत गुनिस बिचारी। ननपन के सुरता आ गे। गांव गली खोर के सुरता म जानाबई मान-अपमान ल भुलागे। मने मन तय कर डरिस के कोनो पूछय चाहे झन पूछय तीजा जाय बर हे । पारा-मोहल्ला के मनला अउ अपन देरानी-जेठानीमन ल फोकटे-फोटक कहि दीस के, मोर मइके ले तीजा आय बर खबर उप्पर खबर आवत हे। मोर भाई-भतीजामन करा टेम नइये। नइते लेय बर आय रहितिन। पोरा के दिन मन भर के ठेठरी खुरमी अउ अइरसा बना डरिस अउ बिहानभर मोटर म बइठके मइके अमरगे।
मइके म गोड़ धोये बर पानी देवत बहू के मुंहु करू -करू होय लागिस। उपराहा कस आय रहय बिचारी । मइके के मोहो म । रातकुन बखरी जावत भतीजा अउ बहू ल गोठियावत सुन डरिस। ऐला कोन बलइस होही तीजा म। भतीजा कहत रहय। बाबूजी कहिस होही। बहू कहिथे - ले अइगे त ठीके करिस। काली ले तोर रउतईन घलो नइ आवय। कमाही अउ दू मुठा खाही। लुगरा बर कइसे करहू? अपन नोनी बर लेहन तइसन मांगहीत। भतीजा कहत रहय लुगरा तो देच ले परही, फेर देखथन। बहू कहिथे - बिहाव म कमइयामन ल बांटे बर जेन लुगरा लाने रेहेव, तिही मेके एक-दू ठिन बांचे हे।
बिहनिया ले वापिस चल देके मन बना डरिस। फेर, ससुरार के मन का कइहीं। नाक ल ऊंच करके गे रेहे। अब का होगे। बड़ बड़ई मारत रेहे मइके के। कल्पना ले मन सिहरगे। रात भर ऐती -वोती कलथी मारत मन म अगुन-छगुन मात गे। बिहाने-बिहाने निरनय के कगार म पहुंचगे। बिहाने ले उठिस, मुखारी करके चहा तिपो डरिस। चारों खुंट काम-बूता ल सपेट के जुन्ना संगवारी संग मिले जावत हंव कहिके निकलगे। दू बज्जी घर म वापिस। खा-पी के सुत उठके घर के बरतन भांड़ा के मंजना धोना निपटाके फेर अपन संगवारीमन घर बइठे गोठियाये बर मसक दीस। दू दिन म तीजा आ गे। उहू दिन बिचारी जानाबई के दिनचरिया नइ बदलीस। फरहार के बेर नावा लुगरा मिलगे। फेर नावा लुगरा खजवाथे कहिके जुन्ना लुगरा म फरहार कर डरिस। तीजा नहाक गे। तिजिहारिनमन झरे लागिस। तीजा के पाछू चार दिन म वापिस जाय के तियारी कर डरिस।
घर के रउतइन घलो तीजा ले वापिस आ गे। तेकर सेती कोनो जानाबई ल रेहे बर एक भाखा नइ कहिन। मोटर म बइठके दंड पुकार के रो डरिस। सीधा अपन ससुरार नइ गीस। तीर के सहर म कपड़ा दुकान म नावा सुघ्घर लुगरा बिसावत, नोनी घर चलदिस। नोनी वोकर मइके के हाल चाल पूछत, तिजाही लुगरा देखाय बर कहिस। जानाबई अपन मइके के बड़ई गोठियाय लागिस अउ अपन लुगरा ला खुस होके देखाई । जनम नइ पहिरे रहय जानाबाई तइसे लुगरा ल देख के नोनी मुंहफार दिस। वापिस जाय के बेर नोनी ठेठरी-खुरमी ल वोकर झोला म डारे बर अपन हाथ डारिस त देखथे के वोमा एकठिन अउ लुगरा हे। धीरलगहा हेरिस। निच्चट झलझलहा। वो जान डरिस के इही लुगरा वोकर मइके के आय अउ ऐहा नोहे। दाई ल कुछू नइ कहिस। नोनी के एकझन सहेली जानाबई के मइके म ससुरार गे रहय। वोकर ले पूरा हालचाल पता चलगे के जानाबई संग वोकर मइके म कइसे बरताव होवत रहिस। अपन मइके के इज्जत राखे बर तीजा के दऊरान दूसर गांव म बनिहारिन बूता करके अपन कमई म सहर के दुकान ले सुघ्घर लुगरा ल बिसाये रहय।
ससुरार म देरानी जेठानी अउ परोसीनमन ल हांस -हांस के तिजाही लुगरा देखाके मइके के बड़ई करत जानाबई अघावत नइ रहय। सब्बो झिन वोकर मइके ल संहराय लग गे। मइके के इज्जत ल कइसे राखना हे तेला बात-बात म मइके ल कोसइया नोनी घलो जान डरिस। हरेक बछर तीजा म लुगरा बर भाई संग झगरा करइया नोनी ह कतको सुघ्घर तिजाही लुगरा ल हीन देवय। आज नोनी घलो मइके संग तीजा के लुगरा के महत्ता समझगे। जानाबई के ससुरार म तीजा लुगरा के सेती इज्जत बाढ़ गे। अब कोनो देरानी-जेठानी अउ परोसी वोला झलझलहा लुगरा के ताना नइ मार सकय।

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