सियानमन कमजोर नइ होवंय

सियानमन कमजोर नइ होवंय

Gulal Verma | Publish: Sep, 10 2018 10:42:46 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

बिचार

आ ज के जमाना म मनखे ह अब्बड़ सुवारथी होगे हे। वोहा हर जिनिस ल अपन बर का उपयोगी हे, इही सोच के अपन रिस्ता ल निभाथे। संगे-संग लोगनमन अपन संस्करीति ल भुलावत घलो जावत हें। सियान दाई-ददा, दादा-दादी, नाना-नानी अउ दूसर सगा-सोदरमन के सेवा-जतन नइ करंय। जेन जनम देय हे, पाले-पोसे हे, पढ़ाय-लिखाय हे, बर-बिहाव कराए हें, तेकरमन के उपेक्छा करथें। वोमन बीमार, असहाय, असक्त होथें त वोकरमन डहर ले मुंह फेर लेथें। अइसन सियानमन अब्बड़ दुख पाथें। अइसन काबर होवत हे, ऐहा सोचे-बिचारे के बिसय हे।
आधुनिक दवई के सेती लोगनमन के उमर बाढ़त जावत हे। तेकर सेती दुनियाभर म सियानमन के संख्या हर बछर मनमाड़े बाढ़त हे। दुनिया म लगभग 9 परतिसत सियान मनखे हें। ऐकरमन के जिनगी बड़ तकलीफ म हे।
नउकरी करइयामन रियाटर होथें तहां ले पइसा के मामला म कमजोर हो जथें। जिनगी जीये बर दूसर के आसरा म रहिथे। कुछु काम बुता बर घलो दूसर के मदद लेय बर परथे। तेकर सेती वोमन कभु-कभु ठगा जथें। आजकाल बइंक अउ एटीएम म सियानमन से धोखाधड़ी, ठगी बाढ़ गे हे।
सियानमन बर 'मेंटेनेंस एंड वेलफेयर आफ सीनियर सिटीजन एक्ट 2007Ó नांव के एकठिन कानून बने हे। ए कानून के मुताबिक जेन लइकामन अपन सियानमन ल खरचा नइ देवत हें, वोमन ल सरकार ह खरचा देय बर आदेस दे सकथे। ए आदेस ल न हाईकोरट सुनय न सुपरीम कोरट। अइसन म सियानमन ल अपन हित खातिर ए कानून के उपयोग करे बर चाही। कानून म इहू हावय के लोग-लइकामन ल देय धन-दलउत, संपत्ति, जमीन-जायदाद ल सियानमन वापिस ले सकथें। पुलिस ह घलो सियानमन के मदद खातिर एकठिन बिसेस नंबर अउ ऐफ बनाही।
बिदेस के देखा-देखी एक दिन महतारी दिवस, एक दिन पिता दिवस, एक दिन दोस्त दिवस जेन मनाय जाथे वोहा उंकरमन बर ठीक हे, जिहां लइकामन बाढ़थें तहां अपन दाई-ददा ले अलग हो जथें। फेर, हमर देस, समाज म सबो संग म रहिथें। अइसन म ए दिवस-परबमन हमरमन बर ढकोसला ए। ए ढकोसला ल नइ करे बर चाही। हमन ल जागरूक होय बर परही। सियानमन बर चिंता-फिकर करे बर चाही। सियानमन ल कभु कुछू दुख-पीरा झन होय ऐकर खिलाय रखे बर चाही।

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